कैप्टन बोले- बादलों को बेअदबी मामले में क्लीन चिट नहीं, चुनाव लड़ने की भी जताई इच्छा
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने बादलों को बेअदबी मामले में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर क्लीन चिट नहीं दी है, जोकि बरगाड़ी की घटना से पहले बादलों के डेरा सच्चा सौदा के साथ प्रगाढ़ संबंध और उनकी हाल में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के लिए दबाव डालकर जांच में बाधाएं खड़ी करने की कोशिशों से साबित होता है।
मुख्यमंत्री ने यह प्रतिक्रिया अपने एक इंटरव्यू की मीडिया में छपी हेडलाइन के जवाब में दी। उन्होंने स्पष्ट किया, किसी भी समय मैंने यह नहीं कहा कि प्रकाश सिंह बादल या उनके बेटे सुखबीर बादल शामिल नहीं थे। साक्षात्कार में मैंने जो कहा है, वह स्पष्ट है कि बादल ने वहां जाकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंगों का अनादर नहीं किया, लेकिन इस मामले में उनकी संलिप्तता से इंकार नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों बादल पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के अपराधियों जितने ही जिम्मेदार हैं, जिससे राज्य और लोगों के लिए एक के बाद एक घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि बादल न केवल अपने शासन के दौरान बेअदबी की घटनाओं को रोकने में विफल रहे, बल्कि उन्होंने दोषियों को साफ बरी होकर निकल जाने की अनुमति भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बादल जो कि उस समय सत्ता में थे, इन घटनाओं के लिए पूरी तरह जिम्मेवार हैं, जिससे बेअदबी की घटनाएं हुईं और उसके बाद गोलीबारी की घटना भी हुई।
वे इस संबंध में आरोपों से बच नहीं सकते क्योंकि यह अपराध भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंगों की बेअदबी के गुनाह जितना ही घिनौना है। कैप्टन ने कहा कि चुनाव में समर्थन जुटाने के लिए डेरे के साथ खड़े होने का फैसला एक सियासी कदम था लेकिन इससे आपराधिक गतिविधियों ने सिर उठाया जबकि वे सीधे तौर पर बेशक जिम्मेवार न हों लेकिन उनकी जवाबदेही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेअदबी मामले में आपराधिक कार्यवाही तो एक पक्ष है जिसके लिए शायद बादल दोषी न हों लेकिन बाकी जो कुछ हुआ, उस बारे में कौन जिम्मेदार है? डेरे के साथ संबंधों को लेकर क्या कहा जाए, जिससे बेअदबी के लिए हालात पैदा हुए और उसके बाद गोलीबारी हुई, जिसमें कुछ लोग मारे गए और कुछ जख्मी हुए।
जब तक पंजाब के लोगों को मेरी जरूरत, मैं चुनाव लड़ूंगा : कैप्टन
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब को नंबर एक राज्य बनाने का वादा दोहराते हुए 2022 के विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत भी दिए। दरअसल, कैप्टन ने 2017 के चुनाव लड़ते हुए यह एलान किया था कि यह उनका आखिरी चुनाव है। मंगलवार को उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वे तब तक आराम से नहीं बैठ सकते जब तक पंजाब वासियों को उनकी जरूरत है।
जनता जब तक नहीं चाहेगी, वे रिटायर नहीं होंगे। जब साल 2017 में मैंने मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी बार पंजाब की कमान संभाली तो मैंने सूबे के हरेक निवासी को वह सुविधा, वह हक देने का वादा किया जिसके वे हकदार हैं। मैं तब तक हार नहीं मानूंगा जब तक मैं अपना काम पूरा नहीं कर लेता।
उन्होंने कहा कि पंजाब और पंजाब वासियों ने 10 साल के दौरान शिरोमणि अकाली दल के राज में बहुत बुरा समय देखा है, बहुत कुछ झेला है। यह मेरा वादा है कि मैं अकाली दल के राज के 10 साल के दौरान पंजाब पर आए काले दिनों और काली यादों को मिटाने पर काम कर रहा हूं। यह मैं तब तक करता रहूंगा जब तक पंजाब पहले नंबर पर नहीं पहुंच जाता। अगर उसके लिए मुझे अगला विधानसभा चुनाव भी लड़ना पड़े तो मैं लड़ूंगा।