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ड्रग्स रैकेट में पूर्व डीजीपी के सनसनीखेज खुलासे

Fri, 27 Jun 2014 09:24 AM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 27 Jun 2014 09:24 AM IST
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DGP Shashikant about Drugs Trade in Punjab

पंजाब के पूर्व डीजीपी (जेल) शशिकांत ने विभिन्न मौकों पर नशे की गर्त में धंसते जा रहे पंजाबी नौजवानों का मुद्दा उठाने के साथ ही पंजाब सरकार को नशा तस्करी के खतरे से अवगत करवाते हुए समय रहते कार्रवाई करने की सलाह भी कई बार दी। आज इस मसले के चुनावी मुद्दा बनने के बाद प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू हो चुका है।

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ड्रग्स विरोधी इस अभियान और पंजाब में फैले नशे के मकड़जाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूर्व डीजीपी शशिकांत ने ‘अमर उजाला’ के साथ विशेष मुलाकात के दौरान विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है इस साक्षात्कार का पहला भाग:-

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समय के सा‌थ राजनेता हुए तस्करी में सक्रिय

DGP Shashikant about Drugs Trade in Punjab

प्र. पंजाब में इस कदर नशे का जाल फैलने के पीछे आप किसे मुख्य वजह मानते हैं?
उ. राजनेताओं और सुरक्षा एजेंसियों के कुछ अधिकारियों का नेक्सस। आजादी के बाद पाकिस्तान के रास्ते गोल्ड की स्मगलिंग से जुड़े उस वक्त के कई बड़े राजनीतिक व्यक्ति, समय बीतने के साथ ड्रग्स तस्करी में सक्रिय हो गए, क्योंकि पाक की आईएसआई को इसमें ज्यादा हित दिखाई पड़ने लगे।

पुलिस सहित देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस काम में उनका साथ दिया। आईएसआई ने आतंकवाद के दौर में हथियारों के साथ हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों की खेप भेजनी भी शुरू कर दी। यह धंधा उक्त नेक्सस की छत्रछाया में फलता-फूलता चला गया।

पाकिस्तानी रूट के कारण पंजाब में फैला नशा

DGP Shashikant about Drugs Trade in Punjab

प्र. पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते आगे जाते रूट को इस बीमारी की वजह माना जाता है। आप इस कारण को कितना सही मानते हैं?
उ.
300 बीसी से 1947 तक यह सिल्क रूट के रूप में जाना जाता था। चीन से शुरू होने वाला यह रूट अफगानिस्तान में डायवर्ट होकर मौजूदा पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश करता था।

आजादी तक इसी रास्ते से सिल्क का व्यापार भारत के लिए होता रहा, लेकिन 1947 में बंटवारे के वक्त यहां इतना खून बहा कि यह रेड रूट हो गया। इसके बाद गोल्ड की स्मगलिंग ने इसे येलो रूट में तब्दील कर दिया।

1980 के बाद से हेरोइन सहित अन्य नशीले पदार्थों की सप्लाई की वजह से यह व्हाइट रूट में परिवर्तित हो चुका है। इसके इतने बदलावों का कारण केवल पैसा ही रहा है।

आईएसआई और इसके भारत स्थित कुरियरों को व्हाइट रूट के जरिए यूरोपियन और अमेरिकी देशों में नशे स्मगल करने से होने वाली भारी-भरकम कमाई ने पंजाब में इस बीमारी के पांव पसारने में बड़ी अहम भूमिका अदा की।

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कुरियरों में आती है ड्रग्स

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प्र. कुरियरों को इस काम से कितनी कमाई हो जाती होगी?
उ.
आईएसआई इस काम के लिए भारत में काम कर रहे अपने कुरियरों को मेहनताने के रूप में प्रति कंसाइनमेंट 2000 से 50,000 रुपये तक देती है।

इसके अलावा वह कंसाइनमेंट में से कुछ हेरोइन, स्मैक, अफीम आदि अपने पास रख लेते हैं और उसमें मिलावट करके आगे अधिक दामों पर बेचते हैं। इससे उन्हें अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। देखते ही देखते बहुत से लोग लाखों-करोड़ों में खेलने लगे हैं।

समय रहते कार्रवाई होती तो ये हालात न होते

DGP Shashikant about Drugs Trade in Punjab
प्र. बीते एक महीने से जारी पंजाब पुलिस के ड्रग्स विरोधी अभियान में बारे में आपकी राय?
उ.
बहुत देर हो गई। समय रहते कार्रवाई की जाती तो आज ये हालात न होते। पुलिस की इस कार्रवाई में राहत की बात केवल इतनी है कि यह पूरी तरह से खानापूर्ति नहीं है। कुछ फीसदी गंभीर काम हुआ है, लेकिन ज्यादा नहीं। मेरे पास कई ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें राजनीतिक द्वेष की झलक दिखाई पड़ रही है।

पिछले समय में कई एनआरआई की प्रॉपर्टी पर कब्जे के लिए उन्हें ‘चिट्टे’ (हेरोइन) के झूठे केसों में फंसाया गया है। यह कमियां जब तक दूर नहीं होंगी, कुछ हासिल होने वाला नहीं। अभी तक छोटी-छोटी मछलियों को पकड़ा गया है, जबकि बीमारी तो मगरमच्छों को पकड़ने से खत्म होगी।
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