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बम ब्लॉस्ट के आरोपी का बन सकेगा एटीएम कार्ड, मिली मंजूरी

Fri, 06 May 2016 01:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 06 May 2016 01:30 AM IST
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passport office bomb blast: now ATM card will be made of accused
कोर्ट, - फोटो : file photo

पासपोर्ट ऑफिस की पार्किंग में हुए बम ब्लास्ट केस में आरोपी का अब बन सकेगा एटीएम कार्ड, कोर्ट ने दी मंजूरी। 1999 में सेक्टर-34 स्थित पासपोर्ट ऑफिस की पार्किंग में हुए बम ब्लास्ट केस की वीरवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में एक पुलिसकर्मी के बयान दर्ज हुए। ऑपरेशन सेल में तैनात हेड कांस्टेबल शशि कुमार ने आरोपी रतनदीप सिंह की गिरफ्तारी को लेकर अरेस्ट मेमो तैयार किया था। इस दौरान मामले में आरोपी बब्बर खालसा का सदस्य रतनदीप सिंह भी कोर्ट में मौजूद रहा।

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हेड कांस्टेबल ने कोर्ट में दर्ज बयान में बताया कि कैसे रतनदीप की गिरफ्तारी के बाद उसे प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया था। वहीं कोर्ट ने रतनदीप की एक अर्जी, जिसमें उसने बैंक खाते का एटीएम कार्ड बनवाने की अपील की थी, उसे मंजूर कर लिया। बता दें कि कोर्ट इससे पहले रतनदीप की बैंक खाता खोलने की अर्जी मंजूर कर चुकी है। रतनदीप के अनुसार उन्हें अपने वकील की फीस देने समेत पैसे का अन्य लेनदेन करना होता है। इसलिए नाभा जेल के पास उनका बैंक खाता खोला जाए और एटीएम कार्ड बनवाने की मंजूरी दी जाए। 
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बता दें कि रतनदीप को सितंबर 2014 में यूपी के गोरखपुर से नेपाल बार्डर के पास गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद इसी वर्ष कोर्ट में विस्फोटक एक्ट 3, 4 व 5 और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। जींद के समीप गांव रोहड़ निवासी रतनदीप पर 1999 में शहर में हुए बम ब्लास्ट में आरडीएक्स मुहैया कराने का आरोप है। वह चंडीगढ़ पुलिस की हिरासत से दो बार फरार हो चुका है। वहीं, मामले में सह आरोपी और बम ब्लास्ट में रतनदीप की आर्थिक मदद करने वाले जसबीर की पांच महीने पहले मौत हो चुकी है। वहीं अन्य दो आरोपियों को पहले ही 10-10 साल कैद ही सजा हो चुकी है।
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ये है मामला
सेक्टर-34 स्थित पासपोर्ट आफिस की पार्किंग में हुए बम ब्लास्ट का मास्टर माइंड खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) का चीफ परमजीत पंजवड़ था। 30 जून 1999 को हुए ब्लास्ट में चार लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इसके अलावा कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। दोपहर करीब 12.30 बजे हुए ब्लास्ट के लिए स्कूटर का इस्तेमाल किया गया थ। बम स्कूटर की डिग्गी में रखा गया था। हरियाणा नंबर का स्कूटर पानीपत से पंजीकृत हुआ था। इसके बाद इसे सात बार बेचा जा चुका था। जांच में पता चला था कि स्कूटर को शेर सिंह 25 जून को शहर लेकर आ गया था। यहां उससे रतनदीप ने स्कूटर खरीद लिया था। पुलिस के अनुसार रतनदीप घटना के एक दिन पहले ही चंडीगढ़ पहुंचा था। 

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