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'मैं और पति दिव्यांग, बेटा कैंसर पीड़ित, भर्तियां निकल नहीं रहीं, किडनी बेचने की इजाजत दे दीजिए'
Fri, 24 Jul 2020 04:29 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 24 Jul 2020 04:29 PM IST
सार
- जीबीटी भर्तियों के इंतजार में एचटेट पास महिला की टूटी आस
- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजा पत्र, किडनी बेचने की इजाजत मांगी
- नौकरी तो मिली नहीं और अब बेटे के इलाज के लिए चाहिए पैसा
- 8 साल से भर्तियों का इंतजार कर रहे हजारों जेबीटी, एचटेट पास युवा
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राष्ट्रपति को पत्र लिखने वाली कृष्णा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मैं, मेरे पति और मेरा छोटा बेटा तीनों दिव्यांग हैं। छोटे बेटे को कैंसर है, जिसके इलाज के लिए मैं अपनी किडनी बेचना चाहती हूं। कैंसर की वजह से उसकी आंखों की रोशनी चली गई है। इस समय उसका इलाज चल रहा है, जिसके लिए पैसों की जरूरत है। दिव्यांग होने के बावजूद पति जैसे-तैसे दिहाड़ी करके परिवार चला रहे हैं।
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मैं खुद भी जेबीटी बीएड ग्रेजुएट हूं। एचटेट (जेबीटी पात्रता योग्यता) भी क्लियर किया हुआ है, लेकिन आठ साल से सरकार ने नियमित भर्तियां ही नहीं निकाली। हाईकोर्ट भी इस संदर्भ में आदेश दे चुका है। नौकरी की इंतजार करते-करते मेरी पात्रता योग्यता भी एक्सपायर हो जाएगी। बेटे के इलाज में लगातार खर्च हो रहा है।
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आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। इसलिए मैं अपने बेटे के इलाज हेतु अपनी एक किडनी बेचना चाहती हूं। लिहाजा मुझे इसकी अनुमति दी जाए। यह शपथ पत्र रोहतक की दिव्यांग कृष्णा रानी ने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजा है।
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मैं खुद भी जेबीटी बीएड ग्रेजुएट हूं। एचटेट (जेबीटी पात्रता योग्यता) भी क्लियर किया हुआ है, लेकिन आठ साल से सरकार ने नियमित भर्तियां ही नहीं निकाली। हाईकोर्ट भी इस संदर्भ में आदेश दे चुका है। नौकरी की इंतजार करते-करते मेरी पात्रता योग्यता भी एक्सपायर हो जाएगी। बेटे के इलाज में लगातार खर्च हो रहा है।
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आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। इसलिए मैं अपने बेटे के इलाज हेतु अपनी एक किडनी बेचना चाहती हूं। लिहाजा मुझे इसकी अनुमति दी जाए। यह शपथ पत्र रोहतक की दिव्यांग कृष्णा रानी ने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजा है।
हरियाणा सरकार लोगों को बस आश्वासन पर आश्वासन दे रही
कृष्णा रानी ने बताया कि उन्होंने 2015 में पात्रता योग्यता परीक्षा पास कर ली थी। हरियाणा सरकार ने उनके जैसा हजारों युवाओं को आश्वस्त किया था कि जल्दी ही जेबीटी की भर्तियां निकालेंगी। आठ साल से हजारों युवा इन भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं। इसी आस में बहुत से युवाओं की पात्रता योग्यता एक्सपायर हो चुकी है और बहुतों की होने वाली है।
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मौजूदा राज्य सरकार भी जल्द जेबीटी भर्तियां निकालने का ऐलान कर चुकी है। लेकिन इसका इंतजार करते-करते अब उनकी आस टूटने लगी है। इसलिए उन्होंने मजबूरीवश अपने बेटे के इलाज के लिए अपनी किडनी बेचने की अनुमति मांगी है। कृष्णा रानी के अनुसार, उन्हें पूरी उम्मीद है कि यदि भर्तियां निकलती हैं तो वे इसे क्लीयर करके जेबीटी का रोजगार पा सकती हैं।
युवा एक्टिविस्ट श्वेता ढुल ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है। भर्तियों के इंतजार में आज परिस्थितियां ऐसी बन गई है कि एक दिव्यांग बेरोजगार महिला को अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
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युवा एक्टिविस्ट श्वेता ढुल ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है। भर्तियों के इंतजार में आज परिस्थितियां ऐसी बन गई है कि एक दिव्यांग बेरोजगार महिला को अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
हाईकोर्ट दे चुका आदेश, अब चल रहा अवमानना का केस
जीबीटी एचटेट पास एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश पाल ने बताया कि हरियाणा में इस समय एक लाख से अधिक युवा उम्मीदवार जेबीटी पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। मगर वर्ष 2012 के बाद से सरकार ने नियमित जेबीटी भर्ती का कोई विज्ञापन नहीं निकाला है। पात्रता परीक्षा पास प्रमाण पत्र की वैधता 5 साल की होती है।
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भर्ती के इंतजार में हजारों उम्मीदवारों की पात्रता योग्यता एक्सपायर हो चुकी है। इस साल भी दिसंबर तक करीब 15 हज़ार युवाओं की पात्रता भी एक्सपायर हो जाएगी। इसी संदर्भ में एक याचिका के दौरान हाईकोर्ट सरकार को जल्द इन भर्तियों का विज्ञापन निकालने का आदेश दे चुका है। मौलिक शिक्षा निदेशालय में इस बाबत 2 महीने में भर्तियां निकालने बात कही थी।
साथ ही यह बताया था कि इस वक्त 5695 पद भी रिक्त पड़े हैं। प्रदेशाध्यक्ष राजेश पाल के अनुसार, उसके बावजूद सरकार ने अभी तक भर्तियां नहीं निकाली है और अब अवमानना संबंधी केस हाईकोर्ट में डाला गया है। जिसकी अगली सुनवाई अगस्त में होगी।
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