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बेटियों को डिजिटल मार्केटिंग कोर्स मुफ्त में करा रही दीपिका
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चंडीगढ़। एक बेटी पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बन जाए तो दो परिवारों के लिए गर्व का विषय बन जाता है। एक ओर मायका पक्ष बेटी पर नाज करता है तो दूसरी ओर बेटी की सोच और क्षमता पति व बच्चे को नई दिशा देती है। इस मूल मंत्र को जीवन में धारण किए दीपिका बहरी ने अब तक 70 युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके जीवन में रंग भरे हैं। वे आज अपने बल पर कमा रही हैं और परिवार का नाम रोशन कर रही हैं।
सेक्टर-21 निवासी दीपिका बहरी अंतरजाल नाम से एक डिजिटल मार्केटिंग की शिक्षा का कोर्स करवाती हैं। उनके इंस्टीट्यूट में इसकी फीस 30 हजार रुपये है, लेकिन बेटियों के लिए पूरी तरह निशुल्क है। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले माली की एक बेटी और एक बेटा है। माली अपने बेटे को पढ़ाता था, लेकिन बेटी को स्कूल नहीं भेजता था। पूछने पर उसने बताया कि इतनी आमदनी नहीं है, इसलिए एक ही बच्चे को पढ़ा पाता हूं। उस दिन तय कर लिया कि रुपयों के अभाव में कोई बेटी अशिक्षित या अयोग्य नहीं रहेगी। उन्होंने माली की बेटी को गोद लिया और पिछले 18 साल से उसकी पढ़ाई का खर्च उठाकर उसे कॉलेज में भी शिक्षा दिलवा रही हैं।
नई किताबें देकर पुरानी इकट्ठा करने की व्यवस्था की शुरू
दीपिका ने अपने स्तर पर एक व्यवस्था शुरू की कि अपनी पुरानी किताबें दें और नई कक्षा की पुस्तकें लेकर जाएं। शहर में 9 स्थानों पर इसके स्टॉल लगवाए। मार्च 2021 में उन्होंने 21 हजार किताबें इकट्ठी की थीं।
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सेक्टर-21 निवासी दीपिका बहरी अंतरजाल नाम से एक डिजिटल मार्केटिंग की शिक्षा का कोर्स करवाती हैं। उनके इंस्टीट्यूट में इसकी फीस 30 हजार रुपये है, लेकिन बेटियों के लिए पूरी तरह निशुल्क है। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले माली की एक बेटी और एक बेटा है। माली अपने बेटे को पढ़ाता था, लेकिन बेटी को स्कूल नहीं भेजता था। पूछने पर उसने बताया कि इतनी आमदनी नहीं है, इसलिए एक ही बच्चे को पढ़ा पाता हूं। उस दिन तय कर लिया कि रुपयों के अभाव में कोई बेटी अशिक्षित या अयोग्य नहीं रहेगी। उन्होंने माली की बेटी को गोद लिया और पिछले 18 साल से उसकी पढ़ाई का खर्च उठाकर उसे कॉलेज में भी शिक्षा दिलवा रही हैं।
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नई किताबें देकर पुरानी इकट्ठा करने की व्यवस्था की शुरू
दीपिका ने अपने स्तर पर एक व्यवस्था शुरू की कि अपनी पुरानी किताबें दें और नई कक्षा की पुस्तकें लेकर जाएं। शहर में 9 स्थानों पर इसके स्टॉल लगवाए। मार्च 2021 में उन्होंने 21 हजार किताबें इकट्ठी की थीं।
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