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दलबदलुओं को रखा कैबिनेट से दूर

Mon, 27 Oct 2014 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/चंडीगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो/चंडीगढ़। Updated Mon, 27 Oct 2014 01:14 AM IST
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defectors for away from cabinet
बड़ी संख्या में कांग्रेस और इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की हसरतें पूरी नहीं हो सकीं। इनमें से कई नेता जहां मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे, वहीं कुछ को मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी। रविवार को जैसे ही खट्टर मंत्रिमंडल ने शपथ ली तो इनके मंसूबों पर पानी फिर गया।
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छह कैबिनेट और तीन राज्य मंत्रियों वाले मंत्रिमंडल में दूसरी पार्टियाें से आए किसी नेता को जगह नहीं मिली। भाजपा ने सिर्फ अपने पुराने सिपहसालारों पर विश्वास जताया है।
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बड़ी संख्या में जीते हैं दूसरी पार्टियों से आए नेता
लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में इनेलो और कांग्रेस के नेता भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने इनमें से कई को टिकट देकर चुनाव मैदान में भी उतारा। भाजपा के टिकट पर जीतने वालाें में इनकी संख्या भी बड़ी है, लेकिन भाजपा ने इनमें से एक पर भी विश्वास नहीं जताया। कई हलकों में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को टिकट देने पर भी एतराज जताया था। उनका कहना था कि इससे पार्टी के लिए वर्षों से मेहनत कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर होगा। कैबिनेट के गठन में पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का पूरा ख्याल रखा है।
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प्रेम लता को थी बड़ी उम्मीद
प्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल रहे चौधरी बीरेंद्र सिंह ने बड़े पद की इच्छा से ही कांग्रेस को अलविदा कहा था। कांग्रेस में हुड्डा के विरोध के चलते पिछली बार वे विधानसभा चुनाव हार गए थे, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। वे भाजपा में शामिल होकर हुड्डा को मात देना चाहते थे और कहीं न कहीं उन्हें उम्मीद थी कि वे मुख्यमंत्री बन जाएंगे। उचाना से विधायक चुनी गईं उनकी पत्नी प्रेमलता को उन्होंने कैबिनेट में जगह दिलाने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। बताया जा रहा है कि भाजपा उनकी पत्नी को राज्यमंत्री बना रही थी, जिसके लिए वे नहीं माने। कैबिनेट मंत्री बनाने से भाजपा ने मना कर दिया।


कृष्ण पंवार भी रहे खाली हाथ
इसराना से भाजपा के टिकट पर विधायक बने कृष्ण पंवार ने भी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थामा था। वे वर्र्षों से इनेलो में सक्रिय रहे हैं, लेकिन इनेलो नेतृत्व की घटती लोकप्रियता को देखते हुए वे भाजपा में शामिल हो गए थे। दूसरी पार्टियों को छोड़कर आने वालों में भी ऐसे खुशकिस्मत रहे जो विधानसभा तक पहुंचने में कामयाब रहे।
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