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Chandigarh News: पंजाब लोक भवन में राजस्थान और ओडिशा के स्थापना दिवस समारोह पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
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चंडीगढ़। राजस्थान और ओडिशा के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को पंजाब लोक भवन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया अपनी धर्मपत्नी अनीता कटारिया के साथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उन्होंने दोनों राज्यों के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजस्थान अपनी वीरता और साहस के लिए जाना जाता है, जबकि ओडिशा भक्ति और आध्यात्मिकता के लिए प्रसिद्ध है। दोनों मिलकर भारत की साझा पहचान को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बेहतर समझ और एकता को बढ़ावा देती है।
राजस्थान की प्रस्तुति में गीतांजलि खंडेलवाल आईपीएस का संबोधन शामिल था, जिसके बाद पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर आधारित डेजर्ट सिंफनी पेश की गई। आंगी गैर, भवाल, कथक, सहारिया स्वांग, घूमर और कालबेलिया जैसे लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों ने राज्य की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। ओडिशा की प्रस्तुति में डॉ. आर के राठू का संबोधन, सांबलपुरी लोक नृत्य की उत्साहपूर्ण प्रस्तुति के अलावा शनि धनुक द्वारा राज्यपाल का लाइव पोर्ट्रेट चित्रण शामिल था। इन प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता की भावना को उजागर किया।
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उन्होंने दोनों राज्यों के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजस्थान अपनी वीरता और साहस के लिए जाना जाता है, जबकि ओडिशा भक्ति और आध्यात्मिकता के लिए प्रसिद्ध है। दोनों मिलकर भारत की साझा पहचान को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बेहतर समझ और एकता को बढ़ावा देती है।
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राजस्थान की प्रस्तुति में गीतांजलि खंडेलवाल आईपीएस का संबोधन शामिल था, जिसके बाद पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर आधारित डेजर्ट सिंफनी पेश की गई। आंगी गैर, भवाल, कथक, सहारिया स्वांग, घूमर और कालबेलिया जैसे लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों ने राज्य की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। ओडिशा की प्रस्तुति में डॉ. आर के राठू का संबोधन, सांबलपुरी लोक नृत्य की उत्साहपूर्ण प्रस्तुति के अलावा शनि धनुक द्वारा राज्यपाल का लाइव पोर्ट्रेट चित्रण शामिल था। इन प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता की भावना को उजागर किया।
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