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लूट के बाद चंडीगढ़ पुलिस कितनी चौकन्नी, देखिए इसकी बानगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Sun, 08 May 2016 12:20 AM IST
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शहर में हो रही लूट और अन्य दूसरी वारदातों के बावजूद पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सचेत नहीं हुई है। किसी घटना के बाद पुलिस सक्रिय होती है और बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जैसे ही कुछ दिन बीतते हैं वह पुराने ढर्रे पर लौट आती है। शुक्रवार रात को अमर उजाला की टीम ने शहर के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सेक्टर 17 मार्केट और आसपास के इलाके का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है। इस दौरान पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के दावे झूठे निक ले और लापरवाही प्रत्यक्ष तौर पर नजर आई। पुलिस की निष्क्रियता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि कुछ दिन पहले जिस मार्केट से 14 करोड़ रुपये की लूट हुई थी उस जगह रात में पुलिस का एक भी जवान नजर नहीं आया।
समय: 10:58 मिनट, स्थान- करण ज्वेलर्स मार्केट सेक्टर-22
बस स्टैंड से होकर टीम सेक्टर-22 स्थित करण ज्वेलर्स वाली मार्केट की तरफ निकली। इस बीच स्टेडियम चौक पर एक पीसीआर तैनात थी। ज्वेलर्स मार्केट में पीसीआर नहीं दिखी थी। इसके बाद टीम के सदस्य अरोमा होटल होते हुए सेक्टर-9 पहुंचे। अरोमा के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था जीरो थी।
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समय: 10:58 मिनट, स्थान- करण ज्वेलर्स मार्केट सेक्टर-22
बस स्टैंड से होकर टीम सेक्टर-22 स्थित करण ज्वेलर्स वाली मार्केट की तरफ निकली। इस बीच स्टेडियम चौक पर एक पीसीआर तैनात थी। ज्वेलर्स मार्केट में पीसीआर नहीं दिखी थी। इसके बाद टीम के सदस्य अरोमा होटल होते हुए सेक्टर-9 पहुंचे। अरोमा के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था जीरो थी।
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sec 17
समय-9:50 स्थान: सेक्टर-9 से सेक्टर-17 मार्केट सहित आसपास की पार्किंग और पुन: अमर उजाला सेक्टर-9 स्थित ऑफिस से रात के 9:50 मिनट पर अमर उजाला की टीम निकली। प्रेस लाइट प्वाइंट से होकर सेक्टर-17 स्थित 14 करोड़ की लूट वाले स्थान यानी फॉरएवर डायमंड शोरूम पहुंची। इसी बीच में रास्ते में एक भी पीसीआर और पुलिसकर्मी नहीं दिखा। वहीं, रास्ते में रात 10:10 बजे शोरूम के आसपास सन्नाटा पसरा था।
शोरूम के बीच अंडर पार्किंग और उसके सामने वाली पार्किंग में अंधेरा छाया था। इसके साथ पुल के नीचे से बाहर निकलते समय अंधेरा गहराया हुआ था। हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी वारदात के बाद करीब 17 मिनट तक न पेट्रोलिंग हुई और न ही पुलिसकर्मी की तैनाती दिखी। हैरानी की बात यह भी है कि यहीं पास में कई बैंकों भी हैं। लेकिन इसके बावजूद पुलिस सुरक्षा को लेकर सुस्त है।
समय 10:27 मिनट, स्थान सेक्टर-17 से होकर ताज होटल, पुलिस स्टेशन और बस स्टैंड
इसके बाद 10:27 बजे टीम मार्केट में पुल के नीचे से निकलकर ताज होटल होकर पुलिस स्टेशन की तरफ से सेक्टर-17 बस स्टैंड पहुंची। इस बीच एक भी पीसीआर की तैनाती और पेट्रोलिंग करती कोई जिप्सी नहीं मिली। रात के अंधेरे में सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था। ओवर स्पीड गाड़ियां भाग रही थीं। नशेड़ियों ने सड़क के पास अपना महफिल सजा रखी थी। लेकिन, नहीं दिखे तो पुलिसकर्मी और पीसीआर जीप । आसपास नजर डालते हुए बस स्टैंड तक पहुंचने में 13 मिनट लगे। लेकिन अंधेरे और नशेड़ियों के अलावा सड़क पर कोई नहीं दिखा।
शोरूम के बीच अंडर पार्किंग और उसके सामने वाली पार्किंग में अंधेरा छाया था। इसके साथ पुल के नीचे से बाहर निकलते समय अंधेरा गहराया हुआ था। हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी वारदात के बाद करीब 17 मिनट तक न पेट्रोलिंग हुई और न ही पुलिसकर्मी की तैनाती दिखी। हैरानी की बात यह भी है कि यहीं पास में कई बैंकों भी हैं। लेकिन इसके बावजूद पुलिस सुरक्षा को लेकर सुस्त है।
समय 10:27 मिनट, स्थान सेक्टर-17 से होकर ताज होटल, पुलिस स्टेशन और बस स्टैंड
इसके बाद 10:27 बजे टीम मार्केट में पुल के नीचे से निकलकर ताज होटल होकर पुलिस स्टेशन की तरफ से सेक्टर-17 बस स्टैंड पहुंची। इस बीच एक भी पीसीआर की तैनाती और पेट्रोलिंग करती कोई जिप्सी नहीं मिली। रात के अंधेरे में सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था। ओवर स्पीड गाड़ियां भाग रही थीं। नशेड़ियों ने सड़क के पास अपना महफिल सजा रखी थी। लेकिन, नहीं दिखे तो पुलिसकर्मी और पीसीआर जीप । आसपास नजर डालते हुए बस स्टैंड तक पहुंचने में 13 मिनट लगे। लेकिन अंधेरे और नशेड़ियों के अलावा सड़क पर कोई नहीं दिखा।
समय-10:40 मिनट, स्थान-सेक्टर-17 बस स्टैंड बैक साइड
bus stand back side
रात में 10.40 बजे बस स्टैंड के बैक साइड में डरावना माहौल था। एक भी लाइटों की व्यवस्था नहीं थी। गहरा अंधेरा छाया हुआ था। इसके साथ बैक साइड की पार्किंग में गाड़ियों की लाइन लगी थी। काफी पैसेंजर अपनी गाड़ियों को बैक साइड में रोकने बाद ही बस स्टैंड में जा रहे थे। गौरतलब है कि सेक्टर-44 निवासी एक व्यापारी पर हमला करके एक करोड़ दस लाख की लूट की गई थी। इसके बाद बस स्टैंड की बैक साइड की सुरक्षा को प्रशासन और पुलिस ने काफी गंभीरता से लिया था। लेकिन, यह चौकसी कुछ दिन ही रही। जबकि यहां पहले की तरह अब भी देर रात तक लोगों का आना जाना लगा रहता है।
कोट------
वारदात के बाद पुलिस के बड़े बड़े वायदे सिर्फ माहौल को शांत करवाने और पीड़ितों को चुप करवाने का मात्र फंडा हैं। बाद में पुलिस अपना वादा और व्यापारियों की सुरक्षा भूल जाती है। सेक्टर-22 में करण ज्वेलर्स की लूट के बाद पुलिस ने काफी वादे किए थे। इसमें मार्केट में स्पेशल सिक्योरिटी लगाना, व्यापारियों का आर्म लाइसेंस देने प्रमुख हैं। लेकिन, एक भी वादे पर पुलिस ने काम नहीं किया।
राजीव सहदेव, प्रधान, ज्वेलर्स एसोसिएशन