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खुशप्रीत के चाचा का हुआ क्रास एग्जामिनेशन
अमर उजाला चंडीगढ़
Updated Thu, 09 Jan 2014 01:38 AM IST
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खुशप्रीत की हत्या मामले में बुधवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की अदालत में चाचा सुखविंदर सिंह का बचाव पक्ष ने क्रास एग्जामिनेशन पूरा किया।
बचाव पक्ष के वकील अमर सिंह चहल ने सुखविंदर से खुशप्रीत का अपहरण और मांगी फिरौती को लेकर उठाए गए कदमों को लेकर सवाल पूछे।
चहल के मुताबिक सुखविंदर ने कहा कि अपहरणकर्ता आरोपी भाइयों की तरफ से उन्हें घर के फोन व मोबाइल पर फिरौती की कॉल्स आई थी।
इन नंबरों की डिटेल उन्होंने डायरी में लिख पुलिस को दिखाई थी। बचाव पक्ष ने सवाल किया कि उनके मोबाइल का सिम कार्ड गुम हो गया था और मोबाइल थैले में ही पड़ा रह गया था तो काल डिटेल कहां से इकट्ठी की गई।
चहल के मुताबिक पुलिस के रिकार्ड में सुखविंदर द्वारा ऐसी कोई डायरी दिखाए जाने का जिक्र नहीं है। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने खुशप्रीत की गुमशुदगी को लेकर सुखविंदर के पंचकूला से चंडीगढ़ घर लौटने व परिवार सहित खुशप्रीत को ढूंढने व बुड़ैल चौकी में दी गई शिकायत के संबंध में पुलिस को दी शुरुआती स्टेटमेंट में जिक्र नहीं था। मामले की अगली सुनवाई में 4 को होगी।
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दायर मामला 21 दिसंबर 2010 का है। बुडै़ल निवासी पांच वर्षीय खुशप्रीत का अपहरण घर के पास से हो गया था। अपहरण के बाद उसके चाचा के मोबाइल फोन पर दस लाख रुपये की फिरौती की कॉल आई थी।
खुशप्रीत के परिजनों ने बच्चे को बचाने के लिए अपहरणकर्ताओं को चार लाख फिरौती दी थी। फिरौती लेने के बाद पांच जनवरी 2011 को अपहरणकर्ताओं ने खुशप्रीत की हत्या कर शव मोहाली में फेंक दिया था।
डीएसपी विजय कुमार ने हत्या के मामले में खु़लासा करते हुए खुशप्रीत के पड़ोसी सुखदेव और गुरमिंदर को दबोचा था। बाद में पुलिस ने मामले में शामिल उनके नौकर नंद किशोर को पकड़ा था। 07 अगस्त 2011 को अदालत ने सुखदेव, गुरमिंदर और नंद किशोर के खिलाफ आरोप तय किए थे।
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बचाव पक्ष के वकील अमर सिंह चहल ने सुखविंदर से खुशप्रीत का अपहरण और मांगी फिरौती को लेकर उठाए गए कदमों को लेकर सवाल पूछे।
चहल के मुताबिक सुखविंदर ने कहा कि अपहरणकर्ता आरोपी भाइयों की तरफ से उन्हें घर के फोन व मोबाइल पर फिरौती की कॉल्स आई थी।
इन नंबरों की डिटेल उन्होंने डायरी में लिख पुलिस को दिखाई थी। बचाव पक्ष ने सवाल किया कि उनके मोबाइल का सिम कार्ड गुम हो गया था और मोबाइल थैले में ही पड़ा रह गया था तो काल डिटेल कहां से इकट्ठी की गई।
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चहल के मुताबिक पुलिस के रिकार्ड में सुखविंदर द्वारा ऐसी कोई डायरी दिखाए जाने का जिक्र नहीं है। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने खुशप्रीत की गुमशुदगी को लेकर सुखविंदर के पंचकूला से चंडीगढ़ घर लौटने व परिवार सहित खुशप्रीत को ढूंढने व बुड़ैल चौकी में दी गई शिकायत के संबंध में पुलिस को दी शुरुआती स्टेटमेंट में जिक्र नहीं था। मामले की अगली सुनवाई में 4 को होगी।
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दायर मामला 21 दिसंबर 2010 का है। बुडै़ल निवासी पांच वर्षीय खुशप्रीत का अपहरण घर के पास से हो गया था। अपहरण के बाद उसके चाचा के मोबाइल फोन पर दस लाख रुपये की फिरौती की कॉल आई थी।
खुशप्रीत के परिजनों ने बच्चे को बचाने के लिए अपहरणकर्ताओं को चार लाख फिरौती दी थी। फिरौती लेने के बाद पांच जनवरी 2011 को अपहरणकर्ताओं ने खुशप्रीत की हत्या कर शव मोहाली में फेंक दिया था।
डीएसपी विजय कुमार ने हत्या के मामले में खु़लासा करते हुए खुशप्रीत के पड़ोसी सुखदेव और गुरमिंदर को दबोचा था। बाद में पुलिस ने मामले में शामिल उनके नौकर नंद किशोर को पकड़ा था। 07 अगस्त 2011 को अदालत ने सुखदेव, गुरमिंदर और नंद किशोर के खिलाफ आरोप तय किए थे।