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Chandigarh News: महिला वकीलों के लिए मातृत्व अवकाश की मांग, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से जवाब तलब
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चंडीगढ़। महिला वकीलों को मातृत्व अवकाश का कोई प्रावधान न होने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी एडवोकेट अविन कौर संधू ने हाईकोर्ट को बताया कि वकालत के पेशे में वैसे ही बहुत कम महिलाएं हैं और उस पर उन्हें मातृत्व अवकाश से वंचित रखना अन्याय और भेदभाव है। देश में वकीलों की कुल संख्या का केवल 15 प्रतिशत ही महिलाएं है। मातृत्व अवकाश का लाभ विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को मिलता है लेकिन वकीलों के लिए इसका कोई प्रावधान नहीं है।
याची ने बताया कि वकीलों के लिए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में वेलफेयर फंड मौजूद है, लेकिन इसका वकीलों के कल्याण के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसा होने के चलते महिलाओं की इस क्षेत्र में रुचि और कम हो जाती है। यदि महिला वकीलों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा तो इस अवस्था को पूरा करने के बाद वे फिर से आसानी से पेशे में वापसी कर सकती हैं। मातृत्व अवकाश का लाभ बच्चे के जन्म से पहले, जन्म के दौरान और इसके बाद के कुछ समय के लिए होता है। याची ने कहा कि जब एडवोकेट वेलफेयर फंड मौजूद है तो महिला वकीलों को मातृत्व लाभ से कैसे वंचित किया जा सकता है। ऐसे में सभी प्रतिवादियों को इसके लिए व्यवस्था करने का निर्देश जारी किया जाए। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी एडवोकेट अविन कौर संधू ने हाईकोर्ट को बताया कि वकालत के पेशे में वैसे ही बहुत कम महिलाएं हैं और उस पर उन्हें मातृत्व अवकाश से वंचित रखना अन्याय और भेदभाव है। देश में वकीलों की कुल संख्या का केवल 15 प्रतिशत ही महिलाएं है। मातृत्व अवकाश का लाभ विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को मिलता है लेकिन वकीलों के लिए इसका कोई प्रावधान नहीं है।
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याची ने बताया कि वकीलों के लिए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में वेलफेयर फंड मौजूद है, लेकिन इसका वकीलों के कल्याण के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसा होने के चलते महिलाओं की इस क्षेत्र में रुचि और कम हो जाती है। यदि महिला वकीलों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा तो इस अवस्था को पूरा करने के बाद वे फिर से आसानी से पेशे में वापसी कर सकती हैं। मातृत्व अवकाश का लाभ बच्चे के जन्म से पहले, जन्म के दौरान और इसके बाद के कुछ समय के लिए होता है। याची ने कहा कि जब एडवोकेट वेलफेयर फंड मौजूद है तो महिला वकीलों को मातृत्व लाभ से कैसे वंचित किया जा सकता है। ऐसे में सभी प्रतिवादियों को इसके लिए व्यवस्था करने का निर्देश जारी किया जाए। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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