बादल को 70 साल लंबी को चमकाने के बावजूद देनी पड़ रही दुहाई
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70 साल तक लंबी की बादशाहत कायम रखने वाले पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने हलके को विकास के मामले में पीछे नहीं छोड़ा। इसके बावजूद बादल को यहां जीत के लिए विकास की दुहाई देनी पड़ रही है।
मुकाबला तगड़ा है एक तरफ कैप्टन और दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के जरनैल सिंह हैं। बादल परिवार इस समय बादल की साख बचाने के लिए लंबी में एकजुट है।
लंबी का मुकाबला पंजाब के दूसरे गांव से करें तो यह गांव पहले पायदान पर खुद-ब-खुद ही आ जाएगा। हरियाणा पंजाब में एसवाईएल को लेेकर भले ही द्वंद्व छिड़ा हो, लेकिन लंबी गांव के बीच से गुजरती पक्की नहर यहां विकास की दास्तान बता रही है।
पक्के रजबाहे, पक्के जोहड़, चमचमाते बस स्टैंड और तारकोल की सपाट सड़कों पर दौड़ते ट्रैक्टर और बैलगाड़ियां बताते हैं कि लंबी दूसरे गांवों से अलग है। फिलहाल, यहां सुविधा केंद्रों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए आप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है।
लंबी की लड़ाई बादल परिवार के रसूख की लड़ाई
दरअसल, इस बार लंबी की लड़ाई बादल परिवार के रसूख की लड़ाई है। कुछ लोग नाराज होने के बावजूद बादल को वोट देने को तैयार हैं तो कुछ लोग नाराजगी साफ तौर पर बयां कर रहे हैं।
कारण सरकारी योजनाओं को लेकर मिलने वाले ग्रांट के चेक हैं। यह नाराजगी दूर करने के लिए बादल परिवार के पास एक दिन का समय है। चार फरवरी को लंबी की जनता अपना जनादेश सुना देगी।
सैनाखेड़ा से शेखांवाला बैलगाड़ी पर जा रही बलविंदर कौर का कहना है वोट तो बादल को ही देंगे, लेकिन गांव में भेदभाव हुआ है। ग्रांट के चेक कहीं पांच-पांच चले गए तो किसी को एक भी नहीं मिला।
अपने घर के बाहर बैठे सरबजीत सिंह का कहना है कि चेक बांटने को लेकर भेदभाव हुआ है। बिना किसी का नाम लिए वे इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहते।
'गिला शिकवा भी अपनों से ही किया जाता है'
यहीं से थोड़ी दूर गांव के बुजुर्गों के ग्रुप में बैठे मेजर सिंह ने बताया कि बादल परिवार ने जो लोग नियुक्त किए चेक बांटने के लिए वे सही नहीं थे। समय रहते इन चीजों का सुधार जरूरी था।
बादल से प्यार भी और नाराजगी भी
पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने लंबी गांव के उन लोगों का नाम लेकर उनकी तरफ से मुख्यमंत्री बादल के मंच से माफी मांगते हुए बादल को जिताने की अपील की है।
लंबी की जनता को भी यह पता है कि बादल से ज्यादा नजदीकी उनका कोई नहीं है। यहां के लोग जब चाहें मुख्यमंत्री तक अपनी फरियाद लेकर पहुंच सकते हैं।
गिला-शिकवा भी अपनों से
हरसिमरत कौर बादल ने कहा है कि लंबी की लड़ाई बाहरी लोगों और घर के अंदर के लोगों की है। गिला शिकवा भी अपनों से ही किया जाता है। बाहरी लोग यहां मजा लेने के लिए आए हैं और जनता उन्हें सबक सिखा कर भेजेगी।