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Chandigarh News: सिनेमा की चुनौतियों और सिनेमेटोग्राफर के संघर्ष पर की चर्चा
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चंडीगढ़। सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में मंगलवार को दो दिवसीय सार्थक सिनेमा उत्सव का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम पंजाब कला परिषद की ओर से पंजाब नव सृजणा दौरान शुरू किए पंजाब अभियान के तहत है। इसका आयोजन पंजाब सिनेमा और डिजिटल कला अकादमी की ओर से किया जा रहा है। मंच का संचालन अकादमी के सचिव प्रीतम सिंह रुपाल ने किया।
उत्सव के पहले दिन अकादमी के प्रधान हरजीत सिंह ने आए मेहमानों का स्वागत किया। दो दिनों तक चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा रखी। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे करनबीर सिंह सीबीया ने कहा कि आज के सोशल मीडिया के दौर में इस प्रकार के उत्सव का बहुत महत्व है। उन्होंने पंजाब नव सृजणा को महत्वपूर्ण बताते हुए कुछ सिनेमा दिखाने की चुनौतियों पर चर्चा की।
प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफर वरिंदर सैनी ने कला सिनेमा की यादें, फिल्मों के प्रमुख अंश और रूबरू विषय पर बात की। उन्होंने पहले फोटोग्राफी की दुकान पर बैठने के बारे में दिलचस्प बातें दर्शकों के साथ साझा की। उन्हाेंने हाेशियारपुर में पढ़ने के बारे में रोशनी डाली। उन्होंने फिल्म इंस्टीट्यूट पुणे जाने के बारे में, कलात्मक फिल्मों के बारे में भी बताया। उन्होंने अपनी फिल्म घासी राम कोतवाल जो दोस्तों के साथ मिलकर बनाई गई थी उस पर चर्चा की। उन्होंने कुछ फिल्मों की झलकियां दिखाकर फिल्मी सेटों की हुई चुनाव के बारे में अनुभव बताए। उन्होंने सिनेमेटोग्राफर को आनेवाली मुश्किलों के बारे में भी बात की। उन्होंने कई फिल्म निर्देशकों के साथ की फिल्मों के बारे में भी अनुभव बताए।
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इस सत्र के दौरान पंजाब कला परिषद के चेयरमैन स्वर्णजीत सवी ने कहा कि हम लोगों को पंजाब के संकट के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसका भरपूर समर्थन मिल रहा है। हम नाटक, बहस, सेमिनार के द्वारा यह काम कर रहे हैं। इस सत्र में पर्यटन और सभ्याचार मामले विभाग के सलाहकार दीपक बाली ने भी समूलियत की।
सन 1920 में लाहौर में बन चुके थे नौ सिनेमाघर :
समागम के अलग सत्र पंजाबी सिनेमा की ऐतिहासिक यादें: फिल्मों के प्रमुख दृश्य और रूबरू में फिल्म इतिहासकार और संग्रहकर्ता भीम राज गर्ग ने अपनी बात की। उन्होंने पंजाब के सिनेमाघर के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में लाहौर में नौ सिनेमाघर बन चुके थे। उन्होंने लाहौर में मूक फिल्मों के निर्माण के आरंभिक यत्नों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने पंजाब की पहली फिल्म राधे-श्याम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उस समय भी हिंदी फिल्मों में पंजाबी गाने बजते थे। उन्होंने दर्शकों को अपील की कि 29 मार्च को पंजाबी सिनेमा अपनी 90वीं वर्षगांठ मनाएगा। उन्होंने अपने संघर्ष के बारे में भी बात की। उत्सव के पहले दिन डॉ. योगराज, राजविंदर समराला, कमलप्रीत, दविंदर सिंह जगदीप सिद्धू सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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उत्सव के पहले दिन अकादमी के प्रधान हरजीत सिंह ने आए मेहमानों का स्वागत किया। दो दिनों तक चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा रखी। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे करनबीर सिंह सीबीया ने कहा कि आज के सोशल मीडिया के दौर में इस प्रकार के उत्सव का बहुत महत्व है। उन्होंने पंजाब नव सृजणा को महत्वपूर्ण बताते हुए कुछ सिनेमा दिखाने की चुनौतियों पर चर्चा की।
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प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफर वरिंदर सैनी ने कला सिनेमा की यादें, फिल्मों के प्रमुख अंश और रूबरू विषय पर बात की। उन्होंने पहले फोटोग्राफी की दुकान पर बैठने के बारे में दिलचस्प बातें दर्शकों के साथ साझा की। उन्हाेंने हाेशियारपुर में पढ़ने के बारे में रोशनी डाली। उन्होंने फिल्म इंस्टीट्यूट पुणे जाने के बारे में, कलात्मक फिल्मों के बारे में भी बताया। उन्होंने अपनी फिल्म घासी राम कोतवाल जो दोस्तों के साथ मिलकर बनाई गई थी उस पर चर्चा की। उन्होंने कुछ फिल्मों की झलकियां दिखाकर फिल्मी सेटों की हुई चुनाव के बारे में अनुभव बताए। उन्होंने सिनेमेटोग्राफर को आनेवाली मुश्किलों के बारे में भी बात की। उन्होंने कई फिल्म निर्देशकों के साथ की फिल्मों के बारे में भी अनुभव बताए।
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इस सत्र के दौरान पंजाब कला परिषद के चेयरमैन स्वर्णजीत सवी ने कहा कि हम लोगों को पंजाब के संकट के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसका भरपूर समर्थन मिल रहा है। हम नाटक, बहस, सेमिनार के द्वारा यह काम कर रहे हैं। इस सत्र में पर्यटन और सभ्याचार मामले विभाग के सलाहकार दीपक बाली ने भी समूलियत की।
सन 1920 में लाहौर में बन चुके थे नौ सिनेमाघर :
समागम के अलग सत्र पंजाबी सिनेमा की ऐतिहासिक यादें: फिल्मों के प्रमुख दृश्य और रूबरू में फिल्म इतिहासकार और संग्रहकर्ता भीम राज गर्ग ने अपनी बात की। उन्होंने पंजाब के सिनेमाघर के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में लाहौर में नौ सिनेमाघर बन चुके थे। उन्होंने लाहौर में मूक फिल्मों के निर्माण के आरंभिक यत्नों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने पंजाब की पहली फिल्म राधे-श्याम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उस समय भी हिंदी फिल्मों में पंजाबी गाने बजते थे। उन्होंने दर्शकों को अपील की कि 29 मार्च को पंजाबी सिनेमा अपनी 90वीं वर्षगांठ मनाएगा। उन्होंने अपने संघर्ष के बारे में भी बात की। उत्सव के पहले दिन डॉ. योगराज, राजविंदर समराला, कमलप्रीत, दविंदर सिंह जगदीप सिद्धू सहित कई लोग उपस्थित रहे।