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बेगुनाह बेटी ने काटी जेल: पिता की हत्या के आरोप में दो साल तक सलाखों के पीछे रही आशा, ऐसे पलट गई पूरी कहानी

Sun, 04 Jan 2026 03:23 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Sun, 04 Jan 2026 03:23 PM IST
सार

चंडीगढ़ जिला अदालत ने 21 वर्षीय युवती को पिता की हत्या मामले में बेगुनाह करार देते हुए बरी र दिया। युवती ने दो साल तक जेल की सजा भी काटी। परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह उसकी जमानत करवा सके।

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Daughter served time in jail for her father murder case Chandigarh court acquitted her after two year
judge court हथोड़ा - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

पिता की हत्या के आरोप में करीब दो साल जेल में बंद रही बेटी आखिरकार बेगुनाह साबित हुई। चंडीगढ़ जिला अदालत ने किशनगढ़ गांव निवासी आशा को पिता सुमेई लाल की हत्या के आरोप से बरी कर दिया। मुख्य गवाह के अदालत में अपने बयान से मुकरने के बाद यह फैसला सुनाया गया। अदालत ने पुलिस की जांच पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए सख्त टिप्पणी की।

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अदालत ने कहा कि जब मामले में कोई ठोस गवाह नहीं था तो बेटी को इतने लंबे समय तक जेल में रखने का क्या औचित्य था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के दौरान तथ्यों की गहराई से पड़ताल जरूरी होती है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही साफ दिखाई देती है। इसी आधार पर अदालत ने आशा को बरी करने का आदेश दिया।
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मुख्य गवाह ने पलटी कहानी
मामले के मुख्य गवाह गुलाब सिंह ने अदालत में बयान देते हुए कहा कि उसने न तो आशा को अपने पिता की हत्या करते देखा और न ही उसने पुलिस को कभी ऐसा बयान दिया था। इसके बाद अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी कमजोर पड़ गई। आशा के वकील ने पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस चाकू को हत्या का हथियार बताया गया, वह रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान्य और छोटा चाकू था। ऐसे हथियार से जानलेवा हमला होने पर संदेह है।
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एक ही वार, 2 साल 2 महीने जेल में रही बेटी
वकील ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए दलील दी कि मृतक के शरीर पर केवल एक ही वार किया गया था। यदि बेटी की हत्या की नीयत होती तो एक से अधिक वार किए जाने की संभावना रहती। यह भी बताया कि घटना के समय आशा अपने पिता की छाती से बह रहे खून को रोकने की कोशिश कर रही थी, न कि हमला कर रही थी।

क्या था पूरा मामला
10 अगस्त 2023 को थाना आईटी पार्क क्षेत्र के किशनगढ़ गांव में सुमेई लाल की चाकू से हमला कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर मृतक की बेटी आशा को आरोपी बनाया। उस समय आशा की उम्र 19 वर्ष थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पोस्टमॉर्टम सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में कराया गया था। रिपोर्ट में छाती में लगे गहरे जख्म से अत्यधिक खून बहने को मौत का कारण बताया गया था।

पहले बयान में बेटी पर लगाया था आरोप
चार्जशीट के अनुसार गवाह गुलाब सिंह ने पहले पुलिस को बताया था कि वह पानी लेने सुमेई लाल के घर गया था। उसने उन्हें खून से लथपथ हालत में फर्श पर पड़ा देखा और बेटी को हाथ में चाकू लिए खड़ा पाया। हालांकि, अदालत में उसने इस बयान से पूरी तरह इंकार कर दिया। गवाह ने कहा उसने किसी को हमला करते हुए नहीं देखा।


परिवार ने उठाए सवाल
फैसले के बाद परिवार ने आरोप लगाया कि शुरू से ही पुलिस ने मामले में लापरवाही बरती। उनकी बेटी निर्दोष थी लेकिन उनकी एक भी बात नहीं सुनी गई। परिवार के पास इतने संसाधन नहीं थे कि वे बेटी की जमानत करा सकें। परिवार का कहना है कि बेटी के दो साल जेल में कटे, उसकी भरपाई कौन करेगा। समाज में बदनामी हुई, शादी और भविष्य को लेकर कई चिंताएं अब परिवार के सामने हैं।

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