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'महाभारत' के कृपाचार्य धर्मेश तिवारी नहीं रहे

Wed, 06 Aug 2014 05:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 06 Aug 2014 05:54 PM IST
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Death of renowned actor-director Dharmesh Tiwari

बीआर चोपड़ा के मशहूर नाटक 'महाभारत' में कृपाचार्य की भूमिका को अमर करने वाले कलाकार धर्मेश तिवारी का बुधवार दोपहर चंडीगढ़ में देहांत हो गया। धर्मेश पंजाब में अपने नाटक के सिलसिले में पहुंचे थे।

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बुधवार सुबह ही उन्हें तबीयत खराब होने के चलते अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। दोपहर को उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 63 वर्ष के थे। धर्मेश के परिवार में उनकी पत्नी और 2 बेटियां हैं। देर शाम को धर्मेश के पार्थिव शरीर को मुंबई भेजा जाएगा।

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निधन पर शोक जताया

Death of renowned actor-director Dharmesh Tiwari

धर्मेश सिने ऐंड टीवी आर्टिस्ट असोसिएशन (सिनटा) के महासचिव और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज (एफडब्लूआईसीई) के अध्यक्ष भी थे।

वह चंडीगढ़ एक शो के लिए आए थे। धर्मेश के करीबी दोस्त और जाने-माने अभिनेता रजा मुराद ने बताया, 'उनका निधन बुधवार सुबह चंडीगढ़ में हुआ। वह वहां एक शो के लिए गए थे।'

उन्होंने बताया, 'उन्हें उच्च मधुमेह था और संभवत: यह उनके निधन की एक वजह रहा हो। वह बहुत सक्रिय थे। यह फिल्मोद्योग के लिए बहुत बड़ी क्षति है।' रोहित रॉय और डॉली बिंद्रा सहित छोटे पर्दे के अन्य कलाकारों ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के जरिये उनके निधन पर शोक जताया।

संक्षिप्त जीवन परिचय: धर्मेश तिवारी

Death of renowned actor-director Dharmesh Tiwari

जाने-माने अभिनेता निर्देशक धर्मेश तिवारी का जन्म 27 अप्रैल 1951 को दिल्ली में हुआ था। हालांकि उनका पैतृक गांव उत्तराखंड के अलमोड़ा जिले का गांव दैरी है। उनकी माता का नाम कमला तिवारी और पिता का नाम रामदत्त तिवारी है है। धर्मेश के परिवार में उनकी पत्नी और 2 बेटियां हैं। धर्मेश ने स्नातक की पढ़ाई की। बचपन में ही उनकी प्रतिभा का अहसास हो गया था।

प्रमुख उपलब्धियां
दिल्ली युवा महोत्सव में स्वर्ण पदक (1967)। रेडियो (सैनिक मनोरंजन प्रभाग) में कार्य किया। 1972 में मुंबई दूरदर्शन में। अजनबी धरावाहिक का लेखन। दर्जनों धरावाहिकों व फिल्मों में काम किया और चर्चित हुआ महाभारत के कृपाचार्य बनकर। फिल्म निर्देशन में भी हाथ आजमाया। मुम्बई में सिने जगत के कलाकारों की संस्था के सचिव बने। उनका युवाओं को संदेश था कि मेहनत ही सफलता का राज है। युद्ध में आए हैं तो वीरता दिखाएं। प्रयत्नशील रहें।

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