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Chandigarh News: हर साल बढ़ रही एक हजार मेगावाट बिजली की मांग, 15 जून के बाद बदलेगा कृषि के लिए बदलेगा बिजली आपूर्ति शेड्यूल
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-जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में और बढ़ेगी बिजली मांग
-1400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद की तैयारियों में जुटा प्रदेश
-फिलहाल नहीं कोई आधिकारिक कट, मांग के अनुसार की जा रही आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रचंड गर्मी के बीच हरियाणा में बढ़ती जा रही रिकाॅर्ड बिजली खपत को देखते हुए जहां हरियाणा सरकार 1400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद की तैयारियों में जुटी है। मौजूदा स्थिति को कंट्रोल करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद उद्योगों को दिन की बजाए रात को चलाने की अपील कर चुके हैं। वहीं, 15 जून से आधिकारिक रूप से प्रदेश में धान का सीजन हो जाएगा। इसलिए खेती के लिए आठ घंटे रोजाना बिजली आपूर्ति के लिए 15 जून से आपूर्ति का शेड्यूल बदला जाएगा। प्रदेशभर में एक साथ लोड न पड़े, इसलिए सर्कल के हिसाब से बिजली आपूर्ति के शेड्यूल होंगे। प्रदेश में खेती के ट्यूववेल 6 हजार से अधिक हैं। ऐसे में धान के सीजन में कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत बढ़ जाती है। उद्योगों को प्रदेश सरकार की ओर से 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। मौजूदा समय में आधिकारिक तौर पर कोई कट नहीं लगाए जा रहे हैं और बिजली की मांग 13 हजार मेगावाट तक पहुंच रही है। अब हरियाणा में हर साल 1000 मेगावाट बिजली की खपत और मांग बढ़ रही है। पीक सीजन की बात करें तो पिछले तीन साल में करीब तीन हजार मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। इस समय प्रदेश की कुल क्षमता 14026 मेगावाट है। पिछले साल यह क्षमता 13 हजार और इससे पहले 12137 मेगावाट थी। जून के अंत और जुलाई माह की शुरुआत में यह मांग 1400 मेगावाट तक और बढ़ने की संभावना है। इसलिए ही सरकार बिजली आपूर्ति के शेड्यूलों में बदलाव करने जा रही है।
बाक्स
हरियाणा में कब बने बिजली के नए रिकाॅर्ड
पीक सीजन के दौरान बिजली खपत के कई रिकाॅर्ड बन चुके हैं। इनमें 18 अगस्त 2023 को सबसे अधिकतम 13055 मेगावाट की खपत हुई थी और यह अब तक सबसे रिकाॅर्ड खपत है। क्योंकि कुल क्षमता के बराबर पहुंच गई थी। 2022 में 7 जुलाई को 12 हजार मेगावाट की पूरी क्षमता को मांग पार कर गई थी।
बाक्स
इसलिए बढ़ रही बिजली खपत
राज्य में बिजली खपत बढ़ने का मुख्य कारण एनसीआर के क्षेत्र में नए उद्योंगों का आना है। दूसरा, रियल एस्टेट की बड़ी-बड़ी कंपनियां द्वारा हरियाणा में अपने प्रोजेक्ट शुरू करना। तीसरा, प्रदेश के लोगों में बढ़ती गर्मी और सर्दी के चलते एसी और गीजर चलाने की प्रवृति बढ़ रही है। चौथा कारण है बिजली कनेक्शनों के लिए हर साल हजारों की संख्या में नए आवेदन आ रहे हैं। इस समय 40 हजार के करीब खेती के ट्यूबवेल कनेक्शन और 50 हजार के करीब अन्य बिजली कनेक्शन लंबित चल रहे हैं।
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बाक्स
कहां कितनी है उत्पादन क्षमता
प्रदेश के थर्मल प्लांटों की बात करें तो पानीपत थर्मल प्लांट की यूनिट नंबर 6, 210, यूनिट 7 और 8 की क्षमता 250-250 मेगावाट है। दीन बंधू छोटूराम यमुनानगर प्लांट की दो यूनिटों की क्षमता 300-300, खेदड़ की दोनों यूनिटों की 600-600 मेगावाट है। इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की तीनों यूनिटों की क्षमता 500-500 मेगावाट है, यहां पर हरियाणा का शेयर 50 प्रतिशत है। इसी प्रकार महात्मा गांधी सुपर थर्मल प्लांट की दोनों यूनिट 600-600 मेगावाट की हैं।
बाक्स
कहां से मिल रही कितनी बिजली
हरियाणा खुद 2582.4 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन करता है और बाकि बिजली खरीदी जाती है। इसमें से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से 846.14 मेगावाट बिजली, जबकि प्राइवेट कंपनियों से 7173.22 मेगावाट और 2921.09 मेगावाट बिजली केंद्रीय प्लांटों से खरीदी जाती है। अडाणी पावर से 1200 मेगावाट बिजली खरीदी जा रही। वहीं, आपात स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ से 350 मेगावाट व मध्य प्रदेश से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली के लिए पहले से ही अनुबंध हो रखे हैं।
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-1400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद की तैयारियों में जुटा प्रदेश
-फिलहाल नहीं कोई आधिकारिक कट, मांग के अनुसार की जा रही आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रचंड गर्मी के बीच हरियाणा में बढ़ती जा रही रिकाॅर्ड बिजली खपत को देखते हुए जहां हरियाणा सरकार 1400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद की तैयारियों में जुटी है। मौजूदा स्थिति को कंट्रोल करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद उद्योगों को दिन की बजाए रात को चलाने की अपील कर चुके हैं। वहीं, 15 जून से आधिकारिक रूप से प्रदेश में धान का सीजन हो जाएगा। इसलिए खेती के लिए आठ घंटे रोजाना बिजली आपूर्ति के लिए 15 जून से आपूर्ति का शेड्यूल बदला जाएगा। प्रदेशभर में एक साथ लोड न पड़े, इसलिए सर्कल के हिसाब से बिजली आपूर्ति के शेड्यूल होंगे। प्रदेश में खेती के ट्यूववेल 6 हजार से अधिक हैं। ऐसे में धान के सीजन में कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत बढ़ जाती है। उद्योगों को प्रदेश सरकार की ओर से 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। मौजूदा समय में आधिकारिक तौर पर कोई कट नहीं लगाए जा रहे हैं और बिजली की मांग 13 हजार मेगावाट तक पहुंच रही है। अब हरियाणा में हर साल 1000 मेगावाट बिजली की खपत और मांग बढ़ रही है। पीक सीजन की बात करें तो पिछले तीन साल में करीब तीन हजार मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। इस समय प्रदेश की कुल क्षमता 14026 मेगावाट है। पिछले साल यह क्षमता 13 हजार और इससे पहले 12137 मेगावाट थी। जून के अंत और जुलाई माह की शुरुआत में यह मांग 1400 मेगावाट तक और बढ़ने की संभावना है। इसलिए ही सरकार बिजली आपूर्ति के शेड्यूलों में बदलाव करने जा रही है।
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हरियाणा में कब बने बिजली के नए रिकाॅर्ड
पीक सीजन के दौरान बिजली खपत के कई रिकाॅर्ड बन चुके हैं। इनमें 18 अगस्त 2023 को सबसे अधिकतम 13055 मेगावाट की खपत हुई थी और यह अब तक सबसे रिकाॅर्ड खपत है। क्योंकि कुल क्षमता के बराबर पहुंच गई थी। 2022 में 7 जुलाई को 12 हजार मेगावाट की पूरी क्षमता को मांग पार कर गई थी।
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इसलिए बढ़ रही बिजली खपत
राज्य में बिजली खपत बढ़ने का मुख्य कारण एनसीआर के क्षेत्र में नए उद्योंगों का आना है। दूसरा, रियल एस्टेट की बड़ी-बड़ी कंपनियां द्वारा हरियाणा में अपने प्रोजेक्ट शुरू करना। तीसरा, प्रदेश के लोगों में बढ़ती गर्मी और सर्दी के चलते एसी और गीजर चलाने की प्रवृति बढ़ रही है। चौथा कारण है बिजली कनेक्शनों के लिए हर साल हजारों की संख्या में नए आवेदन आ रहे हैं। इस समय 40 हजार के करीब खेती के ट्यूबवेल कनेक्शन और 50 हजार के करीब अन्य बिजली कनेक्शन लंबित चल रहे हैं।
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कहां कितनी है उत्पादन क्षमता
प्रदेश के थर्मल प्लांटों की बात करें तो पानीपत थर्मल प्लांट की यूनिट नंबर 6, 210, यूनिट 7 और 8 की क्षमता 250-250 मेगावाट है। दीन बंधू छोटूराम यमुनानगर प्लांट की दो यूनिटों की क्षमता 300-300, खेदड़ की दोनों यूनिटों की 600-600 मेगावाट है। इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की तीनों यूनिटों की क्षमता 500-500 मेगावाट है, यहां पर हरियाणा का शेयर 50 प्रतिशत है। इसी प्रकार महात्मा गांधी सुपर थर्मल प्लांट की दोनों यूनिट 600-600 मेगावाट की हैं।
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कहां से मिल रही कितनी बिजली
हरियाणा खुद 2582.4 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन करता है और बाकि बिजली खरीदी जाती है। इसमें से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से 846.14 मेगावाट बिजली, जबकि प्राइवेट कंपनियों से 7173.22 मेगावाट और 2921.09 मेगावाट बिजली केंद्रीय प्लांटों से खरीदी जाती है। अडाणी पावर से 1200 मेगावाट बिजली खरीदी जा रही। वहीं, आपात स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ से 350 मेगावाट व मध्य प्रदेश से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली के लिए पहले से ही अनुबंध हो रखे हैं।