हाईकोर्ट में पेश हुए हरियाणा के डीजीपी, माना-खामियों से भरी थी मोरनी सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच
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हरियाणा के डीजीपी ने मान लिया है कि बहुचर्चित मोरनी सामूहिक दुष्कर्म की पुलिस जांच खामियों से भरी थी। उन्होंने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के साथ ही जांच के लिए नए सिरे से एसआईटी गठित कर दी गई है। डीजीपी मनोज यादव हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप बुधवार को कोर्ट में पेश हुए।
उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि मामला उनके संज्ञान में आने के बाद उन्होंने पंचकूला के पुलिस कमिश्नर को इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे। पुलिस कमिश्नर ने उन्हें जो रिपोर्ट सौंपी, उससे साफ हो गया कि मोरनी सामूहिक दुष्कर्म केस की जांच में बहुत सारी खामियां थीं। केस के 40 आरोपियों में से केवल 12 को ही गिरफ्तार किया जा सका है और इनमें से 8 की शिनाख्त व्हाट्सएप के जरिए करवाई गई है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर पूछा था कि डीजीपी बताएं किस कानून के तहत शिनाख्त व्हाट्सएप पर करवाई गई ।
तत्कालीन डीसीपी और एसीपी से जवाब मांगा
डीजीपी ने बताया कि यह सब जांच अधिकारियों की लापरवाही थी। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने पंचकूला के तत्कालीन डीसीपी राजेंद्र कुमार मीणा और एसीपी (अंडर ट्रेनिंग) डॉ अंशु सिंगला से इस पूरे मामले की जांच में लापरवाही बरतने, केस डायरी सही तरह से मेनटेन करने, 40 में से सिर्फ 12 आरोपियों को गिरफ्तार करने और बचे आरोपियों की गिरफ्तारी के गंभीर प्रयास न करने, आरोपियों की शिनाख्त के लिए आईडेंटिफिकेशन परेड न करवाने और सीसीटीवी फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजे जाने पर जवाब मांगा है।
एसएचओ, इंस्पेक्टर और एसआई के खिलाफ विभागीय जांच
साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पंचकूला की इंस्पेक्टर राजेश कुमारी, एसआई भगवान दास और चंडीमंदिर के तत्कालीन एसएचओ राम कुमार के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। डीजीपी ने बताया कि मामले की जांच के लिए एसीपी कालका पवन कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है।
दो नाबालिग आरोपियों कि भी की गई है गिरफ्तारी
डीजीपी ने बताया कि 8 मार्च को इस मामले में दो नाबालिगों को गिरफ्तार कर जुवेनाइल बोर्ड के समक्ष पेश किया गया था। इनका मेडिकल करवा ब्लड सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए भेज दिए गए हैं। इन दोनों की आईडेंटिफिकेशन परेड के लिए जुवेनाइल बोर्ड के समक्ष अर्जी भी दी गई है। शिनाख्त के तरीके को लेकर घिरी हरियाणा पुलिस ने हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक को पत्र लिख ट्रेनिंग ले रहे अधिकारियों को आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) कैसे करवाई जाए इसकी विशेष ट्रेनिंग देने के आदेश दिए हैं।
यह है मामला
मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उसका नाम एफआईआर में नहीं था और न ही पीड़ित या अन्य किसी भी आरोपी ने उसका नाम लिया। केवल होटल मालिक के कॉल रिकॉर्ड के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। पीड़िता से व्हाट्सएप पर फोटो दिखा शिनाख्त करवाई जा रही है। जबकि कानूनी प्रावधान के तहत व्हाट्सएप के जरिए शिनाख्त करवाए जाने का कोई नियम ही नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने डीजीपी को तलब कर मामले पर जवाब मांगा था।