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अटेस्ट करने के लिए वसूल रहे थे ज्यादा पैसे, पकड़े गए
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 30 Nov 2013 08:35 AM IST
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सेक्टर-17 स्थित उपायुक्त कार्यालय परिसर में नोटरी द्वारा एफिडेविट अटेस्ट करने के लिए की जा रही ओवर चार्जिंग की शिकायत मिलने के बाद एसडीएम (ईस्ट) और संयुक्त निदेशक, खाद्य एवं आपूर्ति दानिश अशरफ ने छापा मारा।
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इससे वहां हड़कंप मच गया। इस छापे के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि नोटरी न सिर्फ लोगों से अटेस्ट करने के लिए ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं बल्कि बिना दस्तावेजों की जांच के हस्ताक्षर भी कर रहे हैं।
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एसडीएम ने खुद इसकी पड़ताल करने के लिए एक व्यक्ति को अपने हाथ से फार्म भर कर दिया जिस पर एक जाली फोटो लगाई गई थी।
नोटरी ने बिना दस्तावेज देखे फार्म अटेस्ट कर दिया। एसडीएम इसकी रिपोर्ट बनाकर उपायुक्त मोहम्मद शाइन को सौंपेंगे और इसके बाद कुछ नोटरी का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से आवेदन पत्र लिए जा रहे हैं।
इस आवेदन पत्र की कीमत दो रुपये है और इस फार्म के साथ एक रुपये के एफिडेविट की प्रति भी दी जा रही है जिस पर नोटरी से हस्ताक्षर करा कर जमा कराना होता है।
कई नोटरी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एफिडेविट को फार्म से फाड़कर हरे कागज पर अपना प्रिंटेड एफिडेविट लगा रहे हैं और इसके लिए लोगों से 40 से 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
अटेस्ट करने के लिए 20 रुपये से ज्यादा नहीं लिए जा सकते। दानिश अशरफ ने कहा कि विभाग लोगों की सुविधा के लिए ही फार्म के साथ एक रुपये में एफिडेविट की प्रति दे रहा है।
इसे सिर्फ नोटरी को अटेस्ट करना है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि गरीब लोग परेशान हों। नोटरी इन गरीबों से एफिडेविट को अटेस्ट करने के लिए 100 रुपये तक मांग रहे हैं।
ऐसे हुई छापेमारी
एसडीएम (ईस्ट) दानिश अशरफ ने खुद आवेदन फार्म भरा। इसमें आवेदन कर्ता का नाम बिंदेश्वरी भरा गया। पते की जगह सिर्फ बीडीसी भरा गया।
फार्म जानबूझ कर अधूरा भरा गया और इस पर जाली फोटो लगा दी गई। इस फार्म को एक व्यक्ति को दिया गया। नोटरी ने इस व्यक्ति से पूछा कि यह किसका फार्म है।
उसने बताया कि उसकी चाची का फार्म है और वह खुद आने की स्थिति में नहीं है। नोटरी ने उससे पैसे लिए और बिना देखे फार्म और फोटो अटेस्ट कर दी।
दानिश और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी उपायुक्त कार्यालय परिसर में ही दूर खड़े होकर देख रहे थे।
जब फार्म अटेस्ट हो गया तो दानिश अशरफ नोटरी के पास पहुंचे और उससे पूछा कि बिना पड़ताल किए उसने कैसे फार्म अटेस्ट कर दिया? नोटरी एनपी सिन्हा के होश उड़ गए और वह संतोषजनक जवाब न दे पाए।
एसडीएम ने उनका लाइसेंस भी देखा। इसके बाद एसडीएम ने एक दो नोटरी से और पूछताछ की।
एसोसिएशन ने भी दी शिकायत
एस्टेट ऑफिस एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष करण पुरी ने एसडीएम को बताया कि यह जगह सिर्फ 95 वकीलों को अलॉट हुई है।
यहां लगभग 200 वकील बैठते हैं। 100 से ज्यादा वकीलों का अवैध कब्जा है। पुरी ने बताया कि यहं कई दलाल घूमते हैं जो कि लोगों से पैसे लेकर नोटरी से काम कराते हैं।
नोटरी के हिस्से में जितना पैसे आता है उससे ज्यादा पैसा दलाल के पास जाता है।