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चपरासी बोला-मैं तो सात हजार ही लूंगा... फिर देखिए क्या हुआ

Thu, 27 Apr 2017 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली Updated Thu, 27 Apr 2017 11:47 PM IST
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superintendent and peon arrested while taking bribe
गमाडा सुपरिंटेंडेंट और चपरासी रिश्वल लेते गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने गमाडा के एस्टेट आफिस के सुपरिंटेंडेंट और चपरासी को 35 हजार रिश्वत लेते आफिस से रंगे हाथ काबू कर लिया। उद्योगपति नसीब सिंह संधू से मकान की एनओसी जारी करने के बदले आरोपी रिश्वत की मांग कर रहे थे। आरोपियों की पहचान सुपरिंटेंडेंट नरिंदर पाल सिंह और करम सिंह दर्जा चार मुलाजिम के रूप में हुई। विजिलेंस ने इस संबंध में गमाडा के उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी है।
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विजिलेंस ने आरोपियों पर भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। आरोपी को शुक्रवार को अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं, गमाडा ने दोनों मुलाजिमों को सस्पेंड करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। सेक्टर-66 निवासी नसीब सिंह संधू ने बताया कि उनका एक मकान सेक्टर-78 में है। उसको बेचने के लिए उन्होंने एनओसी के लिए 17 अप्रैल को अप्लाई किया था। लेकिन आरोपी अधिकारी कोई काम नहीं कर रहे थे।
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बल्कि कोई न कोई आब्जेक्शन लगाकर उसका काम अटका रहे थे। आरोप है कि उन्होंने मांग की थी कि वह उसे 50 हजार रुपये दे। इसके बाद उसका काम हो जाएगा। हालांकि, बाद में 35 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। वीरवार को अधिकारी ने उन्हें एनओसी लेने के लिए बुलाया। इस दौरान विजिलेंस का एक अधिकारी उनके साथ सहयोगी बनकर गया। साथ ही रिश्वत लेते उसे रंगे हाथों काबू कर लिया।
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जल्द आ जाओ, मुझे केस के मामले में अदालत जाना है

superintendent and peon arrested while taking bribe
गमाडा सुपरिंटेंडेंट और चपरासी रिश्वल लेते गिरफ्तार

दर्जा चार मुलाजिम ने शुरू की थी ढील
नसीब सिंह ने बताया कि जब वह 17 अप्रैल को गमाडा गए तो वहां पर उसकी मुलाकात दर्जा चार मुलाजिम करम सिंह से हुई। उसने उसे कहा कि उनका काम वह जल्द करवा देगा। इसके लिए उसे सात हजार रुपये देने होंगे। इसके बाद करम सिंह ने सुपरिंटेंडेंट से उसकी मुलाकात करवाई। सुपरिंटेंडेंट ने कहा कि काम काफी उलझा हुआ है। फाइल में कई खामियां हैं।

ऐसेे में उसने कहा कि बीस हजार, फिर पैंतीस और बाद में पचास की मांग करनेे लगा। हालांकि उनकी फाइल में कोई खामी नहीं थी। इसके बाद उन्होंने इस संबंध में विजिलेंस को शिकायत दी। साथ ही पूरी प्लानिंग से ट्रैप लगाया।


शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपियों के पास एनओसी लेने के लिए बुधवार को भी गए थे। लेकिन बात नहीं बन पाई थी। इसके बाद वीरवार सुबह ही उसे आरोपी का फोन आ गया था और कहा कि जल्द आ जाओ। उसे अदालत जाना है। इसके बाद वह जल्द ही वहां से सीधे विजिलेंस आफिस पहुंचा। साथ ही टीम को साथ लेकर गमाडा पहुंचा।


विजिलेंस की टीम व उद्योगपति पूरी प्लानिंग से गमाडा स्थित सुपरिंटेंडेंट के रूम में पहुंचे। इस दौरान सुपरिंटेंडेट के पास कुछ लोग बैठे हुए थे। इसके बाद वह उसे उसके पीछे वाले कमरे ले गए। विजिलेंस की टीम भी उनके साथ थी। इस दौरान 30 हजार रुपये सुपरिंटेंडेंट को दिए। उन्होंने सीधे पीछे वाली जेब में डाल लिए, जबकि पांच हजार उन्होंने चपरासी को दिए। चपरासी ने आगे वाली जेब में पैसे डाले।

चपरासी ने उनसे पूछा कि कितने पैसे हैं। उन्होंने उसे कहा कि पांच हजार रुपये हैं। चपरासी बोला मैं तो सात हजार की लूंगा। इसी बीच सुपरिंटेंडेंट ने उसे शांत किया। इसके बाद विजिलेंस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूरी कार्रवाई कैमरे में कैद, ईओ को दी जानकारी
यह पूरी कार्रवाई विजिलेंस के कैमरे में कैद की गई है। वहीं, केस कहीं कमजोर न पड़ जाए, इसके लिए पीडब्ल्यूडी के दो एसडीओ को शामिल किया गया था। कार्रवाई करने के बाद विजिलेंस ने इस संबंध में गमाडा की ईओ को बुलाकर जानकारी दी।
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