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Chandigarh News: ऑयल टैंकर की टक्कर से हुआ दिव्यांग, 26.33 लाख का मुआवजा
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चंडीगढ़। ऑयल टैंकर की टक्कर लगने से सड़क हादसे के चलते दिव्यांग हुए युवक को मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 26 लाख 33 हजार 430 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुआवजे की राशि ऑयल टैंकर की बीमा कंपनी को अदा करनी होगी। याचिकाकर्ता बलवीर सिंह ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत एक करोड़ मुआवजे की मांग को लेकर जिला अदालत में याचिका दायर की थी।
करनाल के रहने वाले बलवीर सिंह ने अदालत में दायर की याचिका में बताया था कि 29 जनवरी 2017 को वह फूल चंद गोयल, निखिल गोयल, साहिल गोयल और अन्य लोग जीप से बालाजी मंदिर राजस्थान जा रहे थे। जीप को खेम राज धीमी गति से चला रहा था। दोपहर 4.30 बजे वह गांव पीचूपाडा खुर्द कलां जिला दौसा के पास पहुंचे तो एक ऑयल टैंकर बांदीकुई की तरफ से उनके पीछे से आया। टैंकर चालक लापरवाही और तेज गति से चला रहा था। टैंकर की तेज गति को देखकर उन्होंने अपनी जीप की स्पीड धीमी कर ली। टैंकर चालक ने बिना हॉर्न और इंडिकेटर दिए रॉंग साइड से आकर उनकी जीप को टक्कर मार दी। इस हादसे में जीप में सवार सभी लोगों को गंभीर चोटें आईं। इलाज के लिए उन्हें बांदीकुई के सिविल अस्पताल लेकर जाया गया, जहां फूल चंद गोयल की इलाज के दौरान मौत हो गई।
याचिकाकर्ता ने बताया कि हादसे में उसकी पसलियों में फ्रैक्चर आ गया और वह 100 प्रतिशत दिव्यांग हो गया। वह बिना अटेंडेंट के कोई काम नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वह हार्वेस्टर कंबाइन का मालिक था और उसे चलाकर सात लाख रुपये सालाना कमाता था।
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करनाल के रहने वाले बलवीर सिंह ने अदालत में दायर की याचिका में बताया था कि 29 जनवरी 2017 को वह फूल चंद गोयल, निखिल गोयल, साहिल गोयल और अन्य लोग जीप से बालाजी मंदिर राजस्थान जा रहे थे। जीप को खेम राज धीमी गति से चला रहा था। दोपहर 4.30 बजे वह गांव पीचूपाडा खुर्द कलां जिला दौसा के पास पहुंचे तो एक ऑयल टैंकर बांदीकुई की तरफ से उनके पीछे से आया। टैंकर चालक लापरवाही और तेज गति से चला रहा था। टैंकर की तेज गति को देखकर उन्होंने अपनी जीप की स्पीड धीमी कर ली। टैंकर चालक ने बिना हॉर्न और इंडिकेटर दिए रॉंग साइड से आकर उनकी जीप को टक्कर मार दी। इस हादसे में जीप में सवार सभी लोगों को गंभीर चोटें आईं। इलाज के लिए उन्हें बांदीकुई के सिविल अस्पताल लेकर जाया गया, जहां फूल चंद गोयल की इलाज के दौरान मौत हो गई।
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याचिकाकर्ता ने बताया कि हादसे में उसकी पसलियों में फ्रैक्चर आ गया और वह 100 प्रतिशत दिव्यांग हो गया। वह बिना अटेंडेंट के कोई काम नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वह हार्वेस्टर कंबाइन का मालिक था और उसे चलाकर सात लाख रुपये सालाना कमाता था।
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