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फैशन का शौक दे रहा युवाओं को त्वचा रोग

Mon, 23 Dec 2013 09:29 AM IST
दीपक शाही / अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही / अमर उजाला, पंचकूला Updated Mon, 23 Dec 2013 09:29 AM IST
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dangrous fashion make sick
फैशन के दौर में युवा अपनी सेहत की भी परवाह नहीं करते। अब युवतियों की बात तो दूर, युवक भी इसमें पीछे नहीं हैं। नतीजतन, आज के युवा भी स्किन की बीमारियों से पीड़ित होने लगे हैं।
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स्किन के साफ्ट पार्ट जैसे लोवर लिप, टंग, आईब्रो अमलाइकस और कान छिदवाने से स्किन संबंधी कई बीमारियां आम हो गई हैं।

स्किन स्पेशलिस्ट के अनुसार, स्किन के साफ्ट पार्ट छिदवाने से किलॉयड, स्किन ग्रेनोमा जैसी बीमारी होती है। यदि किसी धातु में निकिल की मात्रा पांच प्रतिशत से ज्यादा है तो स्किन इनफेक्शन और स्किन डरमेटाइटिस भी हो सकती है।
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इसलिए आर्टिफीशियल ईयर रिंग के उपयोग से बचना चाहिए। इसके अलावा सोने और चांदी की रिंग का उपयोग करते समय भी निकिल का खास ध्यान रखें कि कहीं इनमें निकिल की मिलावट तो नहीं है।
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ये बीमारियां संभव
स्किन ग्रेनोलोमा :  लोवर लिप, टंग, नाक, कान छिदवाने वाले स्थान पर पिंपल बन जाता है, जिससे दर्द भी होता है। कुछ दिनों बाद बड़ा होकर यह निशान छोड़ जाता है, जिसे आपरेशन से ही निकाला जा सकता है।

किलायड : स्किन पर बहुत बड़ा फोड़ा हो जाता है। धीरे-धीरे चमड़ी के गुच्छे बन जाते हैं। यदि इसकी अनदेखी की गई तो कभी-कभी यह टेबल टेनिस के गेंद की आकार का हो जाता है।

स्किन इनफेक्शन : यदि लोवर लिप, जीभ, नाक, कान को साफ नहीं रखा गया तो पस बनने, पानी वाले छाले होने का भी खतरा रहता है।

स्किन छिदवाते समय रखें खास ध्यान
जिन दुकानदारों के पास लाइसेंस हो, वहीं कान, नाक, लोवर लिप, टंग, कान के साफ्ट पार्ट छिदवाएं। यह भी ध्यान रखें कि पुरानी निडिल का उपयोग तो नहीं किया जा रहा है।


आईब्रो के पास तो बिल्कुल न छिदवाएं। आइब्रोज के पास छोटी नसें होती हैं, जो डैमेज हो सकती हैं।

इंफेक्शन से बचें
स्किन स्पेशलिस्ट के अनुसार कान, नाक या शरीर के अन्य साफ्ट पार्ट छिदवाने के एक साल तक रक्तदान नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका इनफेक्शन छह माह बाद भी सामने आ सकता है।

रक्तदान के समय यदि किसी व्यक्ति को इनफेक्शन है तो वह दूसरे को भी इफेक्शन दे सकता है।


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