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डायलिसिस के लिए चंडीगढ़ नहीं आना होगा, अब पंचकूला में ही करवाएं
दीपक शाही /अमर उजाला, पंचकूला।
Updated Tue, 30 Aug 2016 01:54 PM IST
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किडनी के मरीज
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अगले माह से जिले के किडनी से संबंधित मरीजों को डायलिसिस के लिए चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें ये सुविधा पंचकूला के सेक्टर 6 के जनरल अस्पताल में मिलेगी। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के तहत मरीजों को डायलिसिस की सुविधा पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत दी जाएगी।
करीब 15 लाख की लागत से अस्पताल के इमरजेंसी के पास डायलिसिस सेंटर का सेटअप तैयार किया गया है। इसमें सवा करोड़ की लागत से मशीनें लगी हैं। टेक्निकल स्टाफ मशीन को इंस्टाल भी कर चुका है। अब इंतजार है सिर्फ स्वास्थ्य विभाग और पीपीपी के तहत डायलिसिस सेंटर लगाने वाली कंपनी के साथ मीटिंग का। ये मीटिंग सोमवार को ही होनी थी, लेकिन किसी कारणवश दिल्ली से कंपनी के अधिकारी नहीं आ पाए। अब ये मीटिंग मंगलवार को होगी। डायलिसिस की शुरुआत मीटिंग के बाद ट्रायल बेस पर होगी। ट्रायल करीब 15 दिन तक चलेगी। इसके बाद इसकी विधित शुरुआत होगी।
क्या होगा डायलिसिस चार्ज
जनरल अस्पताल में एक मरीज को 959 से 1130 के बीच डायलिसिस के लिए चार्ज किया जाएगा। जबकि बाहर प्राइवेट अस्पतालों में 2000 रुपये से शुरुआत होती है और 4500 रुपये तक डायलिसिस के लिए चार्ज किया जाता है।
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ये चार्ज होंगे
हीमोडायलिसिस फॉर सेरो निगेटीव केस-959
हीमोडायलिसिस फॉर सेरो पॉजेटीव केस-1130
इनके लिए फ्री सुविधा
कुछ कैटेगरी को फ्री डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। इनमें बीपीएल कार्ड धारक, अर्बन स्लम एरिया के मरीज, शेड्यूल कास्ट, दिव्यांग भत्ता पाने वाले शामिल हैं।
8 बेड का होगा डायलिसिस सेंटर
जनरल अस्पताल की इमरजेंसी के पास बनाया जा रहा डायलेसिस सेंटर आठ बेड का होगा। मरीजों की सं या बढने पर 5 बेड और बढाए जाएंगे।
क्या है डायलिसिस
किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर से जहरीला पदार्थ पूरी तरह नहीं निकल पाता, क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे पदार्थों की अधिकता होने पर कई प्रकार की समस्याएं बढ़ जाती हैं, तो ऐसे में मशीनों की सहायता से रक्त को साफ करने की प्रक्रिया को डायलिसिस कहते हैं।
डायलिसिस के प्रकार
सामान्य के प्रकार और गंभीरता के अनुसार डायलिसिस दो प्रकार का होता है
कितने प्रकार के डायलिसिस?
समस्या के प्रकार और गंभीरता के अनुसार डायलिसिस दो प्रकार का होता है-
हीमोडायलिसिस
यह एक प्रक्रिया है। जिसे कई चरणों में संपन्न करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में शरीर से विशेष प्रकार की मशीन द्वारा एक बार में 250 से 300 मिलिलीटर रक्त को बाहर निकालकर शुद्ध किया जाता है और वापस शरीर में डाला जाता है। इस शुद्धीकरण के लिए डायलाइजर नामक चलनी का प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया केवल अस्पताल में ही की जाती है।
पेरिटोनियल डायलिसिस
इस डायलिसिस में रोगी की नाभि के नीचे ऑपरेशन के माध्यम से 0एक नलिका लगाई जाती है। इस नलिका के जरिए एक प्रकार का तरल (पी. डी. लूइड) पेट में प्रवेश क राया जाता है। पेट के अंदर की झिल्ली डायलाइजर का काम करती है जो पी. डी. लूइड के अच्छे पदार्थो को शरीर में प्रवेश कराती है और रक्त में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालती है। यह तरल पेट में 5-6 घंटे तक रखना पड़ता है। इसके बाद नलिका के माध्यम से पी. डी. लूइड को बाहर निकाला जाता है। यह आजकल प्रचलन में क ाफी ज्यादा है। यह उपचार उन लोगों का होता है जो या तो बेहद कम उम्र या ज्यादा आयु के होते हैं, विज्ञान की भाषा में इसे एक्सट्रीम ऑफ एजेस कहते हैं। जिन लोगों को हृदय संबंधी समस्या हो या से लोग जो हीमोडायलिसिस प्रक्रिया को सहन न कर पाए उनके लिए उपचार का यह तरीका काफी उपयोगी होता है।
कोट्स
पीपीपी के तहत जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों से करीब आधे रेट पर दी जाएगी।
डॉ. बीना सिंह, पीएमओ जनरल अस्पताल पंचकूला।
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करीब 15 लाख की लागत से अस्पताल के इमरजेंसी के पास डायलिसिस सेंटर का सेटअप तैयार किया गया है। इसमें सवा करोड़ की लागत से मशीनें लगी हैं। टेक्निकल स्टाफ मशीन को इंस्टाल भी कर चुका है। अब इंतजार है सिर्फ स्वास्थ्य विभाग और पीपीपी के तहत डायलिसिस सेंटर लगाने वाली कंपनी के साथ मीटिंग का। ये मीटिंग सोमवार को ही होनी थी, लेकिन किसी कारणवश दिल्ली से कंपनी के अधिकारी नहीं आ पाए। अब ये मीटिंग मंगलवार को होगी। डायलिसिस की शुरुआत मीटिंग के बाद ट्रायल बेस पर होगी। ट्रायल करीब 15 दिन तक चलेगी। इसके बाद इसकी विधित शुरुआत होगी।
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क्या होगा डायलिसिस चार्ज
जनरल अस्पताल में एक मरीज को 959 से 1130 के बीच डायलिसिस के लिए चार्ज किया जाएगा। जबकि बाहर प्राइवेट अस्पतालों में 2000 रुपये से शुरुआत होती है और 4500 रुपये तक डायलिसिस के लिए चार्ज किया जाता है।
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ये चार्ज होंगे
हीमोडायलिसिस फॉर सेरो निगेटीव केस-959
हीमोडायलिसिस फॉर सेरो पॉजेटीव केस-1130
इनके लिए फ्री सुविधा
कुछ कैटेगरी को फ्री डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। इनमें बीपीएल कार्ड धारक, अर्बन स्लम एरिया के मरीज, शेड्यूल कास्ट, दिव्यांग भत्ता पाने वाले शामिल हैं।
8 बेड का होगा डायलिसिस सेंटर
जनरल अस्पताल की इमरजेंसी के पास बनाया जा रहा डायलेसिस सेंटर आठ बेड का होगा। मरीजों की सं या बढने पर 5 बेड और बढाए जाएंगे।
क्या है डायलिसिस
किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर से जहरीला पदार्थ पूरी तरह नहीं निकल पाता, क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे पदार्थों की अधिकता होने पर कई प्रकार की समस्याएं बढ़ जाती हैं, तो ऐसे में मशीनों की सहायता से रक्त को साफ करने की प्रक्रिया को डायलिसिस कहते हैं।
डायलिसिस के प्रकार
सामान्य के प्रकार और गंभीरता के अनुसार डायलिसिस दो प्रकार का होता है
कितने प्रकार के डायलिसिस?
समस्या के प्रकार और गंभीरता के अनुसार डायलिसिस दो प्रकार का होता है-
हीमोडायलिसिस
यह एक प्रक्रिया है। जिसे कई चरणों में संपन्न करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में शरीर से विशेष प्रकार की मशीन द्वारा एक बार में 250 से 300 मिलिलीटर रक्त को बाहर निकालकर शुद्ध किया जाता है और वापस शरीर में डाला जाता है। इस शुद्धीकरण के लिए डायलाइजर नामक चलनी का प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया केवल अस्पताल में ही की जाती है।
पेरिटोनियल डायलिसिस
इस डायलिसिस में रोगी की नाभि के नीचे ऑपरेशन के माध्यम से 0एक नलिका लगाई जाती है। इस नलिका के जरिए एक प्रकार का तरल (पी. डी. लूइड) पेट में प्रवेश क राया जाता है। पेट के अंदर की झिल्ली डायलाइजर का काम करती है जो पी. डी. लूइड के अच्छे पदार्थो को शरीर में प्रवेश कराती है और रक्त में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालती है। यह तरल पेट में 5-6 घंटे तक रखना पड़ता है। इसके बाद नलिका के माध्यम से पी. डी. लूइड को बाहर निकाला जाता है। यह आजकल प्रचलन में क ाफी ज्यादा है। यह उपचार उन लोगों का होता है जो या तो बेहद कम उम्र या ज्यादा आयु के होते हैं, विज्ञान की भाषा में इसे एक्सट्रीम ऑफ एजेस कहते हैं। जिन लोगों को हृदय संबंधी समस्या हो या से लोग जो हीमोडायलिसिस प्रक्रिया को सहन न कर पाए उनके लिए उपचार का यह तरीका काफी उपयोगी होता है।
कोट्स
पीपीपी के तहत जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों से करीब आधे रेट पर दी जाएगी।
डॉ. बीना सिंह, पीएमओ जनरल अस्पताल पंचकूला।