सतलोक आश्रम का एक और काला सच आया सामने
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संत रामपाल के हिसार स्थित सतलोक आश्रम की ओर से न्यायपालिका से खिलवाड़ का एक और मामला सामने आया है। आश्रम की ओर से धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने के मामले में रामपाल को भगोड़ा करार दिए जाने की अदालती कार्रवाई में बाधा डालने की एक घटना को गंभीरता से लेते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आश्रम के प्रवक्ता को अवमानना मामले में नोटिस जारी किया है। जस्टिस एम. जियापाल व जस्टिस दर्शन सिंह की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को आश्रम के प्रवक्ता प्रीतम सिंह उर्फ राजकपूर को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ क्यों का अवमानना की कार्रवाई की जाए?
हाईकोर्ट ने लुधियाना सेशन जज की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रीतम सिंह के खिलाफ समराला मामले में अवमानना कार्रवाई शुरू करते हुए उससे जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 16 फरवरी को होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में सीनियर एडवोकेट जेएस बेदी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। वह मंगलवार को बेंच के समक्ष पेश हुए और नोटिस जारी करने की सिफारिश की।
100 से अधिक समर्थक घुसे थे कोर्ट रूम में
घटना 5 जनवरी, 2013 की है, जब समराला में रामपाल व अन्य के खिलाफ धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले में समराला के सिविल जज सुनील भाटिया ने इसी साल 17 फरवरी को रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। रामपाल को 18 मार्च को अदालत में पेश होना था। रामपाल तो नहीं पहुंचे, उल्टे उनके एक सौ से अधिक समर्थक कोर्ट रूम में घुस गए, जिनमें सतलोक आश्रम का प्रवक्ता प्रीतम सिंह भी शामिल था।
सिविल जज को पत्र भेजकर लगाया घूस लेने का आरोप
इस साल 17 फरवरी को कोर्ट रूम में घुसने की घटना के बाद प्रीतम सिंह ने सिविल जज सुनील भाटिया की अदालत को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर न सिर्फ न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की बल्कि सिविल जज पर घूस का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट को एक पत्र भेजा।
इस पर सिविल जज भाटिया ने सेशन जज लुधियाना और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को पत्र भेजकर अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारते हुए आरोपियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई चलाने का आग्रह किया।
इसके बाद हाईकोर्ट ने सेशन जज लुधियाना को सिविल जज भाटिया पर लगे आरोपों के साथ-साथ प्रीतम सिंह द्वारा सिविल जज की अदालत में भेजे पत्र की जांच करने का निर्देश दिया। सेशन जज ने जांच करके हाईकोर्ट को बताया कि सिविल जज भाटिया पर लगे आरोप के बारे में प्रीतम सिंह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका है।
इसके विपरीत उसने जो पत्र रजिस्टर्ड डाक से भेजे थे, वह सीधे तौर पर न्यायपालिका की गरिमा को गिराने वाली कार्रवाई है। इसके साथ ही सेशन जज ने भी रामपाल व प्रीतम सिंह के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की हाईकोर्ट से सिफारिश कर दी।