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धार्मिक स्थल तोड़ने के मामले में प्रशासन को नोटिस, मांगा जवाब

Sat, 09 Apr 2016 01:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 09 Apr 2016 01:33 AM IST
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demolish of religious place, notice to administration by court
कोर्ट - फोटो : file photo

बीते दिनों प्रशासन द्वारा सेक्टर-50 में एक धार्मिक स्थल और उसके साथ लगते आश्रम को ढहाने के मामले में जिला अदालत ने यूटी प्रशासन से जवाब तलब किया है। सिविल जज शिल्पी गुप्ता की कोर्ट ने यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर 14 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

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कोर्ट ने यह आदेश धार्मिक स्थल की कमेटी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। कमेटी की ओर से अदालत में पेश हुए एडवोकेट रंजन लखनपाल ने बताया कि जिस तरह एस्टेट आफिस ने कोर्ट आदेश के बावजूद यह कार्रवाई की है, उसे लेकर वह कोर्ट में डीसी और संबंधित एरिया की एसडीएम के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर करेंगे।
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बता दें कि एस्टेट ऑफिस ने बीती 4 अप्रैल को एंटी इंक्रोचमेंट ड्राइव के तहत सेक्टर-50 में एक धार्मिक स्थल और उसके साथ लगते आश्रम को ढहा दिया था। इसके बाद स्थानीय लोगों और धार्मिक स्थल कमेटी की ओर से विरोध-प्रदर्शन किया गया था। धार्मिक स्थल की कमेटी के अनुसार उन्होंने कोर्ट से स्टे लिया हुआ है।
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इसके बावजूद प्रशासन ने यह कार्रवाई की। इसके बाद डीसी अजीत बालाजी जोशी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। मामले में खास बात यह है कि 4 अप्रैल को ही कोर्ट ने मामले में स्टे के आदेश दिए थे और उसी दिन प्रशासन ने कार्रवाई कर दी।

एडवोकेट रंजन लखनपाल के अनुसार 40 साल पुराने इस धार्मिक स्थल को बिना किसी नोटिस और कोर्ट  के स्टे आर्डर के बावजूद गिराया गया। उनके अनुसार उन्हें पहले से शक था कि एस्टेट ऑफिस यह कार्रवाई कर सकती है, जिसे लेकर उन्होंने 31 मार्च को कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी।


इस पर उन्हें स्टे मिल गया था। एडवोकेट के अनुसार 40 साल पहले एक व्यक्ति ने धार्मिक स्थल के लिए जमीन दान की थी। जिसने यह जमीन दान की थी उसकी मौत के बाद उनके बेटों ने प्रशासन से इसका मुआवजा ले लिया था। 

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