11 शातिरों की करतूत, 100 रुपये का सिम, और लगा देते थे लाखों का चूना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के सिरसा में साइबर ठगी करने वाला गिरोह जिस तरीके से ठगी करता था, उसे देखकर पुलिस भी हैरान है। आरोपी ऑनलाइन ठगी के लिए 100 रुपये प्रति सिम के हिसाब से एक्टिव सिम लाते थे। एक बार प्रयोग करने के बाद इसे वे आगे गिरोह के दूसरे गुर्गों को 70 से 80 रुपये में बेच देते थे।
आरोपी एक बार में एक साथ 1000 सिम लेकर आते थे। ये बदमाश इन सिम के माध्यम से ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा उपभोक्ता को दी जाने वाली नगद राशि उड़ा लेते थे। आरोपी फर्जी सिम पर फर्जी आईडी बनाकर कैश बैक लेकर कंपनियों को लाखों रुपये का चूना लगा रहे थे।
आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि ऑनलाइन ठगी के लिए उन्होंने हरियाणा और पंजाब से जुड़े युवकों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ है। इस ग्रुप का एडमिन पंजाब का है। वही इस गिरोह का सरगना भी है। सिरसा पुलिस बीते दो दिनों में साइबर फ्रॉड करने वाले दो गिरोह के 11 शातिरों से 607 सिम, 22 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप बरामद कर चुकी है।
एसपी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सीआईए प्रभारी इंस्पेक्टर नरेश कुमार, उप निरीक्षक राजपाल व सहायक उप निरीक्षक अवतार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग गांव शेरपुरा क्षेत्र में फर्जी आईडी पर भारी मात्रा में सिम लाकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे ऑनलाइन ठगी का धंधा कर रहे हैं। इसके बाद दबिश दी गई थी।
दबिश में सीआईए ने अजय कुमार, संजय, गोविंद सिंह, विकास, दर्शन सिंह, संजय निवासी शेरपुरा और हर्ष निवासी जोधकां को डिंग मंडी क्षेत्र के गांव शेरपुरा से दबोचा था। इन सातों आरोपियों से पुलिस ने 327 सिम, 11 मोबाइल फोन व एक लैपटॉप बरामद किया था। इससे पहले बुधवार को भी चार शातिरों रमेश कुमार, विनोद कुमार निवासी डिंग मंडी, सुभाष और राजेश निवासी जिला फतेहाबाद को पकड़ कर उनके पास से पुलिस ने 280 सिम, 11 मोबाइल और एक लैपटॉप बरामद किया था।
शेरपुरा के संजय को कभी थे खाने के लाले, आज गांव में है आलीशान मकान
गिरोह के सरगना संजय उर्फ लाला और उसका चचेरा भाई संजय है। दोनों ने गांव में ही पहले यह काम शुरू किया। सूत्रों के अनुसार, संजय को कभी खाने के लाले थे, लेकिन अब दोनों ने गांव में आलीशान मकान बनाया हुआ है।
दोनों चचेरे भाई गांव में महंगी गाड़ी में घूमते थे और दूसरे युवाओं को अपने धंधे में शामिल करने के लिए कमीशन का लालच देते थे। युवाओं को दो से तीन हजार रुपये दिए जाते थे। गिरोह में शामिल शेरपुरा का ही दर्शन सिंह सिरसा के एक कॉलेज का विद्यार्थी है। आरोपी अजय भी अच्छे घर से है, उसके पिता खेती के साथ-साथ सीमेंट, रेत बजरी की दुकान चलाते हैं। आरोपी विकास के पिता खेती के साथ-साथ लकड़ी मिस्त्री का काम करते हैं। सभी आरोपी 18 से 24 साल की उम्र तक के हैं।
पुलिस ने गुरुवार को सात आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि सातों आरोपियों ने विभिन्न कंपनियों के सिम जाली दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किए थे। आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि गिरोह के सरगना संदेश भेजकर युवाओं को अमीर बनाने का लालच देते हैं।
अब सीआईए साइबर ठगी के इस गैंग के अन्य आरोपियों की तलाश में पंजाब के रोपड़, मानसा, चंडीगढ़, जयपुर में दबिश देगी। वहीं, सीआईए पकड़े गए आरोपियों के बैंक अकाउंट की डिटेल भी खंगालेगी। साथ ही सभी सिम कंपनियों से सिम की आईडी नंबर, सिम नंबर और किसके नाम पर सिम जारी हुआ, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।