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इस बार कनाडा की जगह नार्थ ईस्ट आकर देखें: डॉ. जितेंद्र सिंह
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 07 Mar 2017 01:06 AM IST
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‘डेस्टिनेशन नार्थ ईस्ट 2017’ के शुभारंभ पर बोले केंद्रीय राज्यमंत्री
- फोटो : अमर उजाला
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‘नार्थ ईस्ट के बारे में लोग जान सकें और वहां घूमने के साथ ही निवेश के लिए अवसर पैदा हो इसी मकसद से पहली बार चंडीगढ़ में ‘डेस्टिनेशन नार्थ ईस्ट 2017’ का आयोजन किया जा रहा है। केंद्र सरकार भी नार्थ ईस्ट के आठों राज्यों के विकास के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है।’
उक्त विचार केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार से शुरू हुए तीन दिवसीय ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट-2017’ के उद्घाटन अवसर पर कहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश के लोग गर्मियों में विदेश घूमने जाते हैं। लेकिन, उन्हें अपने ही देश की विश्व विख्यात खूबसूरती और नेचर के बारे में पता ही नहीं है। खासकर चंडीगढ़ और पंजाब के लोग अक्सर कनाडा घूमने जाते हैं, वो इस बार कनाडा की जगह नार्थ ईस्ट आकर देखें। इन आठ राज्यों की खूबसूरती और इनकी खासियत के बारे में देश में ही बहुत कम लोग जानते हैं। इसलिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में कार्यक्रम आयोजित करने का प्लान पिछले साल ही बन गया था। इसके तहत तय किया गया कि नार्थ ईस्ट को देश के कोने-कोने तक ले जाया जाएगा और लोगों को यहां के म्यूजिक, खाना, हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, खेती और उत्पादों के बारे में बताया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में पर्यटन को बढ़ावा देना समय की मांग है। क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के साथ-साथ लाखों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है।
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वहीं इस मौके पर सांसद किरण खेर ने कहा कि चंडीगढ़ के लिए यह बेहद गौरव की बात है कि पहली बार केंद्र सरकार ने इस महा आयोजन के लिए सिटी ब्यूटीफुल का चयन किया है। वहीं उन्होंने अपने बचपन की यादें ताजा करते हुए कहा कि जब वह तीन साल की थी और परिवार के साथ नार्थ ईस्ट में कुछ साल रही थीं तो उनके पिता चार मोडे (बांस से बने मेज) लेकर आए थे जो कि आज भी उनके घर पर हैं। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव नवीन वर्मा, संयुक्त सचिव एसएन प्रधान और सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. गिरीश साहनी समेत अन्य मौजूद रहे।
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उक्त विचार केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार से शुरू हुए तीन दिवसीय ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट-2017’ के उद्घाटन अवसर पर कहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश के लोग गर्मियों में विदेश घूमने जाते हैं। लेकिन, उन्हें अपने ही देश की विश्व विख्यात खूबसूरती और नेचर के बारे में पता ही नहीं है। खासकर चंडीगढ़ और पंजाब के लोग अक्सर कनाडा घूमने जाते हैं, वो इस बार कनाडा की जगह नार्थ ईस्ट आकर देखें। इन आठ राज्यों की खूबसूरती और इनकी खासियत के बारे में देश में ही बहुत कम लोग जानते हैं। इसलिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में कार्यक्रम आयोजित करने का प्लान पिछले साल ही बन गया था। इसके तहत तय किया गया कि नार्थ ईस्ट को देश के कोने-कोने तक ले जाया जाएगा और लोगों को यहां के म्यूजिक, खाना, हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, खेती और उत्पादों के बारे में बताया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में पर्यटन को बढ़ावा देना समय की मांग है। क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के साथ-साथ लाखों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है।
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वहीं इस मौके पर सांसद किरण खेर ने कहा कि चंडीगढ़ के लिए यह बेहद गौरव की बात है कि पहली बार केंद्र सरकार ने इस महा आयोजन के लिए सिटी ब्यूटीफुल का चयन किया है। वहीं उन्होंने अपने बचपन की यादें ताजा करते हुए कहा कि जब वह तीन साल की थी और परिवार के साथ नार्थ ईस्ट में कुछ साल रही थीं तो उनके पिता चार मोडे (बांस से बने मेज) लेकर आए थे जो कि आज भी उनके घर पर हैं। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव नवीन वर्मा, संयुक्त सचिव एसएन प्रधान और सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. गिरीश साहनी समेत अन्य मौजूद रहे।
'अगले जन्म में नार्थ ईस्ट में ही मिले जन्म'
‘डेस्टिनेशन नार्थ ईस्ट 2017’ के शुभारंभ पर बोले केंद्रीय राज्यमंत्री
- फोटो : अमर उजाला
लिटरेसी रेट में दूसरे नंबर पर, लेकिन हायर एजुकेशन में क्वालिटी की कमी
केंद्रीय राज्यमंत्री ने माना कि इन आठ राज्यों में हायर एजुकेशन की क्वालिटी अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर नहीं है। हालांकि मिजोरम जैसा राज्य लिटरेसी रेट में देश में दूसरे नंबर पर है, लेकिन यहां हायर एजुकेशन की कमी है। वहीं अन्य राज्यों में स्कूल एजुकेशन की उपलब्धता भी आसान नहीं है। कई-कई गांव में तो बच्चों को स्कूल के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। अब इसे बेहतर बनाया जा रहा है।
40 साल बाद मोदी ने की बैठक :
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 1977 में नार्थ ईस्ट के राज्यों में बैठक की थी। इसके 40 साल बाद दूसरी बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
उद्योगपतियों को दिया आमंत्रण :
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ के उद्योगपतियों को कारोबार का विस्तार उत्तर-पूर्वी राज्यों की ओर भी करने की अपील की। साथ ही कहा कि अगर यहां का कोई उद्योगपति उत्तर-पूर्वी राज्यों में जाकर कारोबार करेगा तो केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद दी जाएगी।
अगले जन्म में नार्थ ईस्ट में ही मिले जन्म :
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सिंह ने उत्तर-पूर्वी राज्यों की संस्कृति का जिक्र करते हुए ठिठोली भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें अगला जन्म नार्थ ईस्ट में ही मिले। इसका कारण उन्होंने बताया कि बाकि राज्यों में जैसे हाउस वाइफ की अवधारणा है, वहीं नार्थ ईस्ट में हाउस हसबैंड का प्रचलन है। दरअसल उन्होंने नार्थ ईस्ट की महिलाओं द्वारा घर और बाहर की सारी जिम्मेदारी खुद संभालने के कल्चर की तारीफ भी की और कहा कि पुरुष तो वहां घर में आराम करते रहते हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने माना कि इन आठ राज्यों में हायर एजुकेशन की क्वालिटी अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर नहीं है। हालांकि मिजोरम जैसा राज्य लिटरेसी रेट में देश में दूसरे नंबर पर है, लेकिन यहां हायर एजुकेशन की कमी है। वहीं अन्य राज्यों में स्कूल एजुकेशन की उपलब्धता भी आसान नहीं है। कई-कई गांव में तो बच्चों को स्कूल के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। अब इसे बेहतर बनाया जा रहा है।
40 साल बाद मोदी ने की बैठक :
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 1977 में नार्थ ईस्ट के राज्यों में बैठक की थी। इसके 40 साल बाद दूसरी बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
उद्योगपतियों को दिया आमंत्रण :
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ के उद्योगपतियों को कारोबार का विस्तार उत्तर-पूर्वी राज्यों की ओर भी करने की अपील की। साथ ही कहा कि अगर यहां का कोई उद्योगपति उत्तर-पूर्वी राज्यों में जाकर कारोबार करेगा तो केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद दी जाएगी।
अगले जन्म में नार्थ ईस्ट में ही मिले जन्म :
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सिंह ने उत्तर-पूर्वी राज्यों की संस्कृति का जिक्र करते हुए ठिठोली भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें अगला जन्म नार्थ ईस्ट में ही मिले। इसका कारण उन्होंने बताया कि बाकि राज्यों में जैसे हाउस वाइफ की अवधारणा है, वहीं नार्थ ईस्ट में हाउस हसबैंड का प्रचलन है। दरअसल उन्होंने नार्थ ईस्ट की महिलाओं द्वारा घर और बाहर की सारी जिम्मेदारी खुद संभालने के कल्चर की तारीफ भी की और कहा कि पुरुष तो वहां घर में आराम करते रहते हैं।