{"_id":"583dd4ef4f1c1b2d1ede64df","slug":"world-class-city-cloud-cover-cyber-crime-mohali-city","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"वर्ल्ड क्लास सिटी में छाए साइबर क्राइम के बादल, जानिए कैसे?","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
वर्ल्ड क्लास सिटी में छाए साइबर क्राइम के बादल, जानिए कैसे?
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Wed, 30 Nov 2016 12:50 AM IST
विज्ञापन
साइबर क्राइम
- फोटो : Demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्ल्ड क्लास सिटी के लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। लोगों के खून-पसीने की कमाई कभी मुंबई तो कभी नोएडा में निकाली जा रही हैं। ठगों के शिकार लोग कभी पुलिस स्टेशन तो कभी साइबर क्राइम थाने के चक्कर काटते हैं, लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं होती। सबसे ज्यादा यह फ्रॉड एटीएम और क्रेडिट कार्ड का नंबर पूछने के बहाने होते हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो शहर में हर हफ्ते इस तरह के दो से तीन मामले सामने आ रहे हैं। इसके बाद भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। माहिरों की मानें तो इससे बचा जा सकता है।
केस नंबर-1
सेक्टर-69 निवासी सुरजीत सिंह का कहना है कि कुछ दिन पहले उनके फोन पर मैसेज आया कि आपके खाते से 24000 रुपये निकाले गए हैं। इसके बाद वह बैंक गए। उन्होंने बताया जब तक उनका खाता सील होता, तब तक पांच हजार और निकाल लिए गए। इसके बाद उन्होंने मटोर थाने में जाकर शिकायत दी। साथ ही वह नंबर भी दिया, लेकिन अब तक उनके पैसे का कोई पता नहीं है और न ही आरोपी पकड़ में आया है। उनके खाते से 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद पैसे निकाले गए हैं।
केस नंबर - 2
दूसरा मामला गांव झंजेड़ी निवासी रुस्तम अलि का है। रुस्तम ने आरोप लगाया कि एक नेशनल बैंक के मुलाजिमों की मिलीभगत से उनके खाते से 11 माह पहले पैसे निकाल लिए गए थे। इस संबंध में उन्होंने बलौंगी थाने में शिकायत दी थी। उनका कहना है कि मामले में केस तो दर्ज हो गया था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। न तो उन्हें पैसे वापस मिले और न ही आरोपी पकड़े गए हैं। वह थाने के चक्कर लगाकर हार गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
केस नंबर-1
सेक्टर-69 निवासी सुरजीत सिंह का कहना है कि कुछ दिन पहले उनके फोन पर मैसेज आया कि आपके खाते से 24000 रुपये निकाले गए हैं। इसके बाद वह बैंक गए। उन्होंने बताया जब तक उनका खाता सील होता, तब तक पांच हजार और निकाल लिए गए। इसके बाद उन्होंने मटोर थाने में जाकर शिकायत दी। साथ ही वह नंबर भी दिया, लेकिन अब तक उनके पैसे का कोई पता नहीं है और न ही आरोपी पकड़ में आया है। उनके खाते से 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद पैसे निकाले गए हैं।
विज्ञापन
केस नंबर - 2
दूसरा मामला गांव झंजेड़ी निवासी रुस्तम अलि का है। रुस्तम ने आरोप लगाया कि एक नेशनल बैंक के मुलाजिमों की मिलीभगत से उनके खाते से 11 माह पहले पैसे निकाल लिए गए थे। इस संबंध में उन्होंने बलौंगी थाने में शिकायत दी थी। उनका कहना है कि मामले में केस तो दर्ज हो गया था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। न तो उन्हें पैसे वापस मिले और न ही आरोपी पकड़े गए हैं। वह थाने के चक्कर लगाकर हार गए हैं।
विज्ञापन
लोग खा रहे थानों के धक्के, ठग पुलिस की पकड़ से बाहर
केस नंबर -3
फेज-5 निवासी अभिषेक ने बताया कि उनकी कंपनी की वेबसाइट एक युवक ने हैक कर ली थी। इसके बाद उससे सारा डाटा चोरी कर लिया। इसके बाद डाटा को डिलीट कर दिया। उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दी है, लेकिन आरोपी अब तक पकड़ा नहीं गया है।
ऐसे बचें फ्रॉड से
बैंकों की शाखाओं पर लगे एटीएम में ही अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करें। हर दो-तीन महीने में अपने कार्ड का पिन नंबर बदलते रहें। कहीं भी कार्ड स्वाइप करते समय कोई गड़बड़ी लगे तो वहां स्वाइप न करें। ज्यादातर शॉपिंग करते समय ओटीपी (वन टाइप पासवर्ड) का इस्तेमाल करें। कार्ड ट्रांजेक्शन के लिए एसएमएस अलर्ट की सर्विस जरूर लें। नियमित तौर पर अपने खाते का स्टेटस जानते रहें। अपने मोबाइल में बैंक के फोन नंबर जरूर रखें। ताकि जरूरत पड़ने पर ढूंढने की जरूरत न पड़े। अपने पैसों को अलग-अलग अकाउंट में रखें तो जालसाजों के हाथ में जाने से बचा जा सकता है।
लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा
डीएसपी गगनदीप सिंह भुल्लर ने माना कि आनलाइन व एटीएम से होने वाले फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे क्राइम से बचने के लिए लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि लोगों को ऐसे ठगों का शिकार होने से बचाने के लिए पुलिस तत्पर है। जल्द ही सीनियर अफसरों के साथ मीटिंग कर जागरूकता मुहिम चलाई जाएगी।
फेज-5 निवासी अभिषेक ने बताया कि उनकी कंपनी की वेबसाइट एक युवक ने हैक कर ली थी। इसके बाद उससे सारा डाटा चोरी कर लिया। इसके बाद डाटा को डिलीट कर दिया। उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दी है, लेकिन आरोपी अब तक पकड़ा नहीं गया है।
ऐसे बचें फ्रॉड से
बैंकों की शाखाओं पर लगे एटीएम में ही अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करें। हर दो-तीन महीने में अपने कार्ड का पिन नंबर बदलते रहें। कहीं भी कार्ड स्वाइप करते समय कोई गड़बड़ी लगे तो वहां स्वाइप न करें। ज्यादातर शॉपिंग करते समय ओटीपी (वन टाइप पासवर्ड) का इस्तेमाल करें। कार्ड ट्रांजेक्शन के लिए एसएमएस अलर्ट की सर्विस जरूर लें। नियमित तौर पर अपने खाते का स्टेटस जानते रहें। अपने मोबाइल में बैंक के फोन नंबर जरूर रखें। ताकि जरूरत पड़ने पर ढूंढने की जरूरत न पड़े। अपने पैसों को अलग-अलग अकाउंट में रखें तो जालसाजों के हाथ में जाने से बचा जा सकता है।
लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा
डीएसपी गगनदीप सिंह भुल्लर ने माना कि आनलाइन व एटीएम से होने वाले फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे क्राइम से बचने के लिए लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि लोगों को ऐसे ठगों का शिकार होने से बचाने के लिए पुलिस तत्पर है। जल्द ही सीनियर अफसरों के साथ मीटिंग कर जागरूकता मुहिम चलाई जाएगी।