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तय समय पर नहीं दिया फ्लैट, दें मुआवजा
अमर उजाला, मोहाली
Updated Wed, 13 Nov 2013 07:29 PM IST
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निर्धारित समय में फ्लैट का कब्जा न देने और पैसे न लौटाने के मामले में उपभोक्ता अदालत ने पंचकूला के एक डेवलपर को उपभोक्ता को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
गुड़गांव निवासी कृष्णा देवी की शिकायत पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चंडीगढ़ कोलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड को उपभोक्ता के छह लाख रुपये मई-2007 से नौ फीसदी ब्याज के साथ लौटाने का आदेश भी दिया है।
कृष्णा देवी ने उपभोक्ता अदालत को दी शिकायत में कहा था कि उन्होंने सेक्टर तीन पंचकूला के डेवलपर के एक प्रोजेक्ट में 3-बीएचके फ्लैट बुक कराया था।
इसके लिए उन्होंने मई-2007 में बुकिंग राशि के तौर पर छह लाख रुपये भी जमा करा दिए थे। डेवलपर ने उन्हें छठी मंजिल पर फ्लैट अलॉट किया था, जिसकी कुल कीमत 34.10 लाख रुपये थी।
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शर्त के मुताबिक उन्हें 36 महीनों में फ्लैट का कब्जा दिया जाना था। मार्च-2008 में उन्होंने प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया, तो उनके होश उड़ गए, वहां कोई काम ही शुरू नहीं हुआ था।
जब उन्होंने डेवलपर से संपर्क किया तो उन्हें कहा गया कि फंड की कमी के चलते काम शुरू नहीं हो सका। हार कर कृष्णा देवी ने अपनी रकम वापस मांगी, तो डेवलपर उस पर भी मुकर गया।
सुनवाई के दौरान डेवलपर ने पक्ष रखा कि उपभोक्ता खुद दोषी है। फ्लैटों का निर्माण जारी है, जबकि उपभोक्ता ने अब तक जरूरी एग्रीमेंट नहीं किया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि डेवलपर ने निर्धारित समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया। न ही उपभोक्ता की रकम लौटाई। इसलिए डेवलपर सेवाओं में कमी की दोषी है।
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गुड़गांव निवासी कृष्णा देवी की शिकायत पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चंडीगढ़ कोलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड को उपभोक्ता के छह लाख रुपये मई-2007 से नौ फीसदी ब्याज के साथ लौटाने का आदेश भी दिया है।
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कृष्णा देवी ने उपभोक्ता अदालत को दी शिकायत में कहा था कि उन्होंने सेक्टर तीन पंचकूला के डेवलपर के एक प्रोजेक्ट में 3-बीएचके फ्लैट बुक कराया था।
इसके लिए उन्होंने मई-2007 में बुकिंग राशि के तौर पर छह लाख रुपये भी जमा करा दिए थे। डेवलपर ने उन्हें छठी मंजिल पर फ्लैट अलॉट किया था, जिसकी कुल कीमत 34.10 लाख रुपये थी।
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शर्त के मुताबिक उन्हें 36 महीनों में फ्लैट का कब्जा दिया जाना था। मार्च-2008 में उन्होंने प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया, तो उनके होश उड़ गए, वहां कोई काम ही शुरू नहीं हुआ था।
जब उन्होंने डेवलपर से संपर्क किया तो उन्हें कहा गया कि फंड की कमी के चलते काम शुरू नहीं हो सका। हार कर कृष्णा देवी ने अपनी रकम वापस मांगी, तो डेवलपर उस पर भी मुकर गया।
सुनवाई के दौरान डेवलपर ने पक्ष रखा कि उपभोक्ता खुद दोषी है। फ्लैटों का निर्माण जारी है, जबकि उपभोक्ता ने अब तक जरूरी एग्रीमेंट नहीं किया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि डेवलपर ने निर्धारित समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया। न ही उपभोक्ता की रकम लौटाई। इसलिए डेवलपर सेवाओं में कमी की दोषी है।