फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Debt is increasing along with per capita income in Haryana

Chandigarh News: हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय के साथ-साथ बढ़ रहा कर्ज का मर्ज

Mon, 26 Feb 2024 01:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:40 AM IST
विज्ञापन
Debt is increasing along with per capita income in Haryana
हरियाणा का कुल कर्ज 3.17 लाख करोड़ रुपये हुआ
विज्ञापन

विपक्ष हमलावर, मुख्यमंत्री का तर्क तय सीमा में ले रहे कर्ज

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में बेशक प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, लेकिन प्रदेश पर कर्ज उससे भी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। अब प्रदेश का कर्ज पिछले साल के 2.84 लाख करोड़ के मुकाबले 3.17 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं, लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल और अर्थशास्त्री इसे निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बता रहे हैं। तर्क है कि जब प्रदेश में विकास कराया जाता है तो कर्ज बढ़ता है और सरकार तय सीमा के अंदर ही कर्ज ले रही है। 2014 में हरियाणा में भाजपा की सरकार आई थी और मनोहर लाल ने प्रदेश की कमान संभाली थी। उस समय प्रदेश पर 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। साढ़े नौ साल में यह कर्ज बढ़ते-बढ़ते चार गुना से अधिक बढ़ चुका है।

-------
ऐसे बढ़ा प्रदेश पर कर्ज
वर्ष कर्ज की राशि

2014-15 70 हजार करोड़
2015-16 1.01 लाख करोड़
2016-17 1.24 लाख करोड़
2017-18 1.39 लाख करोड़
2018-19 1.56 लाख करोड़
2019-20 1.95 लाख करोड़
2020-21 2.05 लाख करोड़
2021-22 2.23 लाख करोड़
2022-23 2.43 लाख करोड़
2023-24 2.84 लाख करोड़
2024-25 3.17 लाख करोड़


-------
बढ़ती प्रति व्यक्ति आय
साल आय (लाखों में)
2015-16 1.64
2016-17 1.84
2017-18 2.8
2018-19 2.23
2019-20 2.32
2020-21 2.24
2021-22 2.64
2022-23 2.96
2023-24 3.25

-------
एसजीडीपी में ऐसे आया उतार-चढ़ाव

वर्ष प्रतिशत

2015-16 11.6

2016-17 10.5

2017-18 6.8

2018-19 8.7

2019-20 8.0

2020-21 -5.3

2021-22 9.8
2022-23 7.9
2023-24 8.0


--------
हुड्डा बोले, प्रदेश पर 44,51,368 रुपये का कर्ज

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि सरकार ने बजट में कुल कर्ज 3,17,982 करोड़ रुपये दिखाया है, जबकि सच्चाई यह है कि आज प्रदेश पर कुल 4,51,368 करोड़ रुपये (आंतरिक कर्ज- 3,17,982, स्मॉल सेविंग- 44000, बोर्ड व कॉरपोरेशन- 43,955, बकाया बिजली बिल व सब्सिडी- 46,193) का कर्जा हो चुका है। प्रदेश पर जीएसडीपी का 41.2 प्रतिशत कर्जा हो गया है, जो कि 33 प्रतिशत की मानक सीमा से कहीं अधिक है। सरकार आंकड़ों से गुमराह करने की कोशिश कर रही है। सरकार प्रति व्यक्ति आय की बात कर रही है, लेकिन प्रति व्यक्ति कर्ज भी तो बढ़ रहा है।
विज्ञापन


----------
कर्ज लेने के लिए सीमाएं तय हैं। दूसरा, कर्ज भी सभी को नहीं मिलता, उसके लिए राज्य के संसाधन और वित्तीय स्थिति देखी जाती है। हरियाणा पर बढ़ता कर्ज चिंता का विषय जरूर है, लेकिन राहत की बात है कि हरियाणा ने तय सीमा पार नहीं की है। कर्ज उतारने के लिए हरियाणा को अतिरिक्त राजस्व बढ़ाने के लिए प्रयास करने होंगे, क्योंकि और आगे कर्ज बढ़ा तो देनदारी के साथ उसका ब्याज भी बढ़ेगा और अधिक राशि कर्ज व ब्याज चुकाने में ही खर्च हो जाएगी। - प्रोफेसल बिमल अंजुम, डीएवी कालेज, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article