रामपाल ने पहली बार खोला चौंकाने वाला राज
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कल तक अपने आपको ‘भगवान’ और ‘पूर्ण ब्रम्ह’ बताकर हजारों लोगों को प्रवचन सुनाने वाले रामपाल ने सोमवार को कई खुलासे किए। पुलिस की पूछताछ में उसने कहा कि ‘मैं कोई भगवान नहीं हूं..’।
जब उससे सवाल किया गया कि फिर इतने सारे लोग तुम्हारी भाषा क्यों बोलने लगते हैं? तुम उन्हें ऐसा क्या खिलाते हो कि वे तुम्हें ही सब कुछ मानते हैं और तुम्हारे आश्रम की ओर खिंचे चले आते हैं। इस पर रामपाल ने जवाब दिया कि ‘वास्तव में मैं कोई भगवान नहीं हूं..मेरे पास एक कला है, जो लोगों को मेरी ओर आकर्षित करने को मजबूर कर देती है’।
पुलिस कर्मियों ने यह भी पूछा कि तुमने इतनी संपदा कैसे जमा की। तब उसने कहा कि ‘जो लोग मेरी कला से आकर्षित हो जाते हैं वह मेरे ऊपर सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं।’
रामपाल की कोठी में 4 सेविकाएं
रामपाल ने यह भी बताया है कि उसकी कोठी में चार सेविकाएं थीं। पुलिस ने जब पूछताछ की तो उसने यह बात खुलकर बताई। उसने कहा कि इनके साथ मेरा रिश्ता गुरु शिष्या का था पुलिस व लोग जो समझना चाहें समझे।
रामपाल से जब सिविल लाइन थाने में एसआईटी के सदस्य पूछताछ करने पहुंचे तो वह कुछ श्लोक उच्चारण करने लगा। इस पर एसआईटी के एक सदस्य ने भी उसे श्लोक सुनाया। रामपाल यह उनके सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। रामपाल ने कहा कि मुझे नहीं पता था कि पुलिस में भी ब्रह्मज्ञानी लोग हैं। हे भगवान मैं कहां आ गया। बार बार हाथ जोड़कर वह कुछ-कुछ बड़बड़ाने लगा।
डॉ. संदीप राणा, साइकलॉजिस्ट, जीजेयू के मुताबिक परेशानी के समय व्यक्ति सामने वाले पर अंधा विश्वास करने लगता है। वह कभी तर्क नहीं ढूंढता और उसे फॉलो कर लेता है। सामने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति की मनोस्थिति को समझता है और अकसर ऐसे में वह उसका गलत उपयोग करता है। क्योंकि जिस व्यक्ति को परेशानी होती है वह उस उलझन से निकलने के लिए हर संभव प्रयास करता है।