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Chandigarh News: ओमैक्स को कब्जा देने में देरी पड़ी भारी, 56 लाख रुपये ब्याज देने का आदेश

Tue, 09 Jun 2026 02:46 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:46 AM IST
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Delay in handing over possession to Omaxe, ordered to pay interest of Rs 56 lakh
चंडीगढ़। ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ की आवासीय परियोजना में फ्लैट का समय पर कब्जा नहीं देने पर पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बिल्डर कंपनी को बड़ा झटका दिया है। रेरा ने ओमैक्स चंडीगढ़ एक्सटेंशन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह एक खरीदार को कब्जा देने में हुई करीब सात साल की देरी के लिए 56.28 लाख रुपये ब्याज के रूप में अदा करे। साथ ही यह कहा है कि जब तक खरीदार को वैध कब्जा नहीं सौंपा जाता, तब तक कंपनी को हर माह ब्याज का भुगतान जारी रखना होगा। उपभोक्ताओं के हित को लेकर यह फैसला बेहद अहम है।
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मामला संगरूर निवासी अशोक कुमार बंसल की शिकायत से जुड़ा है। बंसल ने एडवोकेट शहनवाज खान के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने वर्ष 2015 में ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ की द लेक परियोजना में एक पेंटहाउस बुक कराया था। खरीदार समझौते के अनुसार परियोजना में 1920 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाला यूनिट आवंटित किया गया था, जिसकी कुल कीमत करीब 87.11 लाख रुपये थी। शिकायतकर्ता ने समय-समय पर भुगतान करते हुए लगभग 74.50 लाख रुपये जमा करा दिए थे।
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शिकायत के अनुसार बिल्डर और खरीदार के बीच हुए समझौते में 42 माह के भीतर कब्जा देने का वादा किया गया था। इस हिसाब से दिसंबर 2018 तक फ्लैट सौंप दिया जाना चाहिए था, लेकिन तय समय बीतने के वर्षों बाद भी खरीदार को वैध कब्जा नहीं मिला। इसके बाद शिकायतकर्ता ने रेरा का दरवाजा खटखटाया और देरी के लिए ब्याज तथा अन्य राहत की मांग की। रेरा ने पाया कि खरीदार ने निर्धारित कब्जा तिथि से पहले अधिकांश भुगतान कर दिया था। ऐसे में वह रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 18(1) के तहत ब्याज पाने का अधिकारी है। रेरा ने आदेश में कहा कि बिल्डर खरीदार को 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से कुल 56,28,889 रुपये का भुगतान 90 दिनों के भीतर करे।
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अथॉरिटी ने यह भी कहा कि यदि अभी तक वैध कब्जा नहीं दिया गया है तो कंपनी खरीदार की जमा राशि पर लगभग 67 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से ब्याज देती रहेगी। आदेश का पालन नहीं होने पर रेरा अधिनियम की धारा 63 के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
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