दिग्विजय चौटाला ने कहा- अप्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव नहीं होने देगी इनसो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिग्विजय चौटाला ने छात्रसंघ चुनावों को लेकर एक बार फिर सरकार को चेताया है। दिल्ली स्थित कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में चौटाला ने कहा कि इनसो हरियाणा में अप्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव नहीं होने देगी। इनसो के साथ प्रदेश के सभी छात्र संगठन प्रत्यक्ष चुनाव की मांग करते आए हैं। एबीवीपी को लाभ पहुंचाने और प्रदेश में स्थापित करने के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव का सहारा लिया गया है। उन्हें कितनी भी बड़ी कुर्बानी देनी पड़े, अप्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव संपन्न नहीं होने देंगे।
उन्होंने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से आए नामांकन के आंकड़ों पर हैरानी जताते हुए कहा कि छात्रों ने बड़ी संख्या में नामांकन न कर इस लड़ाई को और मजबूती दी है। भाजपा, एबीवीपी के सहारे प्रदेश में भगवाकरण करना चाहती थी, लेकिन छात्रों ने 60 प्रतिशत तक नामांकन ही नहीं किया। छात्रों ने सरकार व भाजपा को आइना दिखा दिया है। भाजपा अब भी छात्रों की आवाज को समझते हुए 17 तारीख को होने वाले अप्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव को रोक दे। दिग्विजय ने बताया कि प्रदेश के 16 छात्र संगठनों ने चुनाव का बहिष्कार किया है। अब छात्र अपने हक को लेकर रहेंगे और 17 को सरकार के निर्णय के खिलाफ चुनाव का बहिष्कार कर वोटिंग नहीं होने देंगे।
दिग्विजय के अनुसार नामांकन का आंकड़ा
दिग्विजय ने बताया कि महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक में 222 सीआर चुने जाने थे, उसमें नामांकन केवल मात्र 131 ने किया। जाट कॉलेज रोहतक में 108 का चुनाव होना था, जहां किसी ने भी नामांकन नहीं कर भाजपा सरकार के अप्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव के दावों की पोल खोल दी। सिरसा सीडीएलयू में 82 सीटों पर नामांकन होना था, लेकिन वहां केवल मात्र साठ ही नॉमिनेशन हुए। भिवानी के बंसीलाल यूनिवर्सिटी में 38 सीटों पर चुनाव होने थे, लेकिन वहां केवल मात्र 20 ने ही नामांकन किया।
महेंद्रगढ़ के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में 7 नामांकन होने थे, एक भी नामांकन नहीं हुआ। पलवल में 33 सीटों पर चुनाव होना था, जहां केवल मात्र 11 ही नॉमिनेशन हुए। पानीपत में चार कॉलेजों के अंदर 123 सीटों पर चुनाव होने थे, जहां मात्र 65 नामांकन ही हुए। झज्जर के गवर्नमेंट कॉलेज बहादुरगढ़ में टोटल 21 सीटों पर चुनाव होना था, जहां केवल मात्र 16 नॉमिनेशन ही हुए। सोनीपत की यूनिवर्सिटी में 102 सीटों पर चुनाव होने थे, लेकिन वहां पर केवल 70 ही नामांकन फार्म भरे गए।
फरीदाबाद में 71 सीआर चुने जाने दे, जहां मात्र 57 नॉमिनेशन हुए। प्रदेश की सबसे बड़ी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में 224 सीआर बनने थे, जहां छात्रों ने अप्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव को नकारते हुए मात्र 124 नामांकन किए। फतेहाबाद के भट्टू कॉलेज में 10 सीआर चुने जाने थे, वहां किसी ने भी नामांकन नहीं किया। भूना कॉलेज में 6 सीआर चुने जाने थे, जहां मात्र दो ने नामांकन किया। गुरुग्राम में 67 सीआर चुने जाने थे, वहां एबीवीपी को छोड़कर किसी ने भी नामांकन दाखिल नहीं किया।
मेवात के गवर्नमेंट कॉलेज नगीना में 11 सीआर चुने जाने थे, मगर केवल 8 ने नामांकन किया। हिसार के गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी में 117 चुने जाने थे, लेकिन सिर्फ 92 ने नामांकन किया। जींद की सीआरएस यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में लगभग 70 सीटों पर चुनाव होना था, लेकिन सिर्फ 34 नामांकन ही हो पाए। करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में 70 सीटों पर 31 नामांकन ही हो पाए। डीएवी कॉलेज में 51 सीटों में से 30 पर, खालसा में 50 सीटों में से 8 पर नामांकन, यमुनानगर के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में 18 में से 6 पर, खालसा कॉलेज में 65 में से 39 पर, एमएलएन में 84 सीटों में से 36 पर ही नामांकन हो पाए।