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हाउसिंग बोर्ड के मकानों को फ्लोर वाइज बेचने का फैसला स्थगित

Wed, 23 Dec 2015 09:21 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 23 Dec 2015 09:21 AM IST
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decision: property of Housing board will not sold floor according

हाउसिंग बोर्ड की ओर से अक्तूबर में मकानों को फ्लोर वाइज भी बेचने का निर्णय लिया गया था, लेकिन इस फैसले पर मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया ने मंगलवार को हुई बोर्ड की बैठक में आपत्ति जताई, डीसी अजीत बालाजी जोशी ने भी सेतिया का समर्थन किया है।

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ऐसे में चर्चा के बाद अब इस फैसले को स्थगित कर दिया गया है। डीसी जोशी ने मीटिंग में कहा कि शहर में अपार्टमेंट एक्ट लागू करना आसान नहीं है क्योंकि यहां पर प्रॉपर्टी के कई शेयर होल्डर्स होते हैं। ऐसे में शेयर सिस्टम लागू होने से अपार्टमेंट एक्ट लागू नहीं किया जा सकता।
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इसके बावजूद डीसी जोशी ने कहा कि अपार्टमेंट एक्ट लागू करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, इस पर संपदा विभाग सर्वे कर रहा है। डीसी की ओर से आपत्ति जताने के बाद पिछली बैठक में लिए गए निर्णय को पेंडिंग कर दिया गया है। मालूम हो कि संपदा विभाग की ओर से भी जो प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री की जाती है, वह शेयर वाइज की जाती है न कि फ्लोर वाइज।
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अक्तूबर में हुई बैठक में बोर्ड ने लिया था यह निर्णय
बोर्ड ने ग्राउंड फ्लोर, पहली और दूसरी मंजिल का अलग शेयर तय किया था। इसके तहत यह प्रस्ताव था कि लोग फ्लोर वाइज भी अपने शेयर हाउसिंग बोर्ड से ट्रांसफर करा सकेंगे। बोर्ड के अनुसार अगर मकान दो लोगों के नाम पर है तो ग्राउंड फ्लोर का 50 प्रतिशत और ऊपर की मंजिल का 50 प्रतिशत शेयर माना जाएगा।

जबकि तीन फ्लोर में ग्राउंड फ्लोर का 50, पहली मंजिल का 30 और ऊपर की मंजिल का 20 प्रतिशत शेयर माना जाएगा। बोर्ड ने यह भी निर्णय लिया है कि ट्रांसफर होने के बावजूद आगे मकान बेचा जा सकता है। जो आगे खरीददार होगा, उससे फीस लेकर मकान ट्रांसफर किया जा सकता है।

अक्तूबर में जब यह निर्णय लिया गया था, उसके बाद ही मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया ने इस पर आपत्ति जताई थी। जबकि बोर्ड की बैठक में स्पीक कंपनी से हुए एमओयू को मंजूरी दी गई थी, इसके तहत 50 लाख रुपये की लागत खर्च हाउसिंग बोर्ड का वेब और डिजिटाइलेशन सिस्टम अपडेट होगा।


फाइनेंस कंट्रोलर एवं सलाहकार की होगी नियुक्ति
हाउसिंग बोर्ड को वित्तीय संकट से उबारने के लिए फाइनेंस कंट्रोल एवं सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। यह प्रस्ताव सदस्य तरसेम गर्ग ने बैठक में रखा, इस पर सभी सदस्यों ने सहमति जताई। तरसेम गर्ग का कहना है कि इससे बोर्ड की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी। मालूम हो कि इस समय बोर्ड की वित्तीय हालात ज्यादा ठीक नहीं है।

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