Chandigarh News: 91 लाख में उठेगा कॉलोनी-4 का मलबा, जुलाई से पहले खाली करनी होगी जगह, निगम ने वन विभाग को भेजा पत्र
निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन के नियमानुसार किसी भी भूमि पर मलबा पड़ा नहीं होना चाहिए। हाल ही में तोड़ी गई कॉलोनी नंबर चार में मलबे की मात्रा काफी ज्यादा है। इसमें काफी संख्या में कर्मचारी और गाड़ियां लगेंगी, जो निगम के लिए संभव नहीं होगा इसलिए इसे ठेके पर दिया जाएगा।
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चंडीगढ़ की कॉलोनी नंबर चार के आशियानों को तोड़ने के बाद मलबा हटाने की योजना बनाई जा रही है। नगर निगम के अनुसार कॉलोनी नंबर चार में लगभग 50 हजार मीट्रिक टन कचरा पड़ा है। इसे उठवाने में लगभग 91 लाख रुपये खर्च आएगा। नियमानुसार जिस विभाग की भूमि होती है मलबा उठाने की जिम्मेदारी भी उसकी होती है इसलिए निगम ने वन विभाग को पत्र लिखकर मलबा उठाने के संबंध में पूछा है। वन विभाग निगम को मलबा उठाने के लिए कहेगा तो निगम संबंधित विभाग से फंड लेकर टेंडर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। वहीं मुख्य वन संरक्षक देवेंद्र दलाई का कहना है कि फंड देने में कोई समस्या नहीं, बस मानसून से पहले भूमि खाली करानी होगी। इस पर पौधे रोपने की योजना है।
निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन के नियमानुसार किसी भी भूमि पर मलबा पड़ा नहीं होना चाहिए। हाल ही में तोड़ी गई कॉलोनी नंबर चार में मलबे की मात्रा काफी ज्यादा है। इसमें काफी संख्या में कर्मचारी और गाड़ियां लगेंगी, जो निगम के लिए संभव नहीं होगा इसलिए इसे ठेके पर दिया जाएगा। वन विभाग चाहता था कि निगम इस मलबे को उठाए, इसलिये निगम ने एक अनुमान लगाकर मलबा उठाने में आने वाले खर्च का आकलन कर वन विभाग को भेज दिया है। वहीं निगम ने मलबे के निस्तारण के लिए होने वाली टेंडर प्रक्रिया की भी पूरी तैयारी कर ली है, बस वन विभाग की सहमति का इंतजार है।
प्लांट की क्षमता बढ़ी, इतना मलबा निस्तारित करने में लगेगा समय
इंडस्ट्रियल एरिया स्थित नगर निगम के निर्माण एवं विध्वंस मलबा (सीएंडडी वेस्ट) प्लांट की क्षमता हाल ही में बढ़ाई गई है। इसमें अब प्रतिदिन 12 से 15 हजार पेवर ब्लॉक बनाए जा सकते हैं, वहीं मलबे को निस्तारित करने की क्षमता भी बढ़ाई गई है लेकिन इतनी मात्रा में मलबे को निस्तारित करने में निगम को काफी समय लगेगा। इसलिए इस मलबे को अन्य कार्यों में लगाने, ठेकेदार से मलबा शहर से बाहर ले जाने या ठीक मैटेरियल को मौके पर ही बेचने की योजना पर विचार चल रहा है। फिलहाल निगम के प्लांट में पहले से ही काफी मलबा पड़ा है, उसके निस्तारण के बाद इस मलबे के निस्तारण की योजना बनेगी।
जिसका मलबा निस्तारण की जिम्मेदारी के साथ खर्च भी उसका
नियम के अनुसार जिसका मलबा होता है निगम उससे निस्तारण का खर्च भी लेता है, लेकिन यह मलबा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। ऐसे में इस मलबे के निस्तारण के बाद जो मैटेरियल निकलेगा, उसे बेचकर निगम अपना खर्च पूरा करने का प्रयास करेगा। वहीं शहर में ज्यादातर वन विभाग की भूमि पर झुग्गी-झोपड़ी बनी है या अवैध कब्जा है। प्रशासन की ओर से इन्हें हटाने के बाद मलबा उठाने की जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। प्रशासन ने जनता कॉलोनी, संजय कॉलोनी, शाहपुरा कॉलोनी में भी नोटिस लगा दिया है। इन तीनों कॉलोनी में भी लगभग 15 हजार मकान हैं। इन्हें गिराने के बाद जो मलबा निकलेगा उसे भी हटाने के लिए निगम को ही जिम्मेदारी दी जा सकती है।
मलबा हटाने के लिए वन विभाग को पत्र लिख दिया है। इसमें लगभग 91 लाख रुपये खर्च आएगा। वन विभाग से सहमति मिलते ही तत्काल टेंडर लगाकर काम शुरू करा दिया जाएगा। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
नगर निगम को पत्र लिखकर काम तेजी से करने को कहेंगे। अभी काफी धीमी गति से काम चल रहा है। फंड देने में कोई समस्या नहीं, बस जुलाई से पहले जमीन खाली होनी चाहिए। - देवेंद्र दलाई, मुख्य वन संरक्षक