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मनरेगा के घोटाले में फंसाया, सरपंच ने फंदा लगाया

Mon, 13 Apr 2015 05:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हांसी(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, हांसी(हरियाणा) Updated Mon, 13 Apr 2015 05:13 PM IST
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sarpanch hurt by manrega case, commit suicide

मनरेगा घोटाले में फंसे निलंबित सरपंच ने पंखे पर फंदा लगाकर जान दे दी। घटना हरियाणा के हांसी में घटी। मनरेगा घोटाले में फंसे गंगनखेड़ी के निलंबित सरपंच अजीत जाखड़ ने बृहस्पतिवार रात को पंखे पर फंदा लगाकर जान दे दी।

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मृतक के परिजनों ने पुलिस को एक सुसाइड नोट दिया है, जिसमें गांव के ही कुछ लोगों पर उसे मनरेगा के केस में फंसाने के आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि गांव के ही कुछ लोगों ने झूठे शपथ पत्र देकर उसे मनरेगा में फंसवाया और जेल भिजवा दिया था। सुसाइड नोट में इन लोगों पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया है।
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सदर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। इस संबंध में गंगनखेड़ी के नौ लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया है।
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अजीत जाखड़ के पुत्र अभिषेक जाखड़ ने बताया कि शुक्रवार की तड़के जब वह लघुशंका के लिए उठा तो उसने देखा कि उसका पिता घर के पास बने पशुबाड़े में पंखे से लटका हुआ है। उसने अपनी मां व परिवार के अन्य लोगों को जगाया। इसके बाद उसे नीचे उतारा गया।

मृतक की जेब से एक पर्ची मिली, जिस पर लिखा था कि उसने अपनी पुत्री के स्कूल बैग की कॉपी में एक सुसाइड नोट लिखकर छोड़ा हुआ है। बाद में स्कूल बैग की एक कॉपी से सुसाइड नोट बरामद कर लिया गया।

सुसाइड नोट में लिखा अपना पक्ष

sarpanch hurt by manrega case, commit suicide

मामले की जांच कर रहे सदर थाने के एएसआई कैलाशचंद ने बताया कि पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव उसके परिजनों को सौंप दिया है।

जांच अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने मृतक के पुत्र अभिषेक के बयान पर सुसाइड में नोट में आरोपी ठहराए गए नौ लोगों जुगनू, राजबीर, सूरजभान, इंद्रो, दिलबाग, वजिंद्र, सुखबीर, सुरेश तथा राज के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। मृतक अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री छोड़ गया है।

ये लिखा है सुसाइड नोट में
सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘मैं अजीत सिंह सरपंच अपने होशोहवास में आत्महत्या कर रहा हूं, क्योंकि कुछ लोग मुझे मरने के लिए मजबूर कर रहे हैं। मैं 2010 में गांव का सरपंच चुना गया था तो कुछ लोग मुझे गलत केसों में फंसाना चाहते थे।

उन लोगों ने 4-5 अन्य लोगों के साथ मिलकर मनरेगा स्कीम में यह कहकर ‘हमने गांव में कभी जॉब कार्ड नहीं बनवाया और न ही कभी कार्य किया’ और उन लोगों ने मेरे खिलाफ झूठे शपथ पत्र देकर केस दर्ज करवा दिया, जबकि उन लोगों के जॉब कार्ड से गांव के डाकखाने में खाते खुलवाए हुए हैं और मजदूरी की राशि भी डाकखाना खेड़ीगंगन से प्राप्त की हुई है। शिकायत करने वाले लोग उसे ब्लैकमेल करते आ रहे थे।

कभी 10 लाख में फैसला करने की बात करते तो कभी 15 लाख। इनको पैसे देने के लिए मैंने अपनी जमीन के 4 कीले भी बेच दिए, लेकिन उनकी बार-बार मांग बढ़ती गई।’

शुद्धि देवी हैं गांव की कार्यवाहक सरपंच
मनरेगा मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद सरपंच अजीत सिंह जाखड़ को निलंबित कर दिया गया था। उसके स्थान पर पंचायत सदस्य शुद्धि देवी को सरपंच का कार्यभार दिया गया था।

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