लेडी कोच का खुलासा, ट्रायल में होता खिलाड़ियों का उत्पीड़न
वुशू खिलाड़ी के कोच पर उत्पीड़न के आरोपों के बीच एक महिला कोच ने सनसनीखेज खुलासा कर विवाद को तूल दे दिया। पद्मश्री अवार्डी और भारत की पहली महिला कबड्डी कोच डॉ. सुनील डबास ने एक कार्यक्रम में कहा कि खेलों के ट्रायल के दौरान महिला खिलाड़ियों का उत्पीड़न होता है, क्योंकि चयन समिति में ज्यादातर पुरुष ही होते हैं।
इसके साथ ही राजनीतिक लोगों का भी चयन में दखल होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाओं में बहुत क्षमता है। परिजनों को उन्हें प्रोत्साहित कर खेलों में भेजना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि चयन समिति में महिलाओं की संख्या ज्यादा होनी चाहिए और राजनीतिक लोगों को चयन प्रक्रिया से दूर रखा जाना चाहिए। गुड़गांव के द्रोणाचार्य कॉलेज से आईं डॉ. डबास बृहस्पतिवार को महारानी किशोरी जाट कन्या महाविद्यालय में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहीं थीं।
यूं चल रहा है विवाद
रोहतक की एक वुशू खिलाड़ी ने एक सप्ताह पहले कोच और हरियाणा अमेच्योर वुशू एसोसिएशन के सचिव राजेश पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। करीब एक सप्ताह के बाद हालांकि आरोपी कोच को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन इस मुद्दे ने महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए उनका यौन उत्पीड़न करने के विवाद को हवा दे दी। अब पद्मश्री अवार्डी और भारत की पहली महिला कबड्डी कोच डॉ. सुनील डबास ने खुले मंच पर उत्पीड़न का सनसनीखेज खुलासा कर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
शिक्षा से ही महिलाओं का सशक्तीकरण
संगोष्ठी के पहले सत्र का उद्घाटन प्राचार्या डॉ. कृष्णा चौधरी ने अतिथियों के स्वागत से किया। एमडीयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि महिलाओं की ऐसी मानसिक सोच को बदलना बहुत जरूरी है।
शिक्षा ही उन्हें सही मार्ग दिखा सकती है। यही कारण है कि ग्रामीण महिलाओं की अपेक्षा शहरी क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण ज्यादा है। आल इंडिया रेडिया के निदेशक डॉ. रामफल चहल ने कहा कि टीवी के कार्यक्रम भी समाज को भ्रमित कर घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।
टीवी युवाओं में गलत संस्कारों को परोस रहे हैं। उन्होंने लोकगीत ‘बीर हम मां के जाए रे, रे लोटे थे एक शरीर किस्मत न्यारी-न्यारी रे...’ की पंक्तियां सुनाकर महिलाओं की करुणा को दर्शाया। एमडीयू महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. पुष्पा दहिया ने भी महिलाओं के उत्थान पर बल दिया।
80 शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
सेवानिवृत्त प्रो. अमर सिंह ने संगोष्ठी के अंतिम सत्र की अध्यक्षता करते हुए शिक्षकों और शोधार्थियों के साथ महिला सशक्तीकरण पर मंथन किया। संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रदेश और बाहर से आए 80 से ज्यादा शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर आयोजन सचिव डॉ. सुशीला धनखड़, डॉ. प्रेम सिंह लठवाल, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. संतोष मुद्गिल, डॉ. सुनीता देशवाल, डॉ. आशा खरब, डॉ. डी.एस. अहलावत, डॉ. सरिता और डॉ. नमिता मौजूद रहे।