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नजर बनेगी सहारा: अब आंखों की हलचल से चलेगा कंप्यूटर, बिना हाथ-पैर भी आसानी से कंट्रोल; दिव्यांगों को नई आजादी
Fri, 03 Apr 2026 01:24 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:24 PM IST
सार
अब आंखों की हलचल से कंप्यूटर चलेगा। बिना हाथ-पैर भी आसानी से कंट्रोल होगा। सीएसआईओ ने आविष्कार किया है। डॉ. अमित लाडी की टीम ने तकनीक विकसित की है। गेज तकनीक से दिव्यांगों को नई आजादी मिली है।
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सीएसआईओ का आविष्कार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दिव्यांगजनों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में सीएसआईओ ने एक बड़ा कदम उठाया है। यहां विकसित की गई नई आई-गेज तकनीक उन लोगों के लिए उम्मीद बनकर सामने आई है जो हाथ-पैरों से असमर्थ होने के कारण दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
इस तकनीक की मदद से अब केवल आंखों की हलचल से कंप्यूटर चलाना, संदेश लिखना, अपनी बात व्यक्त करना और उपकरणों को नियंत्रित करना संभव हो गया है।
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक डॉ. अमित लाडी और उनकी टीम ने इस प्रणाली को इस तरह तैयार किया है कि यह रोजमर्रा की परिस्थितियों में भी आसानी से काम कर सके। रोशनी में बदलाव या सिर की हल्की हरकत के बावजूद यह तकनीक प्रभावी ढंग से काम करती है।
पहले सीएसआईओ द्वारा उंगली और सिर के इशारों से चलने वाली स्मार्ट व्हीलचेयर विकसित की गई थी, लेकिन अब यह तकनीक उससे एक कदम आगे बढ़ चुकी है।
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इस तकनीक की मदद से अब केवल आंखों की हलचल से कंप्यूटर चलाना, संदेश लिखना, अपनी बात व्यक्त करना और उपकरणों को नियंत्रित करना संभव हो गया है।
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक डॉ. अमित लाडी और उनकी टीम ने इस प्रणाली को इस तरह तैयार किया है कि यह रोजमर्रा की परिस्थितियों में भी आसानी से काम कर सके। रोशनी में बदलाव या सिर की हल्की हरकत के बावजूद यह तकनीक प्रभावी ढंग से काम करती है।
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पहले सीएसआईओ द्वारा उंगली और सिर के इशारों से चलने वाली स्मार्ट व्हीलचेयर विकसित की गई थी, लेकिन अब यह तकनीक उससे एक कदम आगे बढ़ चुकी है।
महंगे उपकरणों पर आधारित नहीं है सिस्टम
नई प्रणाली में आंखों के साथ-साथ सिर की हलचल, पलक झपकाना और चेहरे के भावों को भी शामिल किया गया है, जिससे पूरी तरह हैंड्स-फ्री कंट्रोल संभव हो गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिस्टम महंगे उपकरणों पर आधारित नहीं है बल्कि सामान्य वेबकैम के जरिये ही काम करता है।
नई प्रणाली में आंखों के साथ-साथ सिर की हलचल, पलक झपकाना और चेहरे के भावों को भी शामिल किया गया है, जिससे पूरी तरह हैंड्स-फ्री कंट्रोल संभव हो गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिस्टम महंगे उपकरणों पर आधारित नहीं है बल्कि सामान्य वेबकैम के जरिये ही काम करता है।
इससे इसकी लागत कम रहती है और यह तकनीक अधिक लोगों तक आसानी से पहुंच सकती है। यह सॉफ्टवेयर लैपटॉप और डेस्कटॉप पर आसानी से चलाया जा सकता है, जिसके लिए किसी विशेष सेटअप की जरूरत नहीं होती। यही कारण है कि इसे घरों, पुनर्वास केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपयोगी माना जा रहा है।
भविष्य को ध्यान में रखते हुए सीएसआईओ अब ऑगमेंटेटिव एंड अल्टरनेटिव कम्युनिकेशन (एएसी) प्लेटफॉर्म और ऐसे स्मार्ट सिस्टम पर काम कर रहा है जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षित रूप से संचालित हो सकें। इसमें सेंसर आधारित ऑटोमैटिक व्हीलचेयर और बाधा पहचानने वाली तकनीक भी शामिल होगी।
इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. अमित लाडी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्हें सीएसआईआर यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।
इनके लिए वरदान साबित
यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो अब वे सिर्फ आंखों के सहारे अपनी बात कह सकेंगे, पढ़-लिख सकेंगे और डिजिटल दुनिया से जुड़ सकेंगे।
यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो अब वे सिर्फ आंखों के सहारे अपनी बात कह सकेंगे, पढ़-लिख सकेंगे और डिजिटल दुनिया से जुड़ सकेंगे।
तकनीकी खासियत
- गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले लोग कप्यूटर पर कर सकते हैं टाइप
- स्क्रीन या आवाज के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं अपनी बात
- स्मार्ट डिवाइस और व्हीलचेयर को कर सकते हैं नियंत्रित