फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Day Wednesday Was Important in Shaheed Udham Singh Life, Death Anniversary

शहीद ऊधम सिंह: बुधवार को माइकल ओडवायर को मारा, बुधवार को फांसी, बुधवार को अंतिम संस्कार

Sat, 27 Jul 2019 01:22 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)
सुशील कुमार, अमर उजाला, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर) Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 27 Jul 2019 01:22 PM IST
विज्ञापन
Day Wednesday Was Important in Shaheed Udham Singh Life, Death Anniversary
फाइल फोटो
शहीद ऊधम सिंह की जिंदगी में बुधवार का दिन बेहद अहम रहा। बुधवार के दिन माइकल ओडवायर को मारा, बुधवार को ही फांसी हुई और बुधवार को ही अंतिम संस्कार हुआ। बुधवार के दिन अंग्रेज अधिकारी माइकल ओडवायर को मौत के घाट उतार कर ऊधम सिंह ने अपनी जिंदगी का लक्ष्य हासिल किया था।
विज्ञापन


बुधवार को इस महान शहीद ने फांसी का फंदा चूमा था और शहादत के 34 साल बाद बुधवार के दिन ही जन्मभूमि पर अंतिम संस्कार किया गया। आजादी संग्राम के इस महान परवाने ने 13 मार्च 1940 को लंदन के केकस्टन हॉल में माइकल ओडवायरको मार गिराया था। इस दिन बुधवार था।
विज्ञापन


लंदन की पेंटनविले जेल में 31 जुलाई 1940 दिन बुधवार को सुबह नौ बजे फांसी का फंदा चूमा था। शहादत के 34 वर्ष बाद तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने पंजाब के सीएम रहते शहीद का पार्थिव शरीर लंदन से सुनाम मंगवाया था और सुनाम के ओलंपिक स्टेडियम में 31 जुलाई 1974 को अंतिम संस्कार किया गया था। संयोग से उस दिन भी बुधवार ही था।
विज्ञापन
विज्ञापन

लंदन की पेटनविले जेल में मुख्य जल्लाद के तौर पर अंग्रेज जल्लाद एसडब्ल्यू क्रॉस ने अपने कैरियर की पहली फांसी ऊधम सिंह को दी थी। फांसी देने के बाद डॉक्टरों की टीम ने जांच कर शहीद को मृत घोषित कर दिया। डिटेक्टिव इंस्पेक्टर जे सवान ने रिपोर्ट दी कि 31 जुलाई को पोस्टमार्टम के वक्त वह मौजूद था।

शहीद के पार्थिव शरीर को लकड़ी के बक्से में रखकर वहीं दफना दिया गया था और वहां यूएस (ऊधम सिंह) लिख दिया गया था। बाद में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह के प्रयास से इसन महान शहीद का पार्थिव शरीर सुनाम लाया जा सका और सभी धर्मों की मर्यादा के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।

शहीद की अस्थियों के कलश हरिद्वार, कीरतपुर साहिब, जलियांवाला बाग तथा रोजा शरीफ सरहंद भेजे गए। फांसी से पहले ऊधम सिंह ने जेल अधिकारियों से आग्रह किया था कि उसका सामान लंदन गुरुद्वारा के सेवादार शिव सिंह जौहल को भेज दिया जाए।

शहीद की जिंदगी पर खोज कर रहे लेखक राकेश कुमार ने बताया कि फांसी के वक्त शहीद ऊधम सिंह की ओर से व्यक्त किए जज्बातों की जानकारी से संबंधित फाइलें हासिल करने का प्रयास जारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed