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पंजाबः लुधियाना में राधे मां की मुश्किलें बढ़ीं

Sun, 23 Aug 2015 06:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना Updated Sun, 23 Aug 2015 06:03 PM IST
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criminal case filed against radhe maa in ludhiana

मित्तल ने बताया कि इसका पता चलने पर राधे मां ने उन पर दबाव बनाने और रिश्वत देने की कोशिश की। नौ अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल 2015 के अंतराल में राधे मां, उसकी बहन राजिंदर कौर, कथित छोटी मां और मेघा के रात को उनके मोबाइल पर फोन आने शुरू हो गए।

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एक दिन उनको 98764-05171 नंबर से फोन आया। फोन करने वाली ने अपना परिचय राधे मां के तौर पर दिया और उन्हें पैसे लेने को कहा। अलग-अलग नंबरों से आए फोन से उसके साथ प्यार की बातें की गई। उनसे कहा गया कि वह उससे प्रेम करती हैं।
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उनके न मानने पर राधे मां ने उनको श्राप तक देने की बात कही। इसकी सीडी उन्होंने सबूत के तौर पर शिकायत के साथ लगाई है। इस अलावा उसको वाट्सऐप पर मैसेज भी भेजे गए। मित्तल ने कहा कि जब कोई दांव नहीं चला तो संजीव गुप्ता ने मैसेज भेज कर उनको धमकाने का प्रयास किया।
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मित्तल ने मांग की कि राधे मां, रज्जी मौसी, छोटी मां, मेघा सिंह और संजीव गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए और इनकी आवाजों का सैंपल लेकर दी गई सीडी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए। मित्तल ने साफ किया कि अगर उनको कोई नुकसान पहुंचा तो सभी आरोपी इसके जिम्मेदार होंगे।

आस्था के नाम पर ठगने, अश्लीलता फैलाने के आरोप

criminal case filed against radhe maa in ludhiana

राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर के खिलाफ एसएसपी कपूरथला को शिकायत दी गई है। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरिंदर मित्तल ने राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर और उसके परिवार वालों पर कई गंभीर आरोप जड़े हैं।

मित्तल ने राधे मां समेत, उनकी बहन राजिंदर कौर उर्फ रज्जी मासी, सेवादार रितु सरीन उर्फ छोटी मां, राधे मां की बहू मेघा सिंह और उनके एड एजेंट संजीव गुप्ता के खिलाफ आस्था के नाम पर ठगने, अश्लीलता फैलाने, हिंदू धर्म की आस्था से खिलवाड़ करने के आरोप लगाए हैं। एसएसपी राजिंदर सिंह ने मामले की जांच के आदेश एसपी (जांच) से करवाए जाने और बनती कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

मित्तल ने बताया कि 2002 में फगवाड़ा में राधे मां ने एक जागरण के दौरान खुद को मां जगदंबे का अवतार बताकर हिंदू धर्म का अपमान करने का प्रयास किया था। इसका उन्होंने विरोध किया था। दूसरे दिन भारी विरोध और पथराव हुआ।

बाद में एसडीएम अमरजीत पाल के दखल के बाद राधे मां ने कभी फगवाड़ा न आने और खुद में कोई शक्ति न होने की बात कहकर माफी मांगी थी। इसकी रिकार्डिंग उनके पास है। मित्तल ने बताया कि निक्की गुप्ता, जिसने अपने ससुरालवालों समेत राधे मां पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था, उनके संपर्क में आई और उनसे सहायता मांगी।

लुधियाना में अपराधिक मामला दर्ज हुआ

criminal case filed against radhe maa in ludhiana

खुद को दुर्गा का अवतार कहने वाली राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब उनके खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज हुआ है।

मामला दो हिन्दुओं की शिकायत पर पंजाब के लुधियाना में दर्ज हुआ। इन दो लोगों के नाम अश्विनी कुमार और धीरज शर्मा बताए जा रहे हैं। इन्होंने राधे मां पर मां दुर्गा का अपमान करने का आरोप लगाया है।

हालांकि मामला शुक्रवार को दर्ज हो गया था, लेकिन सामने अब आया। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राजीव कुमार ने मामले को सुनवाई के लिए आगे भेज दिया।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि खुद को मां दुर्गा बताते हुए वेस्टर्न ड्रेस में मॉल में फोटो खिंचवाकर उन्होंने धार्मिक भावनाएं आहत की हैं। इस संबंध में हमने लिखित शिकायत दी थी।

खुद को मां दुर्गा के वेश में चित्रित करने पर मांगनी पड़ी थी माफी

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मारपीट, दहेज के आरोपों और अपने पहरावों को लेकर सुर्खियों में छाई ‘राधे मां’ के लिए विवादों में रहना कोई नई बात नहीं है। तीन साल पहले महामंडलेश्वर की पदवी को लेकर सुर्खियों में रही राधे मां का नाम इससे पहले भी कई बार विवादों में आ चुका है।

महामंडलेश्वर की पदवी पर विवादों के बाद अंत में अखाड़ा परिषद ने धार्मिक स्थिति और पृष्ठभूमि में एक लंबी जांच के बाद वापस ले लिया गया।

राधे मां अपने सत्संग के दौरान खुद को देवी दुर्गा की एक अवतार के तौर पर चित्रित करने के लिए वैसा ही वेश बनाती थी। इस पर विरोध के स्वर तेज होने लगे। 2003-04 में फगवाड़ा में एक हिंदू संगठन ने देवी दुर्गा की अवतार के रूप में राधे मां के चित्रण पर आपत्ति जताई और आंदोलन छेड़ा तो राधे मां को पर माफी मांगनी पड़ी थी।

महामंडलेश्वर की पदवी को लेकर भी रहीं थी सुर्खियों में

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दो अगस्त, 2012 को जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधशानंद गिरी जी ने गुरु पूर्णिमा पर अनुष्ठानों के बीच राधे मां को महामंडलेश्वर की पदवी दी। इस अलंकरण समारोह को गुप्त रखा गया था और अखाड़े के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, महामंडलेश्वर पदवी मिलने के अगले ही दिन राधे मां मुंबई चली गई थीं। इसके बाद उन्हें पदवी दिए जाने पर कई सवाल उठे।

जांच के लिए राधे मां के आध्यात्मिक गुरु स्वामी पंचनद के नेतृत्व में एक 11 सदस्यीय जांच समिति बनी। समिति ने राधे मां के जीवन से जुड़े विभिन्न स्थानों पर जाकर जांच की। इसके बाद उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी से निलंबित कर दिया गया था। द्वारिकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद  सरस्वती ने राधे मां को नासिक कुंभ मेले में औपचारिक ‘शाही स्नान’ में हिस्सा लेने से रोका।

23 साल की उम्र में सुखविंदर बन गई थीं ‘राधे मां’

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राधे मां उर्फ गुड़िया उर्फ सुखविंदर कौर का जन्म 1964 में गांव दोरांगला (गुरदासपुर) में हुआ था। जब सुखविंदर कौर 17 साल की थी तो उनका विवाह करम सिंह हलवाई के बेटे मोहन सिंह के साथ हो गया। मोहन सिंह ने कुछ समय मिठाई की दुकान की और फिर दोहा कतर चला गया। पति का विदेश जाना सुखविंदर कौर के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

इस दौरान उसने कपड़े भी सिले और जल्द ही अध्यात्म की दिशा में मुड़ गई। 23 साल की उम्र में सुखविंदर मुकेरियां में डेरा परमहंस बाग के महंत रामाधीन दास की शिष्या बन गई। महंत ने उसे आध्यात्मिक दीक्षा दी और ‘राधे मां’ के रूप में नया नाम दिया। इसके बाद वह सत्संग करने लगी और खानपुर में मां भगवती मंदिर राधे मां का आध्यात्मिक केंद्र बन गया। लोग कहते हैं कि इस तरह के सत्संग के दौरान वह अपने भक्तों को वरदान देती थी जिससे उनके संकट दूर रहते थे।

भक्त राधे मां को मुंबई ले गया

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ऐसा ही एक आशीर्वाद राधे मां ने मुंबई के एक भक्त को दिया और उसका कोई गंभीर मसला हल हो गया। वही भक्त राधे मां को मुंबई ले गया। इसके बाद वह नियमित रूप से मुकेरियां आती रहीं।

बाद में वह मुंबई में अपनी आध्यात्मिक बैठकों में व्यस्त हो गई और पति और दो बेटों के साथ मुंबई में ही रहना शुरू कर दिया। तब से राधे मां का मुकेरियां आना कम हो गया। अंतिम बार वह पिछले साल राम नवमी पर मुकेरियां आई थीं।

आध्यात्मिकता पर पारिवारिक रंग
मुकेरियां के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर खानपुर में राधे मां का आध्यात्मिक निवास मां भगवती मंदिर है। मंदिर में उनकी बहन अपने परिवार के साथ रहती हैं और मंदिर की देखरेख करती हैं। भक्तों के बीच सुखविंदर कौर के पति को पिता का दर्जा मिला हुआ है और उन्हें ‘डैडी जी’ कहा जाता है। राधे की बहन को भक्त ‘रज्जी मासी’ और उनके पति को ‘मासड़ जी’ कह कर संबोधित करते हैं।

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