फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Demonetisation: Businessmen still in awe, digital payment trend increased

नोटबंदी ः कारोबारी अब भी खौफ में, डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ा

Mon, 09 Nov 2020 01:18 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2020 01:18 AM IST
विज्ञापन
Demonetisation: Businessmen still in awe, digital payment trend increased
चंडीगढ़। नोटबंदी का नाम सुनते ही चार साल पहले बैंकों के बाहर लगी लंबी-लंबी लाइनों की तस्वीरें दिलो-दिमाग में घूमने लगती हैं। आठ नवंबर 2016 की रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी स्क्रीन पर आए और 500 व एक हजार के नोट को बंद करने का फैसला सुना दिया। घोषणा के बाद अगले दिन बैंकों के बाहर लोगों की लाइनें लग गई थीं। उद्योग धंधे ठप हो गए। कइयों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। तमाम महिलाओं को अपनी जमा-पूंजी से हाथ धोना पड़ा। कारोबारियों का कहना है कि इसके बाद से बाजार में कभी खुशहाली नहीं आई लेकिन नोटबंदी के बाद से डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ा है। हालांकि जो भी बदलाव आएं हों, मगर लोगों में नोटबंदी का खौफ अब भी बरकरार है। इस बारे में व्यापारी, आम लोग, महिलाओं व विशेषज्ञों से अमर उजाला टीम ने बात की।
विज्ञापन

कौन भूल सकता उस रात को
नोटबंदी की रात को कौन भूल सकता है। अचानक से ऐसी खबर सुनकर कोई भी परेशान हो सकता है। अब भी डर लगता है कि कहीं किसी दिन दो हजार के नोट न बंद हो जाएं। इस बारे में कई बार अफवाहें उड़ चुकी हैं हालांकि नोटबंदी के बाद से डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ा है। इससे फायदा यह है कि आपका पैसा बैंक में ही घूमता रहता है। मेरी दुकान में आने वाले 70 फीसदी ग्राहक ऑनलाइन भुगतान करते हैं।
विज्ञापन

- कृष्णदास बॉबी, किराना व्यापारी, सेक्टर 20
शताब्दी की सबसे भयावह त्रासदी
नोटबंदी का नाम सुनकर रूह कांप उठती है। अब तो बचत से विश्वास ही उठ गया है। व्यापारी पाई-पाई जोड़कर पैसे जमा करता है और एक झटके सबकुछ खत्म कर दिया जाता है। बताया गया था कि नोटबंदी से कालेधन और आतंकवाद पर रोक लगेगी, लेकिन इससे हुआ कुछ नहीं। ऐसा लगता है कि सरकार ने जानबूझकर ऑनलाइन पेमेंट बैंक को बढ़ावा देने के लिए यह सब किया था। नोटबंदी इस शताब्दी की सबसे भयावह घटना रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-परमजीत सिंह, व्यापारी, सेक्टर 23
नोटबंदी के बाद से जीडीपी बढ़ी ही नहीं
नोटबंदी के बाद से भारत की जीडीपी कभी बढ़ी नहीं। आज तक हम लोग संभल नहीं पाए हैं। दावा किया जा रहा था कि नोटबंदी से नकली नोटों पर लगाम लग जाएगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। बाजार में नोटबंदी के कुछ ही दिन बाद नकली नोटों की भरमार हो गई। छोटे दुकानदारों को बहुत नुकसान हुआ। कइयों को अपनी दुकान से हाथ धोना पड़ा। पूरे देश को नुकसान उठाना पड़ा। शायद ही इसे कोई भूल पाए।
-कौशल सिंह, युवा उद्योगपति, चंडीगढ़
ऑनलाइन भुगतान की ओर झुकाव बढ़ा
नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा बदलाव यही आया है कि लोग अब बैंक टू बैंक काम करने लगे हैं। आनलाइन पेमेंट बैंक का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब कैश लेकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। इससे पॉकेटमारी का डर भी नहीं रहता। अधिकतर लोग कैश लेकर चलने की बजाये ऑनलाइन भुगतान को प्राथमिकता देते हैं। यह सब नोटबंदी के बाद ही आया है। लेन-देन भी अकाउंट टू अकाउंट होने लगे हैं। इससे लोगों को काफी सुविधा हुई है।
-शुभम पांडे, चार्टर्ड अकाउंटेंट, चंडीगढ़
कैश के लेनदेन में आई भारी गिरावट
नोटबंदी जिस मकसद से हुई थी, फिलहाल उसमें कामयाबी तो नहीं मिली है लेकिन कैश के लेनदेन में कमी आ गई है। अब लोग अपने कैश नहीं रखना चाहते और न ही कोई नोटों का थैला लेकर चलता है। नोटबंदी के समय सरकार ने दावा किया था कि कालेधन पर रोक लग जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नोटबंदी के फायदे तो हुए नहीं, लेकिन लोगों के हिस्से में परेशानी बहुत आई। यदि आतंकवाद व कालेधन पर रोक लगती तब भी लोग इतने मायूस नहीं होते -मानिक गोयल, चार्टर्ड अकाउंटेंट, चंडीगढ़
नोट ले जाने का डर खत्म हो गया
नोटबंदी से कुछ फायदे भी हुए हैं। काउंटर पर कैश कम हुआ है। काउंटर पर पैसे नहीं होने से अब लूट का डर नहीं रहता। ज्यादातर लोग डिजिटल भुगतान कर रहे हैं। इससे फायदा यह हुआ कि पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंच जाता है। पहले नोटों को गिनती करना मुश्किल होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। हालांकि अब धीरे-धीरे जीवन पटरी पर लौटने लगा है। उस वक्त काफी परेशानी हुई थी।
-भारत भूषण कपिला, कारोबारी, सेक्टर-45
ऑनलाइन भुगतान से भी परेशानी बढ़ी
नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान तो बढ़ा है, लेकिन उससे परेशानी ही बढ़ी है। डेबिट व क्रेडिट कार्ड से आने वाले भुगतान का हिसाब रखना मुश्किल होता है। अब हम व्यापारी कम अकाउंटेंट ज्यादा लगते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें ऑनलाइन भुगतान करना नहीं आता। ऑनलाइन भुगतान में भी काफी धोखाधड़ी बढ़ गई है। कुल मिलाकर नोटबंदी का व्यापार पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा था। अब भी उसका असर कम नहीं हुआ है।
-परमजीत सिंह, कारोबारी, इंडस्ट्रियल एरिया फेज वन
सरकार के खजाने में पैसे बढ़े
नोटबंदी के बाद से जीएसटी व अन्य टैक्स अधिक बढ़ा है। सरकार के खजाने में भी पैसे बढ़े हैं। लेनदेन पारदर्शी हुआ है। सबसे बड़ी बात है कि कारोबारी के लिए अकाउंट टू अकाउंट लेनदेन की सुविधा काफी बढ़ गई है। छोटी या बड़ी खरीदारी के लिए अब नोटों का बंडल ले जाने की जरूरत ही नहीं है।
-साहिल गुप्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट
मध्य व निम्न वर्ग ने झेली थी परेशानी
हमारे कॉलेज में एसबीआई की एक्सटेंशन ब्रांच है। नोटबंदी के दौरान कॉलेज के पूरे स्टाफ को रोजाना वहीं से थोड़ा कैश मिल जाता है इसलिए बैंक के बाहर कतार में नहीं खड़ा होना पड़ा लेकिन चार साल बाद अगर हम देखें तो इसका कोई फायदा नहीं हुआ। नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर मध्य और निम्न वर्ग पर पड़ा और लोग काफी परेशान हुए।
-रूपिंदर कौर, प्रोफेसर, चंडीगढ़
नोटबंदी का फैसला मध्य वर्ग के लिए सदमे जैसा था
बिना लोगों को बताए अचानक इतना बड़ा फैसला मध्य वर्ग के लोगों के लिए सदमे जैसा था। लोगों को बैंक के बाहर लाइनों में घंटों खड़ा रहना पड़ा था। जिनके पास कालाधन था, उन्हें कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ी। ऐसे में इतने बड़े कदम का क्या फायदा हुआ? शासन को ऐसे फैसले लेने से पहले उससे लोगों को होने वाली परेशानी के बारे में समझना चाहिए था। यदि सरकार इस बारे में सोचती तो शायद इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
-राजवंती, लेखिका, जीरकपुर
क्या कहते हैं विशेषज्ञ (फोटो)
नोटबंदी के कारण ऑनलाइन खरीद बढ़ी
नोटबंदी को चार साल हो गए हैं। यह निर्णय अपने आप में अलग था। इस निर्णय ने तमाम लोगों की आदतों में बदलाव किया। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लोगों ने अपने घरों में अधिक रुपये रखने बंद कर दिए। साथ ही ऑनलाइन खरीदारी को प्रमुखता देनी शुरू कर दी। कोरोना जैसे काल में लोगों ने घर या अपने परिचितों को ऑनलाइन ही पैसे भेजे। एटीएम आदि से निकासी कम हुई। जो सामान लोगों ने खरीदे तो उसके लिए पैसे भी उन्होंने ऑनलाइन ही दिए हैं। ऑनलाइन प्रणाली सबसे सुरक्षित है। नोटबंदी के कारण ही आज लोग अपनी जेब में अधिक रुपये लेकर नहीं चलते। मोबाइल से सीधे एप जुड़े हुए हैं, जिसके जरिए वह पैसे स्थानांतरित कर रहे हैं। नोटबंदी के दूरगामी परिणाम और बेहतर होंगे। लोग धीरे-धीरे ऑनलाइन लेनदेन को और बढ़ाएंगे।

-तिलकराज, अर्थशास्त्री, पीयू
नोटबंदी के कारण पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था
कोरोना से पहले नोटबंदी का असर था। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया। निजी निवेश भी नहीं हो पाया। लोगों के पास पैसा कम रह गया। कृषि क्षेत्र में भी जो निवेश होने चाहिए थे, वह भी नहीं हो पाए। ऑनलाइन लेनदेन मांग पर निर्भर करता है। ऐसे में यह भी नहीं बढ़ा है। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे रखते हैं और आगे भी रखेंगे। नोटबंदी के चलते लोगों को काफी तकलीफें उठानी पड़ी थीं। सबसे बड़ी परेशानी अर्थव्यवस्था के लिए थी। अर्थव्यवस्था को छलांग लगानी चाहिए थी लेकिन वह नीचे आ रही है। नोटबंदी के कारण बेरोजगारी बढ़ी है जो अब तक असर दिखा रही है। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं।
-सतीश वर्मा, चेयर प्रोफेसर, आरबीआई
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed