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...नहीं तो डॉक्टरों को मिल जाता अल्ट्रासाउंड करने का हक
अमर उजाला पंचकूला
Updated Thu, 12 Dec 2013 10:03 AM IST
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पंचकूला। पीएनडीटी एक्ट के तहत डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड करने की इजाजत देने के फर्जी आदेशों का एक पत्र मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने ऐसा कोई आदेश ही जारी नहीं किया था।
इस पर विभाग के पूर्व डायरेक्टर के हस्ताक्षर थे। डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च कार्यालय ने फर्जी आदेशों के कॉपी और एक लिखित शिकायत 6 नवंबर को डीसीपी कार्यालय को दी थी। जांच के बाद डीसीपी कार्यालय की शिकायत पर सेक्टर-5 थाने में मामला दर्ज हुआ है।
किसी अज्ञात व्यक्ति ने ऐसे फर्जी आदेश का पत्र तैयार कर दिया जिसमें सभी एमबीबीएस और एमडी डॉक्टरों को किसी भी तरह का अल्ट्रासाउंड करने की इजाजत दे दी गई थी। पीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड की कुछ प्रक्रियाओं पर रोक है। ये आदेश करीब तीन महीने तैयार किया गया था।
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इस पर विभाग के पूर्व डायरेक्टर के हस्ताक्षर थे। हालांकि यह पत्र जारी नहीं हो पाया था और अधिकारियों के हाथ लग गया। अधिकारियोें ने पूर्व डायरेक्टर से इसकी जांच कराई। पूर्व डायरेक्टर ने हस्ताक्षरों की शिनाख्त की और मिलान किया तो हस्ताक्षर उनके नहीं निकले। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
अब सेक्टर-5 थाने में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465(फॉर्जरी), 468 (धोखा देने के लिए फॉर्जरी) और 471(फर्जी दस्तावेज को असली के तौर पर इस्तेमाल करना) के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
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इस पर विभाग के पूर्व डायरेक्टर के हस्ताक्षर थे। डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च कार्यालय ने फर्जी आदेशों के कॉपी और एक लिखित शिकायत 6 नवंबर को डीसीपी कार्यालय को दी थी। जांच के बाद डीसीपी कार्यालय की शिकायत पर सेक्टर-5 थाने में मामला दर्ज हुआ है।
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किसी अज्ञात व्यक्ति ने ऐसे फर्जी आदेश का पत्र तैयार कर दिया जिसमें सभी एमबीबीएस और एमडी डॉक्टरों को किसी भी तरह का अल्ट्रासाउंड करने की इजाजत दे दी गई थी। पीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड की कुछ प्रक्रियाओं पर रोक है। ये आदेश करीब तीन महीने तैयार किया गया था।
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इस पर विभाग के पूर्व डायरेक्टर के हस्ताक्षर थे। हालांकि यह पत्र जारी नहीं हो पाया था और अधिकारियों के हाथ लग गया। अधिकारियोें ने पूर्व डायरेक्टर से इसकी जांच कराई। पूर्व डायरेक्टर ने हस्ताक्षरों की शिनाख्त की और मिलान किया तो हस्ताक्षर उनके नहीं निकले। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
अब सेक्टर-5 थाने में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465(फॉर्जरी), 468 (धोखा देने के लिए फॉर्जरी) और 471(फर्जी दस्तावेज को असली के तौर पर इस्तेमाल करना) के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।