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डेरा सच्चा सौदा सिरसा के सात अनुयायी गिरफ्तार, पवित्र ग्रंथ की चोरी व बेअदबी के आरोप
Sat, 04 Jul 2020 01:22 PM IST
खुशबू गोयल
राजीव शर्मा, फरीदकोट
राजीव शर्मा, फरीदकोट
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 04 Jul 2020 01:22 PM IST
सार
- डीआईजी खटड़ा की अगुवाई वाली एसआईटी ने जांच वापस मिलते ही की कार्रवाई
- दो आरोपियों को सीबीआई कोर्ट से जमानत के बावजूद किया था गिरफ्तार, अदालत ने जारी रखी
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विस्तार
पांच साल पुराने बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित तीन घटनाओं की जांच अब डीआईजी जालंधर रेंज रणबीर सिंह खटड़ा की अगुवाई वाली एसआईटी को सौंप दी गई है। जांच मिलते ही एसआईटी ने शुक्रवार रात जिले में कई स्थानों पर छापे मारकर गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन स्वरूप चोरी करने की घटना में डेरा सच्चा सौदा सिरसा से जुड़े 7 अनुयायियों को गिरफ्तार कर लिया।
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कोर्ट ने इनमें से दो की जमानत जारी रखी जबकि शनिवार बाद दोपहर ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सुखजिंदर सिंह सन्नी, शक्ति सिंह, नीला, रणजीत भोला, निशान, बलजीत और नरेंद्र शर्मा को पेश किया गया। एसआईटी ने सभी के तीन दिन के पुलिस रिमांड की मांग रखी लेकिन सुखजिंदर सिंह सन्नी व शक्ति सिंह के वकीलों ने अदालत को अवगत करवाया कि उन्हें इसी केस में 7 सितंबर 2018 को सीबीआई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। लेकिन पुलिस ने बिना अदालत को सूचित किए केस में धारा बढ़ाते हुए उन्हें गैर कानूनी ढंग से गिरफ्तार किया है। इसके बाद एसआईटी ने दोनों को रिलीज करने का आवेदन दिया और अदालत ने उनकी जमानत जारी रखी। जबकि नीला, रणजीत भोला, निशान, बलजीत और नरेंद्र शर्मा को 6 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
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सीबीआई ने दे दी थी क्लीन चिट
मालूम हो कि बरगाड़ी कांड से जुड़ी तीनों घटनाओं की जांच तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने सीबीआई के हवाले कर दी थी लेकिन लंबी पड़ताल के बावजूद सीबीआई को इन घटनाओं का कोई सुराग नहीं मिल पाया। साल 2018 के दौरान डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा की अगुवाई वाली एसआईटी ने मोगा व बठिंडा से संबंधित बेअदबी मामलों की पड़ताल के दौरान दावा किया था कि बरगाड़ी कांड को डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायियों ने अंजाम दिया है और एसआईटी ने 10 अनुयायियों की पहचान करते हुए अपनी जांच रिपोर्ट सीबीआई को भी सौंपी थी। लेकिन इसके बावजूद सीबीआई ने अपनी पड़ताल के दौरान इन सभी को क्लीन चिट देकर मामले में क्लोजर रिपोर्ट तक पेश कर दी थी।
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डेढ़ साल की लड़ाई के बाद मामले की जांच मिली एसआईटी को
इसके बाद उठे राजनीतिक बवाल के बीच पंजाब सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित करते हुए बरगाड़ी बेअदबी कांड मामले की जांच सीबीआई से वापस लेने की घोषणा कर दी थी और डेढ़ साल तक कानूनी लड़ाई के बाद अब यह केस राज्य सरकार के पास वापस आया है और जांच पंजाब पुलिस की एसआईटी ने शुरू कर दी है। पूर्व में की पड़ताल में शिनाख्त किए गए 10 अनुयायियों में मुख्य आरोपी बनाए गए डेरे की 45 सदस्यीय कमेटी सदस्य मोहिंदर पाल बिट्टू की पिछले साल नाभा जेल में हत्या हो चुकी है।
तीन एफआईआर हुई थीं
बरगाड़ी कांड मामले में कुल तीन एफआईआर दर्ज हुई थी, जिनमें से सबसे पहले एक जून 2015 को गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ चोरी किए जाने का मामला था। इसके बाद 24-25 सितंबर की रात को इसी गुरुद्वारे साहिब के आगे भद्दी भाषा में पोस्टर लगाने की घटना सामने आई थी और उसके कुछ समय बाद 12 अक्तूबर 2015 को बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर पावन ग्रंथ की बेअदबी की गई थी।