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सेक्टर 26 हादसा: 2 विभागों के अधिकारी सवालों के घेरे में

Wed, 30 Dec 2015 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 30 Dec 2015 09:13 AM IST
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sector 26 incident: doubts on 2 departments of administration

सेक्टर-26 में सोमवार को जिस जगह बेसमेंट के लिए हो रही खुदाई के दौरान छह लोगों की मौत हुई थी, उस जगह पर निर्माण की मंजूरी के लिए कभी आवेदन तक नहीं किया गया।

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अपनी मर्जी से ही बेसमेंट के लिए खुदाई शुरू कर दी गई। एस्टेट ऑफिस की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। हद की बात तो यह है कि इसके साथ लगती साइट पर तो अवैध तरीके से बेसमेंट और उसके ऊपर भी निर्माण किया जा चुका है। गनीमत यह रही कि वाइन शॉप की तरह वह बेसमेंट नहीं ढही।
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हालांकि इस साइट की अप्रूवल के लिए बिल्डिंग ब्रांच को आवेदन किया गया था लेकिन अप्रूवल नहीं मिली। बिल्डिंग ब्रांच ने मंगलवार को जांच के बाद अपनी रिपोर्ट एडीसी कशिश मित्तल और एसडीएम ईस्ट तपस्या राघव को सौंप दी है। बुधवार को डीसी की मौजूदगी में इस पर कार्रवाई तय होगी।
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वहीं मामले में बिल्डिंग ब्रांच सेक्टर-26 एरिया के जेई और एसडीओ भी सवालों के घेरे में हैं। आखिर इन अवैध दुकानों का निर्माण उनकी नजर में क्यों नहीं आया। बिना अप्रूवल ही शॉप नंबर-87 की बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर इतने दिनों से बना हुआ है। उसी की तर्ज पर अब शॉप नंबर-88 का निर्माण भी शुरू हुआ था।

यदि यह हादसा न होता तो यह शॉप भी बिना मंजूरी के बनकर तैयार हो जाती। इसके साथ ही नगर निगम ने भी ऑक्शन के बाद जगह की सुध नहीं ली। जबकि एमसी के अधिकारियों को भी इंस्पेक्शन करनी होती है।

दरअसल नगर निगम ने अपनी इन 4 बे-शॉप की ऑक्शन 2007 में की थी। ऑक्शन के बाद 2010 में इस पर ग्राउंड फ्लोर निर्माण की परमिशन दी गई। इन बे-शॉप केनंबर-87 से 90 तक हैं। शॉप नंबर-89 पर वाइन शॉप बनी थी और 88 पर बेसमेंट खुदाई चल रही थी। इसी कारण वाइन शॉप ढही।

एस्टेट ऑफिस ने इन शॉप को सील करने के लिए नगर निगम को चिट्ठी लिख दी है। बताया जा रहा है कि यदि नगर निगम तुरंत प्रभाव से इन्हें सील नहीं करता है तो नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत सुओमोटो (स्वत: संज्ञान) लेते हुए एस्टेट ऑफिस इन्हें खुद सील करेगा।

शॉप में खेल: शॉप नंबर-87
सबसे पहली शॉप नंबर-87 पर परमिशन नहीं होने के बावजूद बेसमेंट और फिर उसके ऊपर निर्माण कर दुकान बनाई जा चुकी है। अप्रूवल के लिए बिल्डिंग ब्रांच को एप्लीकेशन जरूर दी गई थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई थी। उसके बाद भी मनमर्जी से निर्माण कर लिया गया।

शॉप नंबर-88
शॉप नंबर-88 के मालिक जीवन लाल ने तो हद ही कर दी। उन्होंने तो कभी बिल्डिंग प्लान के लिए कभी बिल्डिंग ब्रांच को आवेदन तक नहीं किया। कांट्रैक्टर अशोक कुमार को ठेका देकर मनमर्जी से ही निर्माण के लिए बेसमेंट खुदाई का काम शुरू करवा दिया। सवाल कांट्रैक्टर पर भी उठता है आखिर उसने बिना बिल्डिंग प्लान देखे काम कैसे शुरू करवा दिया।


शॉप नंबर-89
शॉप नंबर-89 के ग्राउंड फ्लोर पर वाइन शॉप बनी थी। इसमें बेसमेंट नहीं है। इसका प्लान भी मंजूर करवाया गया है। शॉप नंबर-90 की साइट अभी खाली पड़ी है।

एस्टेट ऑफिस की टीम ने की इंस्पेक्शन
इस हादसे के बाद मंगलवार को एस्टेट ऑफिस की टीम ने घटना स्थल का मुआयना किया। अधिकारियों के अनुसार शॉप नंबर-87 के ढहने का खतरा भी बना हुआ है। एक तो यह बनी अवैध है, ऊपर से इसका निर्माण भी मानकों के हिसाब से नहीं हुआ है।

यह है बेसमेंट बनाने का नियम
जहां बेसमेंट बनानी होती है उस जगह का फ्रंट कम से कम 25 फुट का होना जरूरी है। साथ ही साइड में खुदाई के लिए 8 फुट जगह छोड़नी होती है।

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