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Chandigarh News: नगर निगम में लोकपाल की मांग तेज
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मेयर के लिए सलाहकार परिषद गठित करने का सुझाव, एडवोकेट अजय जग्गा ने प्रशासक को लिखा पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। नगर निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अब लोकपाल की नियुक्ति और मेयर के लिए सलाहकार परिषद के गठन की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रशासक की एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य एडवोकेट अजय जग्गा ने इस संबंध में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को एक पत्र लिखकर यह मांग उठाई है। जग्गा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार प्रत्येक स्थानीय निकाय में लोकपाल की नियुक्ति अनिवार्य है, लेकिन चंडीगढ़ नगर निगम में अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि निगम गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। लोगों की धारणा बन रही है कि निगम बनने से पहले शहर की स्थिति बेहतर थी। लोकपाल की नियुक्ति से वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा और जनता की शिकायतों का पारदर्शी निपटारा होगा।
कानून में संशोधन की भी दी सलाह
जग्गा ने पत्र में जोड़ा कि अगर मौजूदा कानून में लोकपाल का प्रावधान नहीं है तो प्रशासन को तत्काल इसमें संशोधन करना चाहिए। इससे न केवल जनता का भरोसा बहाल होगा बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उन्होंने मेयर के सहयोग के लिए छह अनुभवी लोगों की एक सलाहकार परिषद गठित करने का भी सुझाव दिया है जो विशेष रूप से राजस्व और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में सुझाव दे सके। जग्गा ने कहा कि इस सलाहकार परिषद से निगम पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा लेकिन इससे फैसलों में परिपक्वता और गंभीरता बढ़ेगी।
आयुक्त से रोज एक घंटे की जनसुनवाई शुरू करने की अपील
पत्र में नगर निगम आयुक्त से यह भी आग्रह किया गया है कि वे हर दिन कम से कम एक घंटे का समय जनसुनवाई के लिए निर्धारित करें। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से यह व्यवस्था पूरी तरह ठप है जिससे जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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सुधार से जुड़े तीन प्रमुख सुझाव
लोकपाल की नियुक्ति – जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए
सलाहकार परिषद – मेयर को रणनीतिक मार्गदर्शन के लिए
रोजाना जनसुनवाई – जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। नगर निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अब लोकपाल की नियुक्ति और मेयर के लिए सलाहकार परिषद के गठन की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रशासक की एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य एडवोकेट अजय जग्गा ने इस संबंध में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को एक पत्र लिखकर यह मांग उठाई है। जग्गा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार प्रत्येक स्थानीय निकाय में लोकपाल की नियुक्ति अनिवार्य है, लेकिन चंडीगढ़ नगर निगम में अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि निगम गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। लोगों की धारणा बन रही है कि निगम बनने से पहले शहर की स्थिति बेहतर थी। लोकपाल की नियुक्ति से वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा और जनता की शिकायतों का पारदर्शी निपटारा होगा।
कानून में संशोधन की भी दी सलाह
जग्गा ने पत्र में जोड़ा कि अगर मौजूदा कानून में लोकपाल का प्रावधान नहीं है तो प्रशासन को तत्काल इसमें संशोधन करना चाहिए। इससे न केवल जनता का भरोसा बहाल होगा बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उन्होंने मेयर के सहयोग के लिए छह अनुभवी लोगों की एक सलाहकार परिषद गठित करने का भी सुझाव दिया है जो विशेष रूप से राजस्व और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में सुझाव दे सके। जग्गा ने कहा कि इस सलाहकार परिषद से निगम पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा लेकिन इससे फैसलों में परिपक्वता और गंभीरता बढ़ेगी।
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आयुक्त से रोज एक घंटे की जनसुनवाई शुरू करने की अपील
पत्र में नगर निगम आयुक्त से यह भी आग्रह किया गया है कि वे हर दिन कम से कम एक घंटे का समय जनसुनवाई के लिए निर्धारित करें। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से यह व्यवस्था पूरी तरह ठप है जिससे जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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सुधार से जुड़े तीन प्रमुख सुझाव
लोकपाल की नियुक्ति – जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए
सलाहकार परिषद – मेयर को रणनीतिक मार्गदर्शन के लिए
रोजाना जनसुनवाई – जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए