हालात बताते हैं कि दोनों छात्राओं की हत्या हुई!
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जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के गर्ल्स हॉस्टल में मौके पर मिले सुबूत बताते हैं कि दोनों छात्राओं की हत्या हुई। गौर हो कि बीते दिन जेबीटी की दो छात्राओं के शव फंदे से झूलते मिले थे। फंदे पर झूल रही एक छात्रा का पैर कुर्सी को छू रहा था। दूसरी लड़की का पैर भी बेड से चंद इंच ऊपर हैं। इसके चलते मौत के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि पुलिस का कहना है कि दरवाजा तोड़ने के बाद ही लड़कियों को पंखे से नीचे उतारा गया। परिजनों ने पुलिस कर्मियों से उनके पहुंचने तक शव को पंखे से उतारने से मना किया था, लेकिन घटना के वक्त का पता नहीं होने के बावजूद परिजनों के पहुंचने का इंतजार किया गया।
इन सवालों के जवाब चाहिएं
-लड़कियों ने इतनी ऊंचाई पर चढ़कर फंदे को कैसे बांधा
-क्या दोनों ने एक साथ फंदा लगाया, अगर नहीं तो चीखने की आवाज किसी ने आखिरकार क्यों नहीं सुनी
-लड़कियों के कमरे की टेबल पर कई ऐसे संदेश लिखे थे, जो प्रेरणात्मक थे और उनकी नोटबुक में भी अलग-अलग विषयों के नोट्स थे।
31 दिसंबर के बाद नहीं लिखी डायरी
बिंदु के चाचा संदीप ने बताया कि दोनों छात्राएं अपनी डायरी रोजाना लिखा करती थीं। लेकिन 28 दिसंबर को करनाल से लौटने के बाद 31 दिसंबर को डायरी में आखिरी पंक्तियां लिखीं। नए साल में उनकी डायरी में रोजाना की कोई बात नहीं लिखी गई थी।
मामले को संदिग्ध मान रही पुलिस
पुलिस इस मामले को संदिग्ध मानकर छानबीन कर रही है। दोनों छात्राएं करनाल जिले के सालवन गांव की रहने वाली थीं। बचपन से एक साथ पढ़ने वाली हिमांद्री और बिंदु ने किस वजह से मौत को गले लगाया, ये कोई नहीं जानता।
डीसीपी हामिद अख्तर ने कहा कि पुलिस को कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। एक मोबाइल मिला है, जिसकी छानबीन की जा रही है। संस्थान की प्रिंसिपल ने बताया कि हररोज की तरह हिमांद्री और बिंदु ने सोमवार रात खाना खाने के बाद रात करीब 11:00 बजे तक सोने के लिए चली गईं।
दोनों ने पिछले साल अगस्त में दाखिला लिया था और पढ़ाई में भी काफी अच्छी थीं। गत 28 दिसंबर को अपने घर से लौटी थीं और संस्थान के हॉस्टल में रह रही थीं। सोमवार शाम को भी उन्होंने मोबाइल पर परिजनों से बातचीत की थी।
मोबाइल कॉल रिकॉर्ड खोल सकता है मौत का राज
पुलिस के मुताबिक घटना से पहले सोमवार की शाम हिमांद्री और बिंदु ने अपने परिजनों से बातचीत की थी। पुलिस ने मोबाइल फोन को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसकी कॉल डिटेल खंगालने के बाद इस मामले में कुछ सामने आने की संभावना है।
स्कूल प्रिंसिपल के मुताबिक शाम को 5:00 से 5:30 बजे तक छात्राओं को फोन पर अपने रिश्तेदारों से बातचीत की छूट दी जाती है। इसके बाद मोबाइल फोन संस्थान के कर्मचारियों के पास रहता है।
पहले भी एक छात्रा कर चुकी है सुसाइड की कोशिश
करीब सवा महीने पहले भी इस संस्थान में एक छात्रा ने किसी बात से परेशान होकर आत्महत्या की कोशिश की थी। इसके बावजूद संस्थान के गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों की सुरक्षा के लिए जरूरी ऐहतियात नहीं बरते जा रहे थे।
जवाब नहीं मिलने पर खिड़की से मिली घटना की जानकारी
वार्डन बलविंदर ने बताया कि सोमवार शाम को हिमांद्री और बिंदु मेस में खाना खाने के लिए पहुंची थीं। सहपाठी छात्राओं ने उनके परिजनों को बताया कि अक्सर दोनों छात्राएं खुश रहती थीं और बीती रात भी दोनों के चेहरे पर किसी तरह का तनाव नहीं था।
छुट्टियों के बाद दोनों 28 दिसंबर को यहां दोबारा पहुंचीं और रोजाना की तरह सुबह जब अंदर से कोई जवाब नहीं आया तो खिड़की से उन्हें देखने पर इस पूरी घटना की जानकारी मिलीं।
दोनों छात्राओं का किया था कमरा शिफ्ट
प्रिंसिपल सुषमा मुंजाल ने कहा कि डाइट हॉस्टल में करीब 35 छात्राएं रहती हैं, जिनके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने दोनों लड़कियों को स्पोर्ट्स रूम में शिफ्ट करने की बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहले जिस कमरे में लड़कियां रह रही थीं, वहां सीलन होने की वजह से उन्हें हाल ही शिफ्ट किया गया था।
परिजनों ने उठाए संस्थान पर सवाल
छात्रा बिंदु के पिता दिनेश सिंह ने सवाल उठाए हैं कि आखिरकार जब उनकी बेटी को किसी तरह का दबाव नहीं था और न ही घर से उन्हें किसी तरह की परेशानी, तो इतना बड़ा कदम आखिरकार कैसे उठाया। कमरे में दो पंखे हैं और दोनों पर लड़कियां फंदे से लटकती मिलीं।
जरूर उन पर किसी न किसी तरह का दबाव होगा जिसका फिलहाल खुलासा नहीं किया जा रहा है। बिंदु के चाचा संदीप ने बताया कि एक दिन पहले भी उनसे बातचीत हुई और पूछने पर भी छात्राओं ने किसी तरह के तनाव या परेशानी का जिक्र नहीं किया।
उन्होंने बताया कि हिमांद्री के मामा हैं और दोनों बच्चे आसपास ही रहते हैं। हिमांद्री की चंडीगढ़ निवासी मौसी उमा राणा ने बताया कि फोन पर बातचीत पर सब कुछ ठीक ठाक होने की बात कही थी।