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ऑनलाइन बेच दी चोरी की बाइक
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Thu, 03 Oct 2013 01:49 PM IST
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पुराने सामान की ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले सामान के स्वामित्व की ठीक से परख कर लें नहीं तो बाद में समस्या हो सकती है।
अलीगढ़ में रह रहे एक युवक के साथ ऐसा ही हुआ। ऐसी ही एक वेबसाइट पर बाइक की फोटो देखकर उसे कम दामों में खरीद लिया। बाद में पता लगा कि वह चोरी की है। बेकसूर युवक अब दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
बन्ना देवी क्षेत्र के नई बस्ती निवासी हबीब का भांजा यूसुफ उनके पास ही रहता था और अमिरनिशां में एक रेडिमेड कपड़ों की दुकान पर काम करता था। कुछ दिन पहले यूसुफ ने पुराने सामान की खरीद फरोख्त करने वाली एक वेबसाइट पर बाइक की फोटो देखी और दिए गए नंबर पर संपर्क किया।
यूसुफ को दिल्ली में बुलाया और 20 हजार रुपये में बाइक का सौदा तय हो गया। यूसुफ से कहा गया कि वह 15 हजार रुपये अभी दे दे और बाइक ले जाए। बाद में जब रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाए तो बकाया 5 हजार रुपये दे देना।
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बाइक सुपुर्दगी में आने पर यूसुफ को भरोसा हो गया और वह बाइक लेकर अलीगढ़ आने लगा। दिल्ली में ही उसे पुलिस ने रोक लिया। वहां पर पता लगा कि यह बाइक चोरी की है। जिसका मुकदमा थाना दरियागंज में दर्ज था।
यूसुफ ने लाख सफाई दी, लेकिन वह खुद को बेगुनाह साबित न कर सका। उसके मामा हबीब ने बताया कि अब वह वहां के वकील आदि से मिलकर उसकी जमानत आदि की व्यवस्था कर रहे हैं।
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अलीगढ़ में रह रहे एक युवक के साथ ऐसा ही हुआ। ऐसी ही एक वेबसाइट पर बाइक की फोटो देखकर उसे कम दामों में खरीद लिया। बाद में पता लगा कि वह चोरी की है। बेकसूर युवक अब दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
बन्ना देवी क्षेत्र के नई बस्ती निवासी हबीब का भांजा यूसुफ उनके पास ही रहता था और अमिरनिशां में एक रेडिमेड कपड़ों की दुकान पर काम करता था। कुछ दिन पहले यूसुफ ने पुराने सामान की खरीद फरोख्त करने वाली एक वेबसाइट पर बाइक की फोटो देखी और दिए गए नंबर पर संपर्क किया।
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यूसुफ को दिल्ली में बुलाया और 20 हजार रुपये में बाइक का सौदा तय हो गया। यूसुफ से कहा गया कि वह 15 हजार रुपये अभी दे दे और बाइक ले जाए। बाद में जब रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाए तो बकाया 5 हजार रुपये दे देना।
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बाइक सुपुर्दगी में आने पर यूसुफ को भरोसा हो गया और वह बाइक लेकर अलीगढ़ आने लगा। दिल्ली में ही उसे पुलिस ने रोक लिया। वहां पर पता लगा कि यह बाइक चोरी की है। जिसका मुकदमा थाना दरियागंज में दर्ज था।
यूसुफ ने लाख सफाई दी, लेकिन वह खुद को बेगुनाह साबित न कर सका। उसके मामा हबीब ने बताया कि अब वह वहां के वकील आदि से मिलकर उसकी जमानत आदि की व्यवस्था कर रहे हैं।