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OLX पर सामान खरीदते हैं तो बच कर रहें, फौजी और पुलिसकर्मी बनकर ठगने वाला गिरोह काबू

Wed, 20 Mar 2019 12:22 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क/अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, मोहाली Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 20 Mar 2019 12:22 PM IST
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Mohali Police Exposed Online Fraud Gang
ऑनलाइन ठगी करने वाला गिरोह
सेना और पुलिस के जवान बनकर लोगों को ओएलएक्स पर मोबाइल फोन, एक्टिवा, कार और सामान बेचने का झांसा देकर ठगने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने राजस्थान से काबू किया है। आरोपियों के पकड़े जाने से करीब 25 साइबर क्राइम से जुड़े केस सुलझने का दावा एसएसपी हरचरन सिंह भुल्लर ने मंगलवार को सेक्टर-76 स्थित अपने कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस में किया।
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उन्होंने बताया कि गिरोह का मास्टर माइंड अभी पकड़ से बाहर है। पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। आरोपियों की पहचान इस्लाम, तालीम व रियाज निवासी गांव झील पट्टी जिला भरतपुर राजस्थान के रूप में हुई है। राजस्थान का यह इलाका माऊ क्रिमिनल बेल्ट के नाम से जाना जाता है। यह गिरोह नए नए तरीके से लोगों को अपना शिकार बनाता था। 
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भारतीय सेना के मेजर को बनाया था शिकार
आरोपियों ने एरिया में तैनात भारतीय सेना के एक मेजर सुधीर बाबू को अपनी ठगी का शिकार बनाया था। इस संबंध में जीरकपुर स्थित ढकौली थाने में केस दर्ज हुआ था। यह केस 6 मार्च को दर्ज हुआ था। इसके बाद जिला पुलिस हरकत में आ गई थी।
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आरोपी इस तरह बनाते थे अपना शिकार

आरोपी पहले ओएलएक्स समेत कई साइटों पर कारों, स्कूटर, कैमरे, लैपटॉप समेत कई सामान बेचने के लिए फोटो अपलोड कर देते थे। इसके बाद जैसे ही लोगों को यह सामान पसंद आता था, वह आरोपियों से संपर्क करते थे। इस पर आरोपियों का सीधा जवाब होता था कि वह इंडियन आर्मी में हैं। उन्होंने अपने वाट्सएप प्रोफाइल पर भी फौजियों की फोटो लगाई होती थी।

इसके बाद वह अपने आर्मी होने तक के दस्तावेज भेज देते थे। जैसे ही लोग इनके विश्वास में आ जाते थे, तो उनका जवाब होता था जो सामान उन्हें पसंद आ गया है उसकी आधी कीमत पेटीएम से कर दें। जब सामान पहुंच जाए तो उसके बाद शेष कीमत भेज दें। जैसे ही लोग इन्हें पैसे पेटीएम करते थे, वह अपना मोबाइल फोन बंद कर लेते थे।

आरोपियों से यह सामान हुआ बरामद
पकड़े गए आरोपियों से पुलिस को आठ मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। अब पुलिस की टीमें आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं। जल्दी ही कई और राज खुलेंगे।

प्राइवेट कंपनी की तरह काम करता है गिरोह

पुलिस के मुताबिक, लोगों को ठगने वाला गिरोह पूरी तरह से प्राइवेट कंपनी की तरह काम करता है। अभी तक पकड़े आरोपियों में इस्लाम सबसे ज्यादा पढ़ा ग्रेजुएशन पास है। बाकी नाममात्र पढ़े लिखे हैं, लेकिन वह अपने काम में माहिर हैं। हरेक का काम बंटा हुआ था। उक्त ठग लोगों को फंसाने में माहिर थे। वह साइबर से जुड़ी वारदातों को ही अंजाम देते थे।

पूरा गांव इसी काम में माहिर, पुलिस भी देती है सहयोग
पुलिस सूत्रों की मानें तो आरोपी जिस गांव के रहने वाले हैं, वहां के अधिकतर लोग इसी काम में माहिर हैं। यह बिल्कुल पहाड़ से सटा हुआ एरिया है। जैसे ही ठगी के शिकार लोग उक्त इलाके की पुलिस के पास जाते हैं, तो वहां की पुलिस भी आरोपियों को पकड़ने के बजाय समझौते पर जोर देती है। इसके चलते यह गिरोह आसानी से उस एरिया में पनप रहा है।

व्हाट्सएप पर ऐसे लगाते थे फोटो
पुलिस के मुताबिक, आर्म्ड फोर्स की वर्दियों वाली संजय कुमार, नगिंदर यादव व विकास पटेल के नाम वाली फोटो आरोपी व्हाट्सएप पर डाल देते थे, ताकि लोग इन पर संदेह न करें। वह पेटीएम के माध्यम से अपने खाते में पैसे डलवा लेते थे। साथ ही अपना फोन बंद करवा देते थे।
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