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सतलोक आश्रम के कथित संत रामपाल को हाईकोर्ट से झटका

Mon, 25 Apr 2016 03:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Mon, 25 Apr 2016 03:52 PM IST
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Sant Rampal ashram complex near the alleged blow from the High Court
रामपाल की पेशी के दौरान उमड़े समर्थक - फोटो : अमर उजाला
हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हत्या की एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने शनिवार को खारिज कर दी। हाईकोर्ट के आदेश पर नवंबर 2014 में आश्रम में चले ऑपरेशन रामपाल के बाद सर्च अभियान के दौरान आश्रम से एक महिला की लाश मिली थी। पुलिस ने इसे हत्या मानकर रामपाल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था।
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यह एफआईआर 19 नवंबर 2014 को दर्ज की गई थी। रामपाल का कहना था कि इस हत्या में उसका कोई हाथ नहीं है। पिछले साल दिसंबर में भी रामपाल ने याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की मांग की थी, लेकिन नए तथ्यों सहित ताजा याचिका दायर करने की छूट मांगते हुए याचिका वापस ले ली थी।
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अब नए सिरे से याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील एसके गर्ग नरवाना की दलीलें सुनने के बाद बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और शनिवार को याचिका खारिज कर दी है। विस्तृत फैसला बाद में आएगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि रामपाल को यह बड़ा झटका क्यों लगा। 
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हाईकोर्ट के खिलाफ टिप्पणी करने पर रामपाल के खिलाफ अदालत की आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू हुई थी, लेकिन बार-बार नोटिस जारी होने पर भी वह पेश नहीं हुआ था। इस मामले में एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता के सुझाव पर जस्टिस एम जियापाल व जस्टिस दर्शन सिंह की डिवीजन बेंच ने हरियाणा के डीजीपी को सख्त निर्देश दिए थे कि भले ही रामपाल बंकर में क्यों न छिपा हो, उसे निकाल कर पेश किया जाए। जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए बाद रामपाल को गिरफ्तार किया था, अन्यथा इससे पहले पुलिस को यह अंदेशा था कि रामपाल को गिरफ्तार करने की कोशिश में हालात बिगड़ सकते हैं।


गिरफ्तारी के बाद चले सर्च अभियान में आश्रम से भारी मात्रा में असलहा और एक महिला की लाश मिली थी। सरकार ने उस वक्त हाईकोर्ट को बताया था कि आपरेशन गिरफ्तारी पर करीब 26 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हाईकोर्ट ने रामपाल से पूछ रखा है कि आखिर यह खर्च उससे क्यों न वसूला जाए। इस मामले में रामपाल को हाईकोर्ट ने जवाब दायर करने का अंतिम मौका दे रखा है।
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