{"_id":"60db931b8ebc3ee59c071677","slug":"defense-committee-of-lawyers-formed-to-help-farmers-chandigarh-news-pkl418414215","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों की सहायता के लिए वकीलों की रक्षा कमेटी का हुआ गठन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों की सहायता के लिए वकीलों की रक्षा कमेटी का हुआ गठन
विज्ञापन
चंडीगढ़। तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान नेताओं पर 26 जून को दर्ज मुकदमों के खिलाफ वकीलों ने सेक्टर-33 के लॉ भवन में बैठक की। इस दौरान 13 सदस्यीय रक्षा कमेटी का गठन किया गया। कमेटी के सदस्यों ने पांचों एफआईआर की कॉपियां प्राप्त कीं, जिनको पढ़कर वकीलों ने कहा कि किसानों पर लगाए गए आरोप बेतुके, झूठे, अस्पष्ट और हास्यास्पद हैं।
सेक्टर-36 थाना पुलिस ने एफआईआर में उल्लेख किया है कि किसान नेता बलजीत सिंह, प्रेम सिंह भंगू, काका सिंह, सुरेश चंद्र, बलविंदर सिंह और हरमीत सिंह सबके हाथों में लाठियां और डंडे थे, जिनसे उन्होंने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए बैरिकेड तोड़े। इस दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इस पर वकीलों ने कहा कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चैनलों ने प्रदर्शन को कवर किया, जिसमें देखा जा सकता है कि किसान नेता खाली हाथ थे और कार में सवार थे। उन्होंने किसी को चोट नहीं पहुंचाई और वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
सेक्टर-17 थाने की एफआईआर में पुलिस ने लिखा कि जस बाजवा और सोनिया मान के नेतृत्व में काफिला भीड़ के रूप में आया, इस दौरान उन्होंने तलवार और लाठियां चलाईं। हेड कांस्टेबल अशोक के साथ हाथापाई हुई, जिसमें उसकी वर्दी के बटन टूट गए और नेम प्लेट नीचे गिर गई। इस पर वकीलों ने कहा कि यह दोनों उस दिन विरोध मार्च का हिस्सा नहीं थे और न ही चंडीगढ़ में थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने किसानों पर बल प्रयोग किया। उसके बाद उन पर अधिकारियों और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के झूठे मुकदमे दर्ज किए। वकीलों ने कहा कि सभी एफआईआर को पढ़ने से पता चलता है कि सभी आरोप झूठे हैं। नेताओं के हाथ खाली थे जबकि अन्य लोगों के हाथ में अपनी-अपनी यूनियन के झंडे थे। इसलिए वकीलों ने किसानों के अधिकारों की रक्षा और मुकदमों से बचाव के लिए कमेटी का गठन किया।
विज्ञापन
कमेटी में ये वकील शामिल
राजेंद्र सिंह चीमा, मनजीत सिंह खैरा, जोगिंदर सिंह तूर, ओंकार सिंह, त्रिलोक सिंह चौहान, राजीव गोदारा, हरचंद सिंह बाथ, कुलबीर सिंह धालीवाल, विपिन कुमार, मतविंदर सिंह, देविंद्र सिंह मान, सतनाम प्रीत सिंह चौहान और सतबीर वालिया।
विज्ञापन
सेक्टर-36 थाना पुलिस ने एफआईआर में उल्लेख किया है कि किसान नेता बलजीत सिंह, प्रेम सिंह भंगू, काका सिंह, सुरेश चंद्र, बलविंदर सिंह और हरमीत सिंह सबके हाथों में लाठियां और डंडे थे, जिनसे उन्होंने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए बैरिकेड तोड़े। इस दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इस पर वकीलों ने कहा कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चैनलों ने प्रदर्शन को कवर किया, जिसमें देखा जा सकता है कि किसान नेता खाली हाथ थे और कार में सवार थे। उन्होंने किसी को चोट नहीं पहुंचाई और वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
विज्ञापन
सेक्टर-17 थाने की एफआईआर में पुलिस ने लिखा कि जस बाजवा और सोनिया मान के नेतृत्व में काफिला भीड़ के रूप में आया, इस दौरान उन्होंने तलवार और लाठियां चलाईं। हेड कांस्टेबल अशोक के साथ हाथापाई हुई, जिसमें उसकी वर्दी के बटन टूट गए और नेम प्लेट नीचे गिर गई। इस पर वकीलों ने कहा कि यह दोनों उस दिन विरोध मार्च का हिस्सा नहीं थे और न ही चंडीगढ़ में थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने किसानों पर बल प्रयोग किया। उसके बाद उन पर अधिकारियों और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के झूठे मुकदमे दर्ज किए। वकीलों ने कहा कि सभी एफआईआर को पढ़ने से पता चलता है कि सभी आरोप झूठे हैं। नेताओं के हाथ खाली थे जबकि अन्य लोगों के हाथ में अपनी-अपनी यूनियन के झंडे थे। इसलिए वकीलों ने किसानों के अधिकारों की रक्षा और मुकदमों से बचाव के लिए कमेटी का गठन किया।
विज्ञापन
कमेटी में ये वकील शामिल
राजेंद्र सिंह चीमा, मनजीत सिंह खैरा, जोगिंदर सिंह तूर, ओंकार सिंह, त्रिलोक सिंह चौहान, राजीव गोदारा, हरचंद सिंह बाथ, कुलबीर सिंह धालीवाल, विपिन कुमार, मतविंदर सिंह, देविंद्र सिंह मान, सतनाम प्रीत सिंह चौहान और सतबीर वालिया।