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Chandigarh News: क्राॅस सब्सिडी का फॉर्मूला जन्मजात हृदय रोग का इलाज करेगा आसान

Tue, 29 Aug 2023 02:23 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Aug 2023 02:23 AM IST
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Cross subsidy formula will make treatment of congenital heart disease easier
चंडीगढ़। जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त बच्चों को समुचित इलाज न मिलने का एक मुख्य कारण पैसे की कमी है। जिन बच्चों को सर्जरी के चंद दिनों बाद ही आईसीयू से छुट्टी मिल जाती है, उनके इलाज पर ज्यादा पैसे खर्च नहीं होते। लेकिन गंभीर स्थिति वाले बच्चों को एक महीने तक भी आईसीयू में रखना पड़ता है। ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाला पैसा उसके इलाज पर कम पड़ता है जिससे उसका इलाज बीच में ही बंद कर दिया जाता है या फिर निजी अस्पताल ऐसे बच्चों को भर्ती नहीं करते। इस स्थिति से बचाव के लिए देश में एम्स दिल्ली के पैकेज मॉडल को लागू करना चाहिए जिससे जल्दी ठीक होने वाले बच्चे के इलाज से जुड़ी चीजों को क्रास सब्सिडी के जरिए देरी से ठीक होने वाले बच्चों में उपयोग किया जा सके। यह बातें पीजीआई में पिछले दिनों सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक कार्डियक क्रिटिकल केयर के सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहीं। सम्मेलन में आए यूटी साउथ वेस्टर्न मेडिकल सेंटर यूएस के एक्स-विवो लंग परफ्यूजन के सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. जॉन म्यूरल का कहना था कि ऐसा कर एम्स ने आयुष्मान भारत योजना शुरू होने से पहले ही 42 करोड़ रुपये का बचत कर लिया था, जो वह गंभीर बच्चों के इलाज पर खर्च कर रहा है। वहीं, उन्होंने इस मर्ज के इलाज के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए निजी अस्पतालों को जोड़ने पर बल दिया क्योंकि पीडियाट्रिक हॉस्पिटल का अपने स्तर पर संचालन बेहद कठिन है। उसका अत्याधुनिक सेटअप, विशेषज्ञों और पैरामेडिकल की मजबूत टीम अकेले बल पर संभव नहीं है।
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वयस्कों से मिल रहे प्राॅफिट को बच्चों पर किया जाए खर्च
सम्मेलन में शामिल बर्मिंघम चिल्ड्रेन सोसाइटी के डॉ. सेबी सेबस्टियन ने वयस्कों में हो रहे हृदय संबंधी सर्जरी से मिलने वाले प्राॅफिट को बच्चों के हृदय रोग के इलाज में लगाया जाने पर बल दिया। उनका कहना था कि बच्चों की सर्जरी की जटिलता के कारण ही देश में आयुष्मान भारत और जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत 315 अस्पताल पंजीकृत, लेकिन महज 15 ही कर क्लैम कर रहे हैं। इससे साफ पता चल रहा है कि निजी अस्पताल बच्चों के इलाज से बच रहे हैं। सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि देश में लगभग 250 डेडिकेटेड पीडियाट्रिक हार्ट सेंटर की जरूरत लेकिन 25 ही उपलब्ध हैं। ठीक इसी तरह देश में 20 हजार पीडियाट्रिक सर्जन की जरूरत, लेकिन उपलब्धता महज 100 की है।
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