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गवाह को रेप केस में फंसाने के लिए पुलिस अफसरों को मिली सजा

Sat, 21 Jan 2017 12:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला Updated Sat, 21 Jan 2017 12:50 AM IST
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 police officers were sentenced to fine for trap in fake rape case
पु‌लिस - फोटो : अमर उजाला

मानवाधिकार कार्यकर्ता के अपहरण और हत्या मामले में गवाही देने से रोकने के लिए झूठे रेप में फंसाने के दोष में पटियाला की अदालत ने आईजी परमराज सिंह उमरानंगल समेत पांच पुलिस अधिकारियों और दो अन्य को 49 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।

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सभी पर अदालत ने सात-सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने भरने के लिए दो माह का समय दिया गया है। 

सिविल जज जूनियर डिवीजन सुखविंदर सिंह की अदालत ने मौजूदा आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस आईपीएस राजिंदर सिंह (अब रिटायर), तत्कालीन एसएचओ पुलिस स्टेशन सदर पटियाला (अब रिटायर) शमशेर सिंह गुड्डू, सब इंस्पेक्टर (अब रिटायर) जयपाल सिंह, वर्तमान में मानसा में एसएचओ सरबजीत सिंह चीमा के अलावा महिला गुरमीत कौर निवासी अर्बन अस्टेट पटियाला, परवीन कोमल निवासी पुराना बिशन नगर पटियाला को दोषी माना है। 
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इसलिए हुई थी हत्या 
सीनियर वकील एचपीएस वर्मा ने बताया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के पास पुलिस की ओर से फर्जी एनकाउंटरों में मारे गए नौजवानों से संबंधित रिकॉर्ड था। 
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पुलिस को डर था कि खालड़ा कहीं मीडिया को सूचना न दे दें। कुछ पुलिस वालों ने खालड़ा को अगवा कर लिया। बाद में खालड़ा का कत्ल हो गया था। 

दो महिलाओं से मिलीभगत कर फंसाया

 police officers were sentenced to fine for trap in fake rape case
कोर्ट - फोटो : file photo

इस केस में खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके इंसाफ की गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। 

सीबीआई ने जांच के बाद साल 1995 में आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ किडनैपिंग, हत्या और लाश को खुर्द-बुर्द करने और साजिश रचने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। 


दो महिलाओं से मिलीभगत कर फंसाया
खालड़ा मामले में पंजाब ह्यूमन राइट्स आर्गनाइजेशन के तत्कालीन वाइस चेयरमैन किरपाल सिंह रंधावा निवासी अमृतसर प्रमुख चश्मदीद गवाह थे। 

जिन पुलिस वालों को पटियाला की अदालत ने जुर्माने की सजा सुनाई है, उन सभी ने किरपाल सिंह पर कोर्ट में गवाही न देने का दवाब डाला। किरपाल सिंह नहीं माने तो इन अफसरों ने महिला गुरमीत कौर और परवीन कोमल के साथ मिलीभगत करके किरपाल सिंह को झूठे रेप केस में फंसा दिया।

यह केस पटियाला के सदर थाने में 28 जुलाई 2003 को दर्ज किया गया था। फिर भी किरपाल सिंह ने कोर्ट में गवाही दी और इसी बीच खालड़ा किडनैपिंग और मर्डर केस में साल 2005 में फैसला आ गया।

किरपाल सिंह भी कोर्ट से झूठे रेप केस में बरी हो गए और फिर उन्होंने सिविल जज की अदालत में झूठे केस में फंसाने के आरोप में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस दायर कर दिया। 

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